Highlights:
- ₹160 करोड़ के वित्तीय निवेश से जुड़े दस्तावेजों में आरती सिंह के नाम का भी जिक्र
- 29 जुलाई की छापेमारी में ED को 200 से ज्यादा संपत्तियों की जानकारी मिली थी
- आरती सिंह को ED ने पहले भी दो बार भेजा था समन, तीसरे समन पर 31 अगस्त को हुईं पेश
- ED ने आय के स्रोत और निवेश से जुड़े दस्तावेजों पर मांगी जानकारी
रांची (Threesocieties.com Desk): कोयले के अवैध खनन, परिवहन, भंडारण और तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में धनबाद के चर्चित कोयला कारोबारी एलबी सिंह की पत्नी आरती सिंह सोमवार को रांची स्थित ED के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचीं। समन के आलोक में पहुंचीं आरती सिंह से आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ED के अधिकारियों ने पूछताछ शुरू की।
पूछताछ का प्रमुख केंद्र वित्तीय निवेश, चल-अचल संपत्ति और इन निवेशों के आय स्रोत से जुड़े दस्तावेज बताए जा रहे हैं। ED की जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों में आरती सिंह के नाम पर किए गए निवेश का भी उल्लेख है।
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₹160 करोड़ के निवेश से जुड़े दस्तावेज ED के हाथ लगे
कोयला घोटाले की जांच के दौरान ED ने दूसरे चरण की कार्रवाई में करीब ₹160 करोड़ के वित्तीय निवेश को फ्रीज किया था। छापेमारी के दौरान मिले निवेश संबंधी दस्तावेजों में आरती सिंह के नाम पर किए गए निवेश भी शामिल बताए गए हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ED ने आरती सिंह को पहले भी पूछताछ के लिए समन जारी किया था। उन्हें दो बार समन भेजा गया, लेकिन दोनों अवसरों पर वह पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुईं और समय की मांग की थी। इसके बाद ED ने तीसरा समन जारी किया। तीसरे समन के बाद 31 अगस्त को आरती सिंह रांची स्थित ED कार्यालय पहुंचीं, जहां उनसे निवेश और संपत्तियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी ली गई।
आय के स्रोत और निवेश पर ED के सवाल
सूत्रों के अनुसार, ED ने आरती सिंह से उनके नाम पर किए गए निवेश और संपत्तियों के आय स्रोत से संबंधित जानकारी मांगी। छापेमारी के दौरान जब्त दस्तावेजों, नकदी, म्यूचुअल फंड निवेश और संपत्ति से संबंधित कागजात के बारे में भी उनसे जानकारी ली गई। आरती सिंह की ओर से बताया गया कि उनके पति एलबी सिंह कोयला कारोबार करते हैं और उनके पास मौजूद संपत्ति तथा निवेश कारोबार से हुई आय से बनाए गए हैं। उनके अनुसार, एलबी सिंह का कोई अवैध कारोबार नहीं है। हालांकि, ED इन दावों और दस्तावेजों की जांच अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत आगे करेगी।
29 जुलाई को एलबी सिंह से जुड़े 31 ठिकानों पर छापेमारी
ED ने 29 जुलाई 2026 को धनबाद में एलबी सिंह के संबंधी, अनिल गोयल के करीबी साबिर आलम, कोल कारोबारी गणेश यादव, पप्पू मंडल, शेखर यादव, अनूप चौहान, हरेंद्र चौहान, रोहित यादव तथा इनके सहयोगियों के आवास और कार्यालय से जुड़े करीब 31 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान ED को बड़ी मात्रा में नकदी, निवेश और संपत्ति से संबंधित दस्तावेज मिलने की बात सामने आई थी। छापेमारी में एलबी सिंह के संबंधी के ठिकाने से लगभग ₹160 करोड़ के म्यूचुअल फंड निवेश तथा 200 से ज्यादा अचल संपत्तियों से संबंधित जानकारी, डेटा, डिजिटल डिवाइस और सेल डीड आदि मिलने की बात कही गई थी।ED की जांच में जब्त की गई 200 से ज्यादा अचल संपत्तियों की अनुमानित कीमत करोड़ों आंकी गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इनमें से अधिकांश निवेश आरती सिंह के नाम पर होने की बात सामने आई थी। यही वजह है कि ED अब आरती सिंह से निवेश और संपत्ति के स्रोत को लेकर जानकारी जुटा रही है।
ED ने क्यों दर्ज की ECIR?
झारखंड पुलिस में दर्ज विभिन्न प्राथमिकियों के आधार पर ED ने इस मामले में Enforcement Case Information Report (ECIR) दर्ज की थी। पुलिस मामलों में धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कोयला खनन, चोरी या अवैध तरीके से निकाले गए कोयले की तस्करी, कोयला उठाने के नाम पर जबरन वसूली, लेवी और अन्य अवैध गतिविधियों से जुड़े आरोप शामिल थे। पुलिस की ओर से कई मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की गई थी। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।
अवैध कमाई को निवेश और संपत्ति में लगाने का आरोप
ED की जांच में यह आरोप सामने आया कि आरोपितों ने कथित आपराधिक गतिविधियों से बड़ी मात्रा में अवैध कमाई की। जांच एजेंसी को शक है कि इस राशि को अलग-अलग माध्यमों से घुमाकर यानी लेयरिंग के जरिए वैध दिखाने का प्रयास किया गया। ED का आरोप है कि इसके लिए विभिन्न संस्थाओं और लोगों का इस्तेमाल किया गया तथा बड़ी संख्या में चल और अचल संपत्तियों में निवेश किया गया। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि जब्त दस्तावेजों और निवेश का वास्तविक स्रोत क्या है तथा संबंधित संपत्तियां और वित्तीय निवेश किस तरह अर्जित किए गए।
2025 में भी ED ने की थी कार्रवाई
एलबी सिंह से जुड़े मामले में ED की कार्रवाई नई नहीं है। इससे पहले 2025 में भी ED ने अनिल गोयल, एलबी सिंह और उनसे जुड़े लोगों तथा संस्थाओं के ठिकानों पर धनबाद और दुमका में छापेमारी की थी। उस कार्रवाई के दौरान ED को 150 से अधिक जमीन के दस्तावेज और करीब ₹2.20 करोड़ नकद मिलने की बात सामने आई थी। अब 2026 में हुई कार्रवाई और उसके बाद आरती सिंह से पूछताछ ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
आगे भी हो सकती है पूछताछ
आरती सिंह से पूछताछ के बाद ED दस्तावेजों और उनके द्वारा दी गई जानकारी का मिलान करेगी। यदि जांच के दौरान किसी दस्तावेज, निवेश या संपत्ति को लेकर अतिरिक्त जानकारी की जरूरत पड़ती है, तो ED उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुला सकती है। फिलहाल ED की जांच का फोकस ₹160 करोड़ के वित्तीय निवेश, आरती सिंह के नाम पर मौजूद निवेश, 200 से ज्यादा अचल संपत्तियों और इनकी खरीद के लिए इस्तेमाल धन के स्रोत पर है।