झारखंड: JSSC CGL नियुक्ति रद्द होने के बाद अभ्यर्थियों का मार्च, हाईकोर्ट जाने की तैयारी
JSSC CGL नियुक्ति रद्द होने के बाद सफल अभ्यर्थियों ने बारिश के बीच प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक फ्लैश लाइट मार्च निकाला। अभ्यर्थी फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
HighLights:
- JSSC CGL नियुक्ति रद्द होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों का विरोध जारी
- प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक सैकड़ों अभ्यर्थियों ने निकाला मार्च
- बारिश के बीच मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर किया शांतिपूर्ण प्रदर्शन
- प्रभावित अभ्यर्थी झारखंड हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने की तैयारी में
रांची (Threesocieties.com Desk): JSSC CGL नियुक्ति रद्द किए जाने के बाद सफल और चयनित अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार की देर शाम सैकड़ों चयनित अभ्यर्थियों ने धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला। बारिश के बीच निकाले गए इस मार्च में अभ्यर्थियों ने मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर सरकार के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों के संघर्ष और अपनी योग्यता व मेरिट के आधार पर नौकरी हासिल की थी। ऐसे में पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर देना उनके भविष्य के साथ अन्याय है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार करने और उन्हें लिखित आदेश उपलब्ध कराने की मांग की।
बारिश के बावजूद प्रोजेक्ट भवन के सामने डटे रहे अभ्यर्थी
राजधानी रांची में पिछले 24 घंटे से जारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के सामने डटे रहे। उनका कहना है कि सरकार के फैसले से उनके सामने रोजगार और भविष्य का संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, नियुक्ति रद्द किए जाने की घोषणा तो कर दी गई, लेकिन उन्हें अब तक इसकी लिखित सूचना नहीं दी गई है।
अभ्यर्थियों ने कहा कि JSSC CGL की प्रक्रिया का विज्ञापन वर्ष 2015 में जारी हुआ था। इसके बाद परीक्षा, विवाद, न्यायिक प्रक्रिया और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ। उनका दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार की ओर से नियुक्तियां दी गई थीं। प्रदर्शन कर रहे एक अभ्यर्थी ने कहा कि उन्होंने अपनी मेरिट के दम पर नौकरी हासिल की थी और वर्षों तक इंतजार किया। अब अचानक नियुक्ति रद्द किए जाने से उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
नियुक्ति रद्द करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती की तैयारी
सरकार के फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थी अब कानूनी लड़ाई की तैयारी में जुट गए हैं। प्रभावित अभ्यर्थियों ने अधिवक्ताओं से संपर्क करना शुरू कर दिया है और झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनोद सिंह ने सरकार के निर्णय को एकतरफा बताया है। उनका कहना है कि नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों को सुनवाई का अवसर दिए बिना इतना बड़ा फैसला लेना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है। उनके अनुसार, सरकार ने पहले कोर्ट के आदेश के बाद नियुक्तियां की थीं। ऐसे में उन्हीं नियुक्तियों को समाप्त करने से पहले प्रभावित अभ्यर्थियों का पक्ष सुना जाना चाहिए था। कुछ अभ्यर्थियों के खिलाफ गड़बड़ी के आरोप के आधार पर बड़ी संख्या में नियुक्त कर्मियों को हटाना उचित है या नहीं, इस मुद्दे को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
लिखित आदेश के बाद तय होगी कानूनी रणनीति
अधिवक्ताओं के मुताबिक, सरकार की ओर से अभी संबंधित आदेश या संकल्प जारी किया जाना महत्वपूर्ण है। नियुक्ति रद्द करने के आधिकारिक आदेश में सरकार की ओर से इसके आधार और कारण स्पष्ट किए जाएंगे। इसके बाद उसी आधार पर हाईकोर्ट में कानूनी चुनौती की रणनीति तय की जाएगी।
प्रभावित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें सरकार के लिखित आदेश का इंतजार है। उनका दावा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही CGL परीक्षा का परिणाम जारी किया गया था और इसके आधार पर सहायक प्रशाखा पदाधिकारी समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। इसी वजह से वे अपनी नियुक्ति रद्द करने के फैसले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
सरकार के फैसले के समर्थन में भी सामने आया तर्क
वहीं, JSSC CGL में पेपर लीक मामले को लेकर हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में पैरवी करने वाले वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने सरकार के फैसले को उत्साहवर्धक बताया है। उनका कहना है कि मामले की जांच में पर्याप्त साक्ष्य सामने आए हैं और बाद की CID जांच में भी कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। ऐसी स्थिति में दागी और गैर-दागी अभ्यर्थियों के बीच स्पष्ट अंतर करना मुश्किल हो जाता है। उनके अनुसार, इसी वजह से पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को निरस्त करने की स्थिति बनी।
आंदोलन और कानूनी लड़ाई दोनों जारी
JSSC CGL नियुक्ति रद्द होने के बाद अब मामला सड़क से अदालत तक पहुंचता दिख रहा है। एक ओर चयनित अभ्यर्थी बारिश के बीच प्रदर्शन कर सरकार से फैसला वापस लेने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित अभ्यर्थी हाईकोर्ट में कानूनी चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। मंगलवार देर शाम प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक निकाला गया फ्लैश लाइट मार्च इसी विरोध की अगली कड़ी रहा। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उन्हें नियुक्ति रद्द किए जाने का लिखित आधार नहीं दिया जाता और उनकी बात नहीं सुनी जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।




