झारखंड परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा: ब्लैकलिस्टेड ICN को JSSC CGL का काम, JPSC में OMR बदलने का आरोप

Jharkhand Exam Scam: JSSC CGL में ब्लैकलिस्टेड ICN एजेंसी की भूमिका और JPSC 14वीं परीक्षा में OMR-सॉफ्टवेयर की कथित हेराफेरी की CID जांच कर रही है। पढ़ें पूरा मामला।

झारखंड परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा: ब्लैकलिस्टेड ICN को JSSC CGL का काम, JPSC में OMR बदलने का आरोप
ब्लैकलिस्टेड ICN को JSSC CGL का काम कैसे मिला?

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  • JSSC CGL परीक्षा में शामिल ICN एजेंसी की भूमिका की CID कर रही जांच
  • जांच में ICN के पहले से ब्लैकलिस्टेड होने की जानकारी सामने आई
  • ICN के दो कर्मी सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार CID रिमांड पर
  • बिहार में ICN के खिलाफ 2019 में FIR दर्ज होने की बात सामने आई

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं प्रतियोगिता परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID की SIT को पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच का दायरा अब सिर्फ परीक्षा में कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों की भूमिका और उन्हें काम दिए जाने की प्रक्रिया तक पहुंच गया है।

सबसे बड़ा सवाल JSSC CGL परीक्षा से जुड़ी एजेंसी ICN को लेकर उठ रहा है। CID यह पता लगाने में जुटी है कि जिस एजेंसी को पहले ही कई स्तरों पर ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, उसे JSSC CGL परीक्षा के संचालन से जुड़े काम में शामिल कैसे किया गया।

ब्लैकलिस्टेड ICN को JSSC CGL में काम कैसे मिला?

CID की SIT JSSC CGL परीक्षा संचालन में शामिल ICN एजेंसी की भूमिका की जांच कर रही है। जांच एजेंसी को जानकारी मिली है कि ICN पहले से ही केंद्रीय एजेंसियों और कुछ राज्य बोर्डों की कार्रवाई में ब्लैकलिस्ट हो चुकी थी। अब CID इस पूरे मामले में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद ICN को JSSC CGL परीक्षा के संचालन से जुड़े काम में किस प्रक्रिया के तहत शामिल किया गया और इसकी जिम्मेदारी तय करने में किन अधिकारियों या संस्थाओं की भूमिका थी।

दिल्ली से गिरफ्तार ICN के दो कर्मियों सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को CID ने पांच दिनों की रिमांड पर लिया है। पूछताछ के तीसरे दिन भी जांच टीम ने दोनों से ICN की भूमिका, JSSC CGL परीक्षा संचालन में उसकी भागीदारी और एजेंसी को काम मिलने से जुड़े सवाल किए। CID यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा संचालन कराने वाली एजेंसी मेसर्स वेबेल टेक्नोलॉजी और ICN के बीच किस तरह का करार था और दोनों संस्थाओं के बीच काम का स्वरूप क्या था।

बिहार में भी ICN के खिलाफ दर्ज है FIR

जांच में ICN के पुराने रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ICN के खिलाफ बिहार के पटना स्थित शास्त्रीनगर थाने में वर्ष 2019 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामला बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़ा बताया गया है। आरोप था कि अभ्यर्थियों से फॉर्म फीस के रूप में वसूली गई 14,06,39,674 रुपये की राशि बोर्ड के खाते में जमा नहीं की गई। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और 420 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसके बाद संबंधित बोर्ड ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था।

मामले में पटना हाईकोर्ट ने भी वर्ष 2021 में कंपनी के खिलाफ की गई ब्लैकलिस्टिंग के फैसले को बरकरार रखा था। इतना ही नहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय के पुलिस फाइनेंस-V विंग की ओर से 13 फरवरी 2024 को जारी आदेश के तहत भी ICN को मंत्रालय और उसके अधीनस्थ विभागों से एक वर्ष के लिए काली सूची में डालने की कार्रवाई की गई थी। यही वजह है कि अब CID के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि इतने पुराने प्रतिकूल रिकॉर्ड के बावजूद ICN झारखंड में परीक्षा संचालन की प्रक्रिया तक कैसे पहुंची?

JPSC में भी UP की तर्ज पर फर्जीवाड़े की जांच

दूसरी ओर, JPSC की 14वीं प्रतियोगिता परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े की जांच कर रही CID को भी पूछताछ में गंभीर जानकारी मिलने की बात सामने आई है।जांच में परीक्षा संचालन से जुड़े टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के कर्मी हेमंत वर्मा से पूछताछ की गई। पूछताछ में उसने परीक्षा के सॉफ्टवेयर, पोर्टल और OMR से जुड़ी कथित हेराफेरी के संबंध में कई जानकारियां दी हैं। हेमंत वर्मा के अनुसार TDPL के निदेशक रामवीर सिंह के निर्देश पर JPSC के लिए सॉफ्टवेयर और पोर्टल में कथित हेराफेरी की गई। उसने यह भी बताया कि इस पूरे मामले में एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने की बात सामने आई। CID अब उसके बयानों की सत्यता और उनसे जुड़े डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच कर रही है।

यूपी की परीक्षा में जिस तरीके का आरोप, उसी तर्ज पर JPSC में भी हेराफेरी?

