देश की पुलिसिंग रैंकिग में झारखंड 32वें नंबर पर, सिमडेगा चमका; पलामू का प्रदर्शन कमजोर
झारखंड पुलिसिंग रैंकिंग में 32वें स्थान पर रहा। सिमडेगा ने 64.74 अंक हासिल किए, जबकि पलामू 48.43 पर रहा और ICT Application में शून्य स्कोर मिला।
HighLights:
- झारखंड पुलिस का कुल स्कोर 56.08 अंक दर्ज किया गया
- 64.74 अंक के साथ सिमडेगा राज्य में बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों में रहा
- 48.43 अंक के साथ पलामू का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा
- पलामू को ICT Application में एक भी अंक नहीं, यानी स्कोर शून्य मिला
रांची (Threesocieties.com Desk): देश की पुलिसिंग व्यवस्था के विभिन्न मानकों पर जारी रैंकिंग में झारखंड 32वें स्थान पर रहा है। राज्य का कुल स्कोर 56.08 अंक दर्ज किया गया है। रैंकिंग के आंकड़े झारखंड पुलिस के प्रदर्शन में जिलावार अंतर को भी सामने लाते हैं। जहां सिमडेगा ने 64.74 अंक हासिल कर बेहतर प्रदर्शन किया, वहीं पलामू 48.43 अंक के साथ सबसे पीछे रहा।
खास बात यह है कि पलामू का ICT Application में स्कोर शून्य रहा। डिजिटल पुलिसिंग के मौजूदा दौर में तकनीकी मानकों वाली इस श्रेणी में शून्य अंक मिलना समीक्षा का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
64.74 अंक के साथ सिमडेगा का बेहतर प्रदर्शन
रैंकिंग में सिमडेगा पुलिस का प्रदर्शन झारखंड के लिए राहत देने वाला रहा। जिले ने कुल 64.74 अंक हासिल किए। इसमें प्रशासनिक सुधार के तहत 17.05 अंक, ऑपरेशनल एफिशिएंसी में 32.98 अंक, ICT Application में 10 अंक और Integration में 4.71 अंक शामिल हैं। विशेष रूप से ICT Application में सिमडेगा के पूरे 10 अंक हासिल करने को महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इससे संकेत मिलता है कि जिले में तकनीक आधारित पुलिसिंग से जुड़े मूल्यांकन मानकों पर काम किया गया है।
पलामू 48.43 अंक पर, ICT में शून्य
दूसरी ओर पलामू पुलिस का कुल स्कोर 48.43 अंक रहा। जिले को प्रशासनिक सुधार में 17.05 अंक और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में 26.67 अंक मिले। लेकिन ICT Application श्रेणी में पलामू का स्कोर शून्य रहा। डिजिटल पुलिसिंग के दौर में यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मूल्यांकन में तकनीक से जुड़े कई मानकों को शामिल किया गया है। इनमें ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति और MedLEaPR जैसे डिजिटल पुलिसिंग से जुड़े पहलू शामिल हैं। ICT Application में शून्य स्कोर सामने आने के बाद पलामू पुलिस की तकनीकी कार्यप्रणाली और इन डिजिटल प्रणालियों के इस्तेमाल की स्थिति समीक्षा का विषय बन सकती है।
डिजिटल पुलिसिंग के मानकों पर फोकस
पुलिसिंग के बदलते स्वरूप में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। केस से जुड़े डिजिटल साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक समन, ऑनलाइन सुनवाई से संबंधित व्यवस्थाएं और अन्य डिजिटल एप्लीकेशन पुलिस एवं न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में जिलों के ICT प्रदर्शन का रैंकिंग में अलग से मूल्यांकन किया जाना पुलिसिंग में तकनीकी क्षमता की स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण आधार बनता है।
पुलिस मुख्यालय ने लिया संज्ञान
रैंकिंग के आंकड़े सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय स्तर पर भी जिलों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई। इसके लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की गई और सिमडेगा तथा पलामू के एसपी को ऑनलाइन बैठक में शामिल होने के लिए कहा गया। इससे संकेत मिलता है कि रैंकिंग के आंकड़ों को केवल रिपोर्ट तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि संबंधित जिलों के प्रदर्शन की समीक्षा भी की जा रही है।
सिमडेगा और पलामू के प्रदर्शन में बड़ा अंतर
एक ही राज्य के दो जिलों के आंकड़ों में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। सिमडेगा का कुल स्कोर जहां 64.74 अंक है, वहीं पलामू 48.43 अंक पर है। दोनों जिलों के बीच करीब 16.31 अंकों का अंतर है। सबसे उल्लेखनीय अंतर ICT Application में दिखाई देता है। सिमडेगा ने इस श्रेणी में 10 अंक हासिल किए, जबकि पलामू का स्कोर शून्य रहा।
झारखंड पुलिस के लिए क्या कहते हैं आंकड़े?
पूरे राज्य का 56.08 अंक और 32वां स्थान यह दिखाता है कि अलग-अलग जिलों के प्रदर्शन को बेहतर करने की गुंजाइश बनी हुई है। वहीं सिमडेगा का प्रदर्शन यह भी बताता है कि राज्य के जिलों में बेहतर स्कोर हासिल करने की क्षमता मौजूद है।पलामू के ICT में शून्य अंक और कुल 48.43 अंक मुख्यालय के लिए उन क्षेत्रों की पहचान का आधार बन सकते हैं, जहां तकनीकी और ऑपरेशनल स्तर पर सुधार की जरूरत है।
कुल मिलाकर रैंकिंग ने झारखंड पुलिस के सामने दो अलग तस्वीरें रखी हैं। सिमडेगा का 64.74 अंक का प्रदर्शन तकनीक और पुलिसिंग के बेहतर समन्वय को सामने लाता है, जबकि पलामू का 48.43 अंक और ICT में शून्य स्कोर सुधार और समीक्षा की जरूरत वाले क्षेत्रों की ओर ध्यान खींचता है।
Anjala Kumar 



