SIR पर अंतरिम रोक लगे, चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष दलों की सुप्रीम कोर्ट में याचिका

SIR पर अंतरिम रोक की मांग को लेकर राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत INDIA गठबंधन के 11 नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। जानिए चुनाव आयोग की फाइलें सार्वजनिक करने, वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर रोक और स्वतंत्र जांच समिति सहित विपक्ष की 10 प्रमुख मांगें।

SIR पर अंतरिम रोक लगे, चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष दलों की सुप्रीम कोर्ट  में याचिका
SIR पर अंतरिम रोक की मांग, चुनाव आयोग की फाइलें हों सार्वजनिक।

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    HighLights:

  • राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के 11 नेताओं ने SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
  • विपक्ष ने मामले के अंतिम निपटारे तक SIR पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की
  • चुनाव आयोग की फाइलें, बैठकों के मिनट्स, आधिकारिक नोटिंग और संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड सार्वजनिक करने का अनुरोध 
  • मतदाता सूची से नाम हटाने से पहले नोटिस और सुनवाई का अवसर देने की मांग

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के नेताओं ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर शीर्ष अदालत में याचिका दायर की। याचिका में SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने, चुनाव आयोग से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने समेत कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं।

याचिका दायर करने वाले 11 विपक्षी नेताओं में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव समेत विभिन्न विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े फैसलों की जांच कराने की भी मांग की है।

विपक्षी दलों ने अपने मार्च को ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के अनुरूप होनी चाहिए। हालांकि, याचिका में उठाए गए आरोपों और मांगों पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को करना है।

सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष का मार्च, SIR पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग

सोमवार को राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई नेता दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च के लिए निकले। इस मार्च में विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं और समर्थकों ने हिस्सा लिया। विपक्षी नेताओं ने SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर अपनी आपत्तियां उठाईं।

प्रदर्शनकारियों को रास्ते में पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण रोका गया। इसके बावजूद विपक्षी दलों ने शीर्ष अदालत में अपनी मांगें रखने की दिशा में कदम बढ़ाया। बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए मतदाताओं के नाम हटाने, नए नाम जोड़ने और सूची में संशोधन करने की प्रक्रिया में स्पष्ट नियमों और पर्याप्त पारदर्शिता का पालन जरूरी है।

CJI से मुलाकात नहीं होने के बाद याचिका का फैसला

विपक्षी नेताओं ने रविवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था। विपक्षी प्रतिनिधिमंडल SIR से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताओं और मांगों को उनके सामने रखना चाहता था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने मामले के न्यायालय के समक्ष विचाराधीन होने के कारण प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार कर दिया और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ने का रास्ता सुझाया। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का निर्णय लिया। याचिका को लेकर विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहते हैं।

SIR पर रोक से लेकर चुनाव आयोग की फाइलें सार्वजनिक करने तक प्रमुख मांगें

विपक्षी नेताओं की याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया, चुनाव आयोग के फैसलों और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं। याचिका में मांगी गई प्रमुख राहतें इस प्रकार हैं।

1. SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि मामले में उठाए गए मुद्दों पर अंतिम फैसला होने तक संबंधित SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने पर विचार किया जाए। विपक्ष का तर्क है कि प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में होने वाले बदलावों का नागरिकों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

2. चुनाव आयोग की पूरी फाइलें सार्वजनिक हों

याचिका में SIR से जुड़े फैसलों की फाइलें, आधिकारिक नोटिंग, बैठकों के मिनट्स, एजेंडा और दर्ज आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई है। इसमें 24 जून 2025 से संबंधित SIR शुरू करने के फैसले से जुड़े दस्तावेज भी शामिल हैं। विपक्ष चाहता है कि यह स्पष्ट हो कि SIR से जुड़े निर्णय किन आधारों पर लिए गए और उन्हें लागू करने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई।

