Highlights :
- फरीदाबाद में सनसनीखेज हत्या: टेक महिंद्रा के एशिया हेड परमजीत धनखड़ की गोली मारकर हत्या
- पड़ोसी पर हत्या का आरोप: पार्किंग विवाद में मोनू शर्मा ने कथित तौर पर चलाईं ताबड़तोड़ गोलियां
- 9 गोलियां लगीं: आरोपी ने करीब 15 राउंड फायरिंग की, परमजीत को नौ गोलियां लगीं
- थाने में दी थी धमकी: पुलिस चौकी में आरोपी ने कथित तौर पर कहा था- आज रात तक तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगा
चंडीगढ़ (Threesocieties.com Desk): Faridabad Murder Case: हरियाणा के फरीदाबाद में पार्किंग विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। सेक्टर-21सी में टेक महिंद्रा के एशिया हेड और सिंगापुर बेस्ड कंपनी के COO परमजीत धनखड़ की उनके पड़ोसी मोनू शर्मा ने गोली मारकर हत्या कर दी। आरोप है कि मोनू ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से करीब 15 राउंड फायरिंग की, जिसमें परमजीत को नौ गोलियां लगीं। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हैरानी की बात यह है कि हत्या से कुछ घंटे पहले ही दोनों के बीच विवाद पुलिस चौकी तक पहुंचा था। आरोप है कि वहां मोनू ने पुलिस के सामने ही परमजीत को रात तक जिंदा नहीं छोड़ने की धमकी दी थी। इसके बावजूद रात में यह वारदात हो गई। परमजीत अधिकतर समय कंपनी के काम से विदेश में रहते थे। वह 5 नवंबर को सिंगापुर से भारत लौटे थे। उन्हें 24 नवंबर को अपने भांजे की शादी में शामिल होना था। लेकिन शादी में शामिल होने की उनकी तैयारी एक पड़ोसी की कथित सनक और पार्किंग विवाद के कारण अधूरी रह गई।
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थाने में दी थी धमकी, कहा था- आज रात तक जिंदा नहीं छोड़ूंगा
इस हत्याकांड का सबसे गंभीर पहलू यह है कि वारदात से पहले ही दोनों पक्षों के बीच विवाद पुलिस चौकी तक पहुंच चुका था। जानकारी के मुताबिक, शनिवार सुबह परमजीत के बेटे शौर्य ने आरोपी मोनू से पार्किंग का गेट ठीक कराने को कहा था। आरोप है कि इस पर मोनू ने शौर्य के साथ गाली-गलौज की और कहा कि वह उसके पिता से बात करेगा।उस समय परमजीत जिम गए हुए थे। बेटे से विवाद की जानकारी मिलने के बाद वह सीधे अनखीर पुलिस चौकी पहुंचे और मोनू के खिलाफ शिकायत दी। पुलिस ने दोनों पक्षों को चौकी बुलाया। वहां बातचीत के दौरान दोनों के बीच समझौता हो गया।
हालांकि, आरोप है कि इसी दौरान मोनू ने पुलिसकर्मियों के सामने ही परमजीत को धमकी दी कि वह उन्हें रात तक जिंदा नहीं छोड़ेगा। उस समय इसे आपसी विवाद में दी गई धमकी समझा गया, लेकिन कुछ घंटे बाद हुई हत्या ने पुलिस की कार्रवाई और समय रहते सुरक्षा मुहैया कराने को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रात 9 बजे पार्किंग में बुलाया, कहा- कभी देखा है विधवा कैसी होती है?
