CISF में बड़ा बदलाव: कोल सेक्टर रांची IG के हवाले, 15 अक्टूबर से नई व्यवस्था

CISF का बड़ा पुनर्गठन 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। BCCL समेत 22 कोल इकाइयां रांची, 27 स्टील इकाइयां भिलाई और करीब 54 पावर इकाइयां कोलकाता के IG के अधीन होंगी।

CISF में बड़ा बदलाव: कोल सेक्टर रांची IG के हवाले, 15 अक्टूबर से नई व्यवस्था
CISF में बड़ा फेरबदल: स्टील भिलाई, पावर कोलकाता और कोल सेक्टर रांची IG के अधीन।

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       Highlights:

  • CISF मुख्यालय ने स्टील, कोल, पावर समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों की कमांड व्यवस्था में किया बड़ा बदलाव 
  • कोल सेक्टर की 22 CISF इकाइयों का नियंत्रण पूर्वी खंड, रांची के IG प्रबोध चंद्रा को सौंपा जाएगा।
  • स्टील सेक्टर की 27 इकाइयां सेंट्रल सेक्टर, भिलाई के IG पीयूष पांडेय के अधीन होंगी
  • पावर सेक्टर की लगभग 54 इकाइयों की जिम्मेदारी कोलकाता के IG एके मोहनका संभालेंगे

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने देश की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने कमांड और प्रशासनिक नियंत्रण ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। CISF मुख्यालय, दिल्ली की ओर से जारी परिपत्र के अनुसार, स्टील, कोल, पावर समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की इकाइयों के नियंत्रण क्षेत्र का पुनर्गठन किया गया है। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी।

इस बदलाव के तहत स्टील सेक्टर की इकाइयों को भिलाई, पावर सेक्टर की इकाइयों को कोलकाता और कोल सेक्टर की इकाइयों को रांची स्थित संबंधित महानिरीक्षक (IG) के नियंत्रण में रखा जाएगा। इसके अलावा पोर्ट, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष संस्थान, परिवहन एवं मेट्रो, सरकारी और ऐतिहासिक इमारतों, तेल संयंत्रों, प्रशिक्षण केंद्रों तथा एयरपोर्ट सेक्टर की इकाइयों के प्रशासनिक नियंत्रण में भी बदलाव किया गया है। CISF की इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा जरूरतों के अनुसार कमांड प्रणाली को व्यवस्थित करना, अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाना और क्षेत्र विशेष की सुरक्षा में विशेषज्ञता विकसित करना है।

कोल सेक्टर की 22 CISF इकाइयों की कमान रांची को

पुनर्गठन में झारखंड के कोयला क्षेत्र के लिए रांची की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। कोल सेक्टर की कुल 22 CISF इकाइयों का नियंत्रण अब पूर्वी खंड, रांची के महानिरीक्षक प्रबोध चंद्रा को सौंपा जाएगा। इसमें भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), धनबाद; सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL), करगली एवं मगध-आम्रपाली; नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL), सिंगरौली; साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), बिलासपुर; ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL), शीतलपुर और कोल माइनिंग हजारीबाग जैसी इकाइयां शामिल हैं।

इस बदलाव से धनबाद और झारखंड के अन्य कोयला क्षेत्रों में तैनात CISF अधिकारियों एवं जवानों के लिए प्रशासनिक नियंत्रण की नई व्यवस्था बनेगी। BCCL जैसे महत्वपूर्ण कोयला प्रतिष्ठानों की कमांड अब कोल सेक्टर के तहत रांची स्थित IG के नियंत्रण में रहेगी। कोयला खदानों और संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिहाज से यह बदलाव अहम माना जा रहा है। हालांकि, नई व्यवस्था का जमीनी स्तर पर क्या असर पड़ेगा, यह इसके क्रियान्वयन और प्रशासनिक समन्वय पर निर्भर करेगा।

स्टील सेक्टर की 27 इकाइयां भिलाई के अधीन

CISF ने स्टील सेक्टर की कुल 27 इकाइयों को सेंट्रल सेक्टर, भिलाई के महानिरीक्षक पीयूष पांडेय के नियंत्रण में रखने का निर्णय लिया है। इसमें स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के बोकारो स्टील प्लांट (BSL), दुर्गापुर, बर्नपुर, राउरकेला, भिलाई और सलेम सहित विभिन्न स्थानों पर संचालित इकाइयां शामिल हैं। 

बीपीएससीएल की इकाई भी नई व्यवस्था के अंतर्गत आएगी।इससे बोकारो स्टील प्लांट की प्रशासनिक कमांड व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव होगा। पहले रांची स्थित पूर्वी खंड के IG कार्यालय से संबंधित प्रशासनिक कार्यों का संचालन होता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत स्टील सेक्टर की इकाइयों का नियंत्रण भिलाई स्थित IG के पास होगा। इसका मतलब है कि बोकारो समेत स्टील सेक्टर की संबंधित इकाइयों में कार्यरत अधिकारियों और जवानों को कुछ प्रशासनिक मामलों के लिए भिलाई स्थित कार्यालय से समन्वय करना पड़ सकता है।

पावर सेक्टर की लगभग 54 इकाइयों का नियंत्रण कोलकाता को

पावर सेक्टर में भी व्यापक बदलाव किया गया है। CISF की लगभग 54 छोटी-बड़ी पावर इकाइयों की निगरानी अब नॉर्थ ईस्ट सेक्टर, जोन-1, कोलकाता के महानिरीक्षक एके मोहनका के अधीन होगी। इन इकाइयों में सीटीपीएस चंद्रपुरा, बीटीपीएस बोकारो थर्मल, टीटीपीएस ललपनिया, डीवीसी पंचेत, केटीपीएस कोडरमा, पीटीपीएस पतरातू और बीटीपीपी बक्सर सहित विभिन्न पावर प्रतिष्ठान शामिल हैं।