3. SIR से जुड़े फैसलों की संवैधानिक जांच हो

याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के फैसलों की संवैधानिक और कानूनी वैधता की जांच कराने का अनुरोध किया है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से संबंधित 2023 के कानून तथा टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया है। विपक्ष की मांग है कि यदि किसी फैसले में कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके अनुरूप उचित आदेश दिया जाए।

4. बिना नोटिस किसी मतदाता का नाम नहीं हटे

याचिका में मांग की गई है कि किसी भी मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसे विधिवत नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन होना चाहिए, ताकि किसी योग्य नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो।

5. हटाए गए मतदाताओं की सूची बूथवार जारी हो

याचिकाकर्ताओं ने SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों का विवरण बूथवार सार्वजनिक करने की मांग की है। इसमें नाम हटाने का कारण और उपलब्ध संबंधित जानकारी शामिल करने का अनुरोध किया गया है। विपक्ष के मुताबिक, इस तरह की जानकारी से प्रभावित मतदाताओं को अपनी स्थिति समझने और आवश्यक सुधार के लिए आवेदन करने में मदद मिल सकती है।

6. ECINET और ERONET के डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जाएं

याचिका में ECINET और ERONET जैसे चुनाव संबंधी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मतदाता सूची में किए गए बदलावों से जुड़े रिकॉर्ड और एक्सेस लॉग उपलब्ध कराने की मांग की गई है। विपक्ष का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से यह समझने में मदद मिलेगी कि मतदाता सूची में संशोधन कब, कैसे और किस प्रक्रिया के तहत किए गए। हालांकि, इन रिकॉर्ड की उपलब्धता और सार्वजनिक किए जाने की सीमा पर अदालत का निर्णय महत्वपूर्ण होगा।

7. सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बने

विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की गई है। प्रस्तावित समिति को मतदाता सूची में नाम हटाने और संशोधन की प्रक्रिया का ऑडिट करने, डिजिटल डेटाबेस की जांच करने तथा सामने आई अनियमितताओं का आकलन करने की जिम्मेदारी देने की मांग की गई है। याचिका में चुनावी व्यवस्था से जुड़े तकनीकी पहलुओं, जिनमें EVM के डिजाइन, आर्किटेक्चर और प्रोटोकॉल की समीक्षा भी शामिल है, पर व्यापक विचार करने का अनुरोध किया गया है।

8. SIR के प्रत्येक फैसले का रिकॉर्ड रखा जाए

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि चुनाव आयोग SIR से जुड़े फैसलों के कारणों और कार्यवाही का विधिवत रिकॉर्ड रखे। उनका कहना है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण होने से जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। याचिका में संबंधित कानून के प्रावधानों के अनुसार निर्णयों का रिकॉर्ड रखने और शिकायतों पर उचित कार्रवाई करने के निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।

9. ऑनलाइन फॉर्म-6 में नियमों के अनुरूप बदलाव हो

विपक्ष ने ऑनलाइन फॉर्म-6 को मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के निर्धारित प्रारूप के अनुरूप बनाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि फॉर्म में ऐसे बदलाव नहीं होने चाहिए, जिनके लिए नियमों में आवश्यक कानूनी संशोधन जरूरी हो।फॉर्म-6 नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए विपक्ष चाहता है कि आवेदन प्रक्रिया स्पष्ट और निर्धारित नियमों के अनुरूप हो।

10. योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए प्रभावी व्यवस्था हो

याचिका में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों में पारदर्शिता के साथ-साथ योग्य नागरिकों के नाम दोबारा जोड़ने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की मांग भी की गई है। विपक्ष ने अनुरोध किया है कि प्रभावित मतदाताओं को आवेदन करने और अपनी पात्रता साबित करने का पर्याप्त अवसर मिले। चुनावी राज्यों में लागू समय-सीमा और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आवेदन प्रक्रिया को सुगम बनाने की मांग भी उठाई गई है।

