झारखंड : DGP तदाशा मिश्रा की आपत्ति पर IPS सुमन गुप्ता का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति NOC रद्द

झारखंड कैडर की 1997 बैच की IPS अधिकारी सुमन गुप्ता का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति NOC DGP तदाशा मिश्रा की आपत्ति के बाद रद्द कर दिया गया। जानिए पूरा मामला, प्रशासनिक प्रक्रिया और सरकार के फैसले की पूरी जानकारी।

झारखंड : DGP तदाशा मिश्रा की आपत्ति पर IPS सुमन गुप्ता का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति NOC रद्द
DGP की आपत्ति के बाद IPS सुमन गुप्ता का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति NOC रद्द।

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     HighLights:

  • 1997 बैच की IPS अधिकारी सुमन गुप्ता का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति NOC रद्द
  • DGP तदाशा मिश्रा की आपत्ति के बाद गृह विभाग ने लिया फैसला
  • पुलिस मुख्यालय की अनुशंसा के बिना जारी हुआ था NOC
  • गृह विभाग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से NOC पर कोई निर्णय नहीं लेने का अनुरोध किया

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड प्रशासनिक महकमे में एक बड़ा फैसला सामने आया है। झारखंड कैडर की 1997 बैच की वरिष्ठ IPS अधिकारी एवं वर्तमान एडीजी (रेल) सुमन गुप्ता का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) के लिए जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) रद्द कर दिया गया है। यह निर्णय पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा की ओर से उठाई गई गंभीर प्रशासनिक आपत्ति के बाद लिया गया है।

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जानकारी के अनुसार, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने पहले केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए NOC जारी कर दिया था। हालांकि, बाद में DGP तदाशा मिश्रा ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा कि NOC जारी करने से पहले पुलिस मुख्यालय की अनिवार्य अनुशंसा नहीं ली गई, जो स्थापित प्रशासनिक प्रक्रिया के विपरीत है।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, एडीजी (रेल) सुमन गुप्ता ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए अपना आवेदन डीजी रेल अनिल पालटा के माध्यम से सीधे गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग को भेज दिया था। सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ऐसा आवेदन पहले पुलिस मुख्यालय भेजा जाता है। वहां अधिकारी की सेवा पुस्तिका, सतर्कता (Vigilance) संबंधी स्थिति, गोपनीय अभिलेख तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ही उसे गृह विभाग को अग्रसारित किया जाता है। लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

DGP ने क्यों जताई आपत्ति?

DGP तदाशा मिश्रा ने मुख्य सचिव को लिखे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यह मामला किसी अधिकारी विशेष के विरोध का नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, संस्थागत व्यवस्था और निर्धारित नियमों के पालन का है। उन्होंने कहा कि यदि स्थापित प्रक्रिया का पालन किए बिना NOC जारी किया जाएगा, तो भविष्य में प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी कारण उन्होंने इस मामले में पुनर्विचार करने का अनुरोध किया।

गृह विभाग ने लिया बड़ा फैसला

DGP की आपत्ति को गंभीरता से लेते हुए गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर पहले जारी किए गए NOC को वापस लेने का अनुरोध किया है। साथ ही केंद्र सरकार से कहा गया है कि फिलहाल इस NOC के आधार पर कोई निर्णय नहीं लिया जाए। इस कदम के बाद सुमन गुप्ता की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया फिलहाल रुक गई है। माना जा रहा है कि अब पूरे मामले में निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज

इस घटनाक्रम के बाद राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से जुड़े मामलों में नियमों के सख्ती से पालन का संकेत देता है। साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि वरिष्ठ अधिकारियों के मामलों में भी प्रक्रिया और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।