NEET प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, ज्यादातर FIR रद्द; गंभीर अपराधियों पर कार्रवाई जारी, 5 सितंबर का मार्च वापस

NEET प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत। 20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़ी ज्यादातर FIR रद्द, गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर कार्रवाई जारी। CJP ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया।

NEET प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, ज्यादातर FIR रद्द; गंभीर अपराधियों पर कार्रवाई जारी, 5 सितंबर का मार्च वापस
सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रदर्शन से जुड़ी ज्यादातर FIR रद्द करने का निर्देश दिया।

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    Highlights:

  • गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले आरोपियों को राहत से बाहर रखा गया
  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों का मामला चर्चा में रहा
  • केंद्र ने 20 से 25 जुलाई की घटनाओं को लेकर नई FIR दर्ज नहीं करने का भरोसा दिया
  • CJP ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 5 सितंबर का प्रस्तावित दिल्ली मार्च वापस लिया

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): NEET प्रदर्शन मामले में प्रदर्शनकारी छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने 20 जुलाई को हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़े छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने का निर्देश दिया है। हालांकि, गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले आरोपियों को इस राहत से बाहर रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि केंद्र के साथ बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सरकारों ने भी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने के लिए संबंधित आवेदन दाखिल किए हैं।

छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़ी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द माना जाए। यह राहत उन प्रदर्शनकारियों को मिलेगी जिनका कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों में से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कुछ लोगों के खिलाफ दर्ज FIR पर आगे बढ़ने की अनुमति दी है। इस तरह कोर्ट के आदेश में प्रदर्शन में शामिल छात्रों को व्यापक राहत दी गई है, लेकिन गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के लिए कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला रखा गया है।

केंद्र ने कोर्ट में दिया भरोसा

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से कहा कि 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं को लेकर भविष्य में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। केंद्र का यह रुख 25 जुलाई को CJP नेताओं को दिए गए आश्वासन के अनुरूप बताया गया। सरकार ने कहा कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

CJI सूर्यकांत ने कही अहम बात

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत और आपसी विश्वास की जरूरत पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों पक्ष भरोसे के साथ बातचीत करें तो विवाद का समाधान निकाला जा सकता है। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सकारात्मक रुख का संकेत देते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने इस मुद्दे को सकारात्मक तरीके से देखा है और वे एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CJP ने वापस लिया 5 सितंबर का मार्च

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है। CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक मान्यता को देखते हुए संगठन ने 5 सितंबर के मार्च का आह्वान वापस लेना उचित समझा है। CJP ने कोर्ट और दोनों पक्षों के वकीलों का आभार जताते हुए उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समय पर पालन किया जाएगा।

CJP ने उठाया 'गंभीर अपराधियों' को लेकर सवाल

फैसले के बाद CJP की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि जिन लोगों को पुलिस ने गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बताया है, वे आखिर खुले समाज में घूम कैसे रहे थे। CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने दिल्ली पुलिस की फेशियल रिकग्निशन तकनीक के आधार पर प्रदर्शन स्थल पर करीब 2,800 कथित गंभीर अपराधियों की मौजूदगी के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि ये लोग वास्तव में गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले थे तो यह भी सवाल है कि वे समाज में खुलेआम कैसे घूम रहे थे।

NEET विवाद में मुआवजे पर भी बड़ा अपडेट

सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर भी निर्देश दिया है। केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि वह पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के अपने आश्वासन पर कायम है। हालांकि, मुआवजे की प्रक्रिया और तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र ने तीन महीने का समय मांगा। कोर्ट ने केंद्र को तीन महीने के भीतर मुआवजे की पूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। इससे उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है जो NEET विवाद के दौरान अपने बच्चों को खो चुके हैं।

जेपी नड्डा ने फैसले का किया स्वागत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने के अपने आश्वासन को पूरा कर रही है। नड्डा ने कहा कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया था। उन्होंने कहा कि इस आश्वासन को लागू करने के लिए केंद्र ने बीजेपी शासित राज्यों की सरकारों से भी बातचीत की थी और अब उस दिशा में कार्रवाई की जा रही है।

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद NEET प्रदर्शन मामले में छात्रों के खिलाफ दर्ज ज्यादातर FIR खत्म होने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है। दूसरी ओर, CJP द्वारा 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस लिए जाने से इस मुद्दे पर होने वाले संभावित बड़े प्रदर्शन को भी फिलहाल टाल दिया गया है।

मुआवजे के मामले में भी अब केंद्र को तीन महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऐसे में आने वाले महीनों में छात्रों के खिलाफ FIR, गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले आरोपियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मुआवजे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।