राहुल गांधी समेत 11 नेता याचिकाकर्ता

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में INDIA गठबंधन के विभिन्न घटक दलों के 11 नेताओं के नाम शामिल हैं।

राहुल गांधी — लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष।

मल्लिकार्जुन खरगे — कांग्रेस अध्यक्ष।

सौगत रॉय — तृणमूल कांग्रेस।

अखिलेश यादव — समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष।

तेजस्वी प्रसाद यादव — राष्ट्रीय जनता दल।

सुप्रिया सुले — राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार)।

संजय राउत — शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)।

डी. राजा — भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI)।

महुआ माझी — झारखंड मुक्ति मोर्चा।

एम. ए. बेबी — भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)।

ई. टी. मोहम्मद बशीर — इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने याचिका दायर किए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि विपक्षी गठबंधन ने चुनाव आयोग के खिलाफ न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। याचिका में भारतीय निर्वाचन आयोग के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को भी पक्षकार बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।

क्या है SIR और क्यों उठा विवाद?

SIR यानी Special Intensive Revision का हिंदी अर्थ विशेष गहन पुनरीक्षण है। यह मतदाता सूची की व्यापक जांच और संशोधन की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और पात्र मतदाताओं से संबंधित विवरणों की पुष्टि करना है। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम, पते और पात्रता से जुड़े विवरणों की जांच की जा सकती है।

मतदाता सूची में नाम जोड़ने, सुधार करने या नाम हटाने से संबंधित कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत की जाती है। विवाद इस बात को लेकर है कि प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को पर्याप्त सूचना और अवसर मिल रहा है या नहीं, नाम हटाने के फैसलों के कारण स्पष्ट हैं या नहीं और संबंधित रिकॉर्ड की स्वतंत्र रूप से जांच संभव है या नहीं। विपक्ष ने इन्हीं मुद्दों को उठाते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। दूसरी ओर, याचिका में लगाए गए आरोपों की सत्यता और चुनाव आयोग की प्रक्रिया की वैधता का निर्धारण न्यायिक जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही होगा।

चुनाव आयोग की भूमिका और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर

चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाता सूची तैयार करने और चुनावी प्रक्रिया को लागू करने की है। ऐसे में SIR से जुड़े विवाद का असर मतदाता पंजीकरण, चुनावी पारदर्शिता और राजनीतिक दलों के बीच विश्वास पर पड़ सकता है। विपक्ष की याचिका में उठाए गए मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।

अदालत यह तय कर सकती है कि मामले में अंतरिम राहत देने का आधार बनता है या नहीं, चुनाव आयोग से कौन-से दस्तावेज मांगे जाने चाहिए और मतदाता सूची से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए किस तरह के निर्देश आवश्यक हैं। फिलहाल, याचिका दायर होने का अर्थ यह नहीं है कि विपक्ष की सभी मांगें स्वीकार कर ली गई हैं या SIR पर रोक लगा दी गई है। इन मांगों पर आगे की न्यायिक कार्यवाही और अदालत के आदेश निर्णायक होंगे।

लोकतंत्र और मताधिकार से जुड़ा अहम मामला

SIR को लेकर विपक्ष का विरोध अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसलों की पारदर्शिता, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए हैं। विपक्ष चाहता है कि SIR से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक हों, नाम हटाने की प्रक्रिया की समीक्षा हो और स्वतंत्र जांच की व्यवस्था बनाई जाए। वहीं, इस मामले में अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आदेशों से स्पष्ट होगी। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि शीर्ष अदालत विपक्ष की अंतरिम रोक की मांग पर क्या रुख अपनाती है और चुनाव आयोग से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड तथा मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर क्या निर्देश जारी करती है।

नोट: यह रिपोर्ट याचिका में उठाई गई मांगों और उपलब्ध विवरणों पर आधारित है। मांगों को अदालत द्वारा स्वीकार किया गया आदेश नहीं माना जाना चाहिए।