बताया जाता है कि शुक्रवार रात करीब नौ बजे मोनू ने परमजीत को बातचीत के लिए पार्किंग में बुलाया। आरोप है कि वहां उसने परमजीत से कहा, 'कभी देखा है विधवा कैसी होती है?' इसके बाद उसने पिस्तौल निकालकर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। आरोपी ने कथित तौर पर करीब 15 राउंड फायरिंग की। इनमें से नौ गोलियां परमजीत को लगीं। गोलियां आसपास खड़ी कारों और दीवारों पर भी लगीं। गंभीर रूप से घायल परमजीत की मौके पर ही मौत हो गई। गोली चलने की आवाज से पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। बेटे शौर्य की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। घटनास्थल से कारतूसों के खोखे बरामद किए गए। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया।
एक सप्ताह पहले तोड़ा था पार्किंग का गेट
दोनों परिवारों के बीच विवाद की शुरुआत पार्किंग से जुड़ी बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, करीब एक सप्ताह पहले मोनू ने रात के समय परमजीत की पार्किंग का गेट तोड़ दिया था। उस समय परमजीत सिंगापुर में थे। भारत लौटने के बाद परमजीत ने गेट ठीक कराने को लेकर बात की थी। शनिवार सुबह उनके बेटे शौर्य ने भी मोनू से गेट ठीक कराने का आग्रह किया, लेकिन इसी बात पर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने और कुत्ते को वहां घुमाने को लेकर भी दोनों परिवारों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। मामूली दिखने वाला यह विवाद आखिरकार हत्या तक पहुंच गया।
रात में दोस्तों के साथ करता था हुड़दंग, तेज म्यूजिक और हवाई फायरिंग की चर्चा
स्थानीय लोगों के अनुसार, मोनू शर्मा का व्यवहार पहले से विवादित बताया जाता था। आरोप है कि उसने मकान नंबर 641 के पास एक प्लॉट भी लिया हुआ था, जहां वह रात में दोस्तों के साथ बैठता था। स्थानीय निवासियों का दावा है कि वहां देर रात तक तेज आवाज में संगीत बजाया जाता था और हवाई फायरिंग भी होती थी। उसकी लग्जरी कारों को लेकर भी आसपास के लोगों में नाराजगी थी। आरोप है कि वह सेक्टर की सड़कों पर तेज रफ्तार से गाड़ियां चलाता था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई निवासी उससे परेशान थे, लेकिन खुलकर विरोध करने से बचते थे। करीब एक साल पहले उसके खिलाफ GST चोरी के आरोप भी सामने आए थे और GST विभाग की ओर से उसके ठिकाने पर छापेमारी किए जाने की बात कही जा रही है।
दो लाइसेंसी पिस्टल होने का दावा, बैग से 100 गोलियां मिलने की चर्चा
जानकारी के मुताबिक, आरोपी के पास दो लाइसेंसी पिस्टल थीं। वारदात के समय उसके पास तीन पिस्टल होने का दावा भी किया जा रहा है। परमजीत के दोस्तों ने यह भी दावा किया है कि पुलिस ने आरोपी के बैग से करीब 100 गोलियां बरामद की हैं। हालांकि, हथियारों और बरामद गोलियों की संख्या को लेकर पुलिस की आधिकारिक पुष्टि तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी के पास कितने हथियार थे और उनका इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया।
माता-पिता की सेवा के लिए ठुकराया था ऑस्ट्रेलिया ट्रांसफर का ऑफर
परमजीत धनखड़ के दोस्तों के मुताबिक, उनके पिता भारतीय नौसेना में कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हैं। परमजीत अपने माता-पिता के साथ फरीदाबाद में रहते थे और उनकी देखभाल को प्राथमिकता देते थे। बताया जाता है कि उन्होंने कंपनी के सामने यह व्यवस्था रखने का आग्रह किया था कि वह 15 दिन माता-पिता के साथ भारत में रहेंगे और अगले 15 दिन कंपनी के काम से विदेश में रहेंगे।दोस्तों के अनुसार, कंपनी की ओर से उन्हें ऑस्ट्रेलिया ट्रांसफर का ऑफर भी दिया गया था, लेकिन माता-पिता की देखभाल के कारण उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। वह अपने परिवार के बेहद करीब थे।
सिंगापुर से आए थे, 24 नवंबर को भांजे की शादी में होना था शामिल
परमजीत धनखड़ सिंगापुर बेस्ड कंपनी में COO और टेक महिंद्रा के एशिया हेड के तौर पर काम कर रहे थे। उनका अधिकतर समय विदेश में बीतता था। वह 5 नवंबर को भारत लौटे थे। परिवार के मुताबिक, उन्हें 24 नवंबर को अपने भांजे की शादी में शामिल होना था। घर आने के कुछ ही दिनों बाद पड़ोसी के साथ पार्किंग विवाद ने उनकी जान ले ली।
बेटे की शिकायत पर पांच लोगों के खिलाफ केस
सूरजकुंड थाना प्रभारी प्रह्लाद के मुताबिक, परमजीत के बेटे शौर्य की शिकायत पर मोनू शर्मा उर्फ मोहन, उसकी पत्नी दिव्या, बेटे मयंक, बेटी नैना और भाई हेतराम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वारदात के बाद आरोपी के परिवार समेत फरार होने की बात सामने आई है। पुलिस आरोपियों की तलाश और मामले की जांच में जुटी है। परमजीत के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस हत्याकांड के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आरोपी ने कथित तौर पर पुलिस चौकी में ही जान से मारने की धमकी दी थी, तो उसके बाद क्या एहतियाती कदम उठाए गए? क्या शिकायत को गंभीरता से लिया गया था? क्या दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद मामले की निगरानी की गई? क्या पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने या आरोपी को रोकने के लिए कोई कदम उठाया जा सकता था?
इन सवालों का जवाब पुलिस जांच और संबंधित अधिकारियों के बयान से ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, एक पार्किंग विवाद में एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया और यह घटना समय रहते धमकियों को गंभीरता से लेने की जरूरत को फिर सामने ले आई है।