पूछताछ में हेमंत वर्मा ने कथित तौर पर बताया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा की RO और ARO परीक्षा में जिस तरह की गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे, उसी तर्ज पर JPSC की परीक्षाओं में भी कथित हेराफेरी की गई। बताया गया कि वर्ष 2020 में TDPL के निर्देश पर पिकर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने यूपी विधानसभा RO और ARO परीक्षा के लिए सॉफ्टवेयर तैयार किया था। इसके एवज में कंपनी को 3.5 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। इसके बाद वर्ष 2025 में TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और सत्यपाल सिंह ने पिकर टेक्नोलॉजी के दूसरे निदेशक उस्मान को JPSC परीक्षाओं के लिए सॉफ्टवेयर और पोर्टल तैयार करने का काम सौंपे जाने की बात सामने आई है। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि पिकर टेक्नोलॉजी का नाम पृष्ठभूमि में रखा गया और उसके कर्मी TDPL के नाम से काम करने लगे।

हर महीने 3 लाख वेतन और कथित फर्जीवाड़े की रकम में कमीशन का लालच

हेमंत वर्मा ने CID को कथित तौर पर बताया कि टीम को रांची आने-जाने, रहने और खाने के खर्च के अलावा तीन लाख रुपये प्रतिमाह वेतन देने का वादा किया गया था। इसके साथ ही कथित फर्जीवाड़े से मिलने वाली रकम का 20 प्रतिशत कमीशन देने का लालच भी दिए जाने की बात पूछताछ में सामने आई है। अब CID इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका, आर्थिक लेनदेन और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है।

सेटिंग वाले अभ्यर्थियों की OMR में सही जवाब भरने का आरोप

जांच में सबसे गंभीर आरोप OMR शीट से जुड़ा सामने आया है। हेमंत वर्मा के कथित बयान के अनुसार 14वीं JPSC की रेगुलर और बैकलॉग परीक्षा के अलावा ड्रग इंस्पेक्टर, APP रेगुलर व बैकलॉग, ACF और FRO जैसी परीक्षाओं के OTR और एडमिट कार्ड जनरेशन का काम TDPL के पास था। आरोप है कि OTR और OSM जनरेशन से संबंधित सॉफ्टवेयर तैयार किए गए थे और बैकएंड डेटाबेस की जिम्मेदारी अलग व्यक्ति संभाल रहा था। पूछताछ में यह आरोप सामने आया कि OMR शीट स्कैनिंग के दौरान हैंडओवर होने के बाद कथित रूप से सेट किए गए अभ्यर्थियों की OMR शीट में सही उत्तर भरे जाते थे। इसके बाद उन OMR शीट को स्कैन कर सिस्टम में अपलोड किए जाने की बात कही गई है, जिससे रिजल्ट प्रोसेस होता था। जांच में यह भी दावा सामने आया कि इस तरीके से 14वीं JPSC PT में 100 से अधिक अभ्यर्थियों को पास कराया गया। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित डिजिटल, दस्तावेजी तथा फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

बारकोड से लेकर बैकएंड सर्वर तक छेड़छाड़ का आरोप

पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार परीक्षा केंद्रों से उत्तर पुस्तिकाएं आने के बाद उन्हें स्कैन करने की प्रक्रिया में भी कथित हेराफेरी की जाती थी। आरोप है कि चिन्हित अभ्यर्थियों की OMR शीट के बारकोड से संबंधित जानकारी हासिल की जाती थी। इसके बाद PDF एडिटर के माध्यम से कथित तौर पर नंबर बढ़ाने और OMR में बदलाव करने की बात सामने आई है। इसके अलावा बैकएंड सर्वर में भी डेटा बदलने का आरोप है। यदि जांच में ये आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह सिर्फ परीक्षा केंद्र स्तर की गड़बड़ी नहीं, बल्कि परीक्षा संचालन, सॉफ्टवेयर, OMR स्कैनिंग और रिजल्ट प्रोसेसिंग की पूरी डिजिटल चेन में कथित सेंध का मामला बन सकता है।

CID के सामने अब कई बड़े सवाल

इस पूरे मामले की जांच में CID के सामने कई अहम सवाल हैं—

ब्लैकलिस्टेड ICN को JSSC CGL से जुड़े काम में कैसे शामिल किया गया?
ICN और वेबेल टेक्नोलॉजी के बीच क्या करार था?
ICN की पुरानी ब्लैकलिस्टिंग की जानकारी संबंधित विभाग को थी या नहीं?
JPSC परीक्षा में सॉफ्टवेयर और पोर्टल की पहुंच किन लोगों के पास थी?
OMR शीट में कथित बदलाव किस स्तर पर और कैसे किए गए?
बैकएंड सर्वर में डेटा बदलने की सुविधा किसके पास थी?
कथित तौर पर सेट किए गए अभ्यर्थियों की पहचान कैसे हुई?
100 से अधिक अभ्यर्थियों को कथित रूप से लाभ पहुंचाने के दावे के पीछे कौन-कौन लोग थे?
इस पूरे नेटवर्क में आर्थिक लेनदेन कितना हुआ?
क्या परीक्षा संचालन से जुड़े अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी इस कथित नेटवर्क का हिस्सा थे?

इन सवालों के जवाब CID की आगे की जांच, गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ और डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच के बाद सामने आ सकते हैं।

परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल

JSSC CGL में ब्लैकलिस्टेड एजेंसी की कथित भूमिका और JPSC परीक्षा में OMR, सॉफ्टवेयर तथा बैकएंड डेटा में कथित हेराफेरी की जांच ने झारखंड की भर्ती परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ CID यह जांच रही है कि ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को परीक्षा संचालन से जुड़ा काम कैसे मिला, वहीं दूसरी तरफ JPSC मामले में कथित तौर पर परीक्षा के डिजिटल सिस्टम से लेकर OMR और रिजल्ट प्रोसेसिंग तक छेड़छाड़ की जांच चल रही है।अब निगाहें CID की SIT की अगली कार्रवाई पर हैं। जांच में यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों के साथ-साथ संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर भी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।