दरभंगा के लाल इम्तियाज बने ISRO के EOS-05 मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर
दरभंगा के जाले के रेवढ़ा गांव निवासी ISRO वैज्ञानिक इम्तियाज अहमद ने EOS-05 जियो-इमेजिंग सेटेलाइट मिशन में प्रोजेक्ट डायरेक्टर की अहम जिम्मेदारी निभाई। जानिए गांव से ISRO तक उनके प्रेरणादायक सफर की पूरी कहानी।
HighLights:
- दरभंगा के जाले प्रखंड के रेवढ़ा गांव के रहने वाले हैं वैज्ञानिक इम्तियाज अहमद
- ISRO के EOS-05 मिशन में निभाई प्रोजेक्ट डायरेक्टर की अहम जिम्मेदारी
- GSLV-F17 रॉकेट से EOS-05 जियो-इमेजिंग सेटेलाइट की सफल लॉन्चिंग
- गांव के स्कूल से पढ़ाई शुरू कर अंतरिक्ष अनुसंधान तक पहुंचे इम्तियाज
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): बिहार के दरभंगा जिले के जाले प्रखंड स्थित छोटे से गांव रेवढ़ा से निकलकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में देश के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन की जिम्मेदारी संभालने वाले वैज्ञानिक इम्तियाज अहमद ने अपने गांव और पूरे मिथिलांचल का नाम रोशन किया है। EOS-05 जियो-इमेजिंग सेटेलाइट मिशन में इम्तियाज अहमद ने परियोजना निदेशक (Project Director) की अहम जिम्मेदारी निभाई है।
GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 जियो-इमेजिंग सेटेलाइट को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किए जाने के बाद रेवढ़ा गांव समेत पूरे इलाके में खुशी और गर्व का माहौल है। जिस गांव की गलियों में इम्तियाज का बचपन बीता, वहीं से निकलकर उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।
रेवढ़ा गांव से अंतरिक्ष तक पहुंचा सफर
वैज्ञानिक इम्तियाज अहमद का सफर बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई रेवढ़ा गांव के मध्य विद्यालय से की। इसके बाद दरभंगा जिला स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की। आगे उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट की शिक्षा हासिल की। तकनीकी शिक्षा के लिए उन्होंने धनबाद स्थित बिरसा मुंडा प्रौद्योगिकी संस्थान, सिंदरी से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उच्च तकनीकी शिक्षा और अपने करियर को नई दिशा देते हुए वे बेंगलुरु पहुंचे। अपनी प्रतिभा, मेहनत और वैज्ञानिक सोच के दम पर इम्तियाज अहमद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़े और देखते ही देखते अंतरिक्ष अनुसंधान के महत्वपूर्ण अभियानों का हिस्सा बनते चले गए।
1998 में ISRO से शुरू किया करियर
इम्तियाज अहमद ने वर्ष 1998 में ISRO में अपने करियर की शुरुआत की थी। करीब तीन दशक के अपने करियर में उन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान और उपग्रह कार्यक्रमों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व संभाले हैं। इस दौरान वह विभिन्न महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े रहे। इससे पहले उन्होंने INSAT-3DS मिशन में भी उपग्रह और परियोजना निदेशक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी। इसके अलावा उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार वह GSAT-20 सहित अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष कार्यक्रमों से भी परियोजना निदेशक के रूप में जुड़े रहे हैं।EOS-05 मिशन में परियोजना निदेशक की जिम्मेदारी मिलना उनके लंबे वैज्ञानिक करियर की एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
EOS-05 मिशन में निभाई अहम भूमिका
EOS-05 जियो-इमेजिंग सेटेलाइट के सफल प्रक्षेपण और कक्षा में स्थापित होने के साथ ही इम्तियाज अहमद की भूमिका भी चर्चा में आ गई है। इस महत्वपूर्ण मिशन की परियोजना निदेशक की जिम्मेदारी संभालना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। मिशन की सफलता के बाद रेवढ़ा गांव में लोगों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया। ग्रामीणों का कहना है कि इम्तियाज ने अपनी उपलब्धि से यह साबित किया है कि छोटे गांव से निकलने वाला युवा भी अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर देश के सबसे बड़े वैज्ञानिक संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पूर्व सैनिक पिता की आंखों में छलके खुशी के आंसू
इम्तियाज अहमद के पिता मो. कमर आलम पूर्व सैनिक हैं। बेटे की इस उपलब्धि पर पिता बेहद भावुक हैं। उन्होंने बताया कि इम्तियाज बचपन से ही पढ़ाई में काफी होनहार थे और उन्हें आसमान, विमान और रॉकेट से विशेष लगाव था। पिता के मुताबिक, बचपन में जब भी आसमान में रॉकेट दिखाई देता था, इम्तियाज उसे काफी देर तक देखते रहते थे। कई बार वह पढ़ाई छोड़कर रॉकेट को देखने लगते थे, जिस पर परिवार से उन्हें डांट भी सुननी पड़ती थी। लेकिन उस उम्र में भी इम्तियाज का सपना स्पष्ट था। वह कहा करते थे कि बड़े होकर वह एक दिन रॉकेट उड़ाएंगे। आज उनकी मेहनत और लगन ने बचपन के उस सपने को एक अलग मुकाम तक पहुंचा दिया है।
चार बहनों के बीच इकलौते भाई
इम्तियाज अहमद अपने परिवार में चार बहनों के बीच इकलौते भाई हैं। साधारण पारिवारिक और ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया। गांव के स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाले इम्तियाज ने आगे चलकर तकनीकी शिक्षा हासिल की और फिर ISRO जैसे देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थान में अपनी जगह बनाई। उनकी कहानी क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
मिथिलांचल में गर्व का माहौल
EOS-05 मिशन में इम्तियाज अहमद की भूमिका की जानकारी सामने आने के बाद उनके पैतृक गांव रेवढ़ा के साथ-साथ दरभंगा और पूरे मिथिलांचल में गर्व का माहौल है। लोगों का कहना है कि इम्तियाज की सफलता केवल उनके परिवार की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है। गांव से निकलकर देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्वपूर्ण मिशन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाना आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ी प्रेरणा है।
गांव की मिट्टी से मिली उड़ान
इम्तियाज अहमद की कहानी इस बात की मिसाल है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। दरभंगा के एक गांव से शुरू हुआ उनका सफर स्कूल, कॉलेज और इंजीनियरिंग की पढ़ाई से होते हुए ISRO तक पहुंचा। आज वह देश के महत्वपूर्ण उपग्रह मिशनों में परियोजना निदेशक की भूमिका निभा रहे हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो गांव की गलियों से भी अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना पूरा किया जा सकता है। रेवढ़ा गांव के इम्तियाज अहमद की यह उपलब्धि दरभंगा ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार और मिथिलांचल के लिए गर्व का विषय है।
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