इनमें से कई इकाइयां झारखंड में स्थित हैं और अब तक इनके प्रशासनिक कार्यों के लिए रांची स्थित IG कार्यालय से संपर्क किया जाता था। नई व्यवस्था के बाद संबंधित इकाइयों को कोलकाता स्थित IG कार्यालय के साथ समन्वय करना होगा।पावर सेक्टर को अलग प्रशासनिक नियंत्रण के तहत रखने का उद्देश्य बिजली उत्पादन से जुड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक केंद्रित बनाना और क्षेत्रीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।

15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी नई व्यवस्था

CISF मुख्यालय ने इस पुनर्गठन के संबंध में परिपत्र जारी कर दिया है। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। इसके तहत विभिन्न सेक्टरों की इकाइयों को औद्योगिक क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग कमांड संरचनाओं के अंतर्गत रखा जाएगा। वर्तमान व्यवस्था में CISF के विभिन्न सेक्टरों के वरिष्ठ अधिकारियों को स्टील प्लांट, कोयला खदान, बिजली संयंत्र, बंदरगाह, अंतरिक्ष प्रतिष्ठान, परिवहन नेटवर्क और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा से जुड़े प्रशासनिक दायित्व संभालने पड़ते हैं। नई संरचना में स्टील, कोल और पावर जैसे क्षेत्रों को अधिक स्पष्ट रूप से अलग किया जा रहा है। इससे संबंधित अधिकारियों को अपने निर्धारित औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा आवश्यकताओं पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलेगा।

अधिकारियों और जवानों को मिल सकती है क्षेत्र विशेष की जिम्मेदारी

CISF के पुनर्गठन का एक प्रमुख उद्देश्य अधिकारियों और जवानों को किसी खास औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था में अधिक विशेषज्ञ बनाना है। कोयला खदानों की सुरक्षा की चुनौतियां स्टील प्लांट या पावर प्लांट से अलग होती हैं। इसी तरह एयरपोर्ट, मेट्रो, बंदरगाह और परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए भी अलग तरह की तैयारी और कार्यप्रणाली की आवश्यकता होती है। ऐसे में सेक्टर आधारित कमांड व्यवस्था से संबंधित अधिकारियों को अपने क्षेत्र की जरूरतों, सुरक्षा चुनौतियों और परिचालन संबंधी समस्याओं पर अधिक केंद्रित होकर काम करने का अवसर मिल सकता है।

इसके साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर IG और DIG को अधिक प्रशासनिक स्वतंत्रता और अधिकार देने की मंशा भी इस बदलाव से जुड़ी है। इससे जमीनी स्तर पर निर्णय लेने, सुरक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान करने और विभागीय कामकाज में तेजी लाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन उद्देश्यों की वास्तविक सफलता नई व्यवस्था के क्रियान्वयन, अधिकारियों के बीच समन्वय और शिकायतों के समयबद्ध निपटारे पर निर्भर करेगी।

IG कार्यालय की दूरी बढ़ने से बढ़ सकती है परेशानी

CISF के नए कमांड ढांचे से सुरक्षा संबंधी प्रशासनिक जिम्मेदारियां अधिक स्पष्ट हो सकती हैं, लेकिन कुछ इकाइयों के लिए संबंधित IG कार्यालय की दूरी बढ़ने की चुनौती भी सामने आ सकती है। बोकारो स्टील प्लांट के लिए IG कार्यालय अब रांची के बजाय भिलाई में होगा। इसी तरह सेल की दुर्गापुर, बर्नपुर, राउरकेला और तमिलनाडु स्थित सलेम स्टील प्लांट की इकाइयों से जुड़े अधिकारियों एवं जवानों को कुछ विभागीय कार्यों के लिए भिलाई स्थित कार्यालय से संपर्क करना पड़ सकता है।

इसी प्रकार, चंद्रपुरा, बोकारो थर्मल और ललपनिया जैसे पावर प्रतिष्ठानों का प्रशासनिक नियंत्रण रांची से कोलकाता स्थानांतरित होने के बाद संबंधित अधिकारियों को विभागीय मामलों में कोलकाता स्थित IG कार्यालय से समन्वय करना होगा। दूरी बढ़ने से कुछ मामलों में यात्रा, समय और प्रशासनिक समन्वय से जुड़ी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सभी विभागीय कार्यों के लिए अधिकारियों और जवानों को व्यक्तिगत रूप से संबंधित IG कार्यालय जाना होगा या इनमें से कई प्रक्रियाएं डिजिटल अथवा क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से पूरी की जा सकेंगी। इसलिए नई व्यवस्था के वास्तविक प्रभाव का आकलन इसके क्रियान्वयन और विभागीय निर्देशों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर रहेगा जोर

CISF देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। कोयला खदानों, स्टील प्लांटों, बिजली संयंत्रों और अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कमांड व्यवस्था जरूरी है। नए पुनर्गठन के जरिए CISF मुख्यालय ने विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के प्रशासनिक नियंत्रण को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाया है। अब स्टील सेक्टर की कमान भिलाई, पावर सेक्टर की कमान कोलकाता और कोल सेक्टर की कमान रांची के IG के अधीन होगी।