कोयला ढुलाई से बेहाल टंडवा-सिमरिया,चतरा सांसद कालीचरण सिंह ने मांगा समर्पित कोल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर

चतरा सांसद कालीचरण सिंह ने संसद के मानसून सत्र में टंडवा, सिमरिया, चतरा और गिद्धौर क्षेत्रों में अनियंत्रित कोयला परिवहन से जाम, सड़क दुर्घटनाओं, धूल और प्रदूषण की समस्या उठाते हुए समर्पित कोल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बनाने की मांग की।

कोयला ढुलाई से बेहाल टंडवा-सिमरिया,चतरा सांसद कालीचरण सिंह ने मांगा समर्पित कोल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर
कालीचरण सिंह ने संसद में उठाया बड़ा मुद्दा।

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   HighLights:

  • संसद के मानसून सत्र में सांसद कालीचरण सिंह ने नियम 377 के तहत उठाया मुद्दा
  • टंडवा, सिमरिया, चतरा और गिद्धौर में भारी कोयला परिवहन से जनजीवन प्रभावित
  • जाम, सड़क दुर्घटनाएं, धूल और प्रदूषण को बताया गंभीर समस्या
  • मरीजों, विद्यार्थियों और आम लोगों को रोजाना हो रही परेशानी

नई दिल्ली/चतरा (Threesocieties.com Desk): देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाले झारखंड के कोयला क्षेत्र अब स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। चतरा लोकसभा क्षेत्र के सांसद कालीचरण सिंह ने संसद के मानसून सत्र में नियम 377 के तहत टंडवा, सिमरिया, चतरा, गिद्धौर एवं आसपास के कोयला उत्पादक क्षेत्रों में अनियंत्रित कोयला परिवहन से उत्पन्न गंभीर समस्याओं को जोरदार ढंग से सदन के सामने रखा।

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सांसद ने कहा कि एक ओर ये क्षेत्र देश की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यहां रहने वाले लोग भारी कोयला वाहनों के कारण रोजाना जाम, सड़क दुर्घटनाओं, धूल, प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियों का सामना करने को मजबूर हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इन क्षेत्रों के लिए समर्पित कोल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर विकसित करने की मांग की, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और कोयला परिवहन भी सुगम हो।

हर दिन हजारों भारी वाहन, आम लोगों की बढ़ी मुश्किलें

सांसद कालीचरण सिंह ने बताया कि टंडवा, सिमरिया, चतरा और गिद्धौर सहित आसपास के कोयला क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहन कोयला लेकर विभिन्न राज्यों की ओर रवाना होते हैं। इन वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण मुख्य सड़कें दिन-रात व्यस्त रहती हैं। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर घंटों जाम लगा रहता है, जिससे स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, मरीजों, सरकारी एवं निजी कर्मचारियों, किसानों और छोटे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार एंबुलेंस तक जाम में फंस जाती हैं, जिससे गंभीर मरीजों की जान पर भी खतरा उत्पन्न हो जाता है।

धूल और प्रदूषण से बिगड़ रहा स्वास्थ्य

सांसद ने संसद में कहा कि भारी वाहनों से उड़ने वाली कोयले की धूल पूरे इलाके में प्रदूषण फैला रही है। सड़क किनारे बसे गांवों के लोगों को सांस संबंधी बीमारियों, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। लगातार बढ़ता प्रदूषण ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर डाल रहा है।

सड़क दुर्घटनाओं का बढ़ा खतरा

सांसद ने कहा कि भारी ट्रकों की अनियंत्रित आवाजाही से सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। कई ग्रामीण सड़कों पर ट्रकों का दबाव इतना अधिक है कि आम लोगों का सुरक्षित आवागमन मुश्किल हो गया है। उन्होंने सरकार से सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने और भारी वाहनों के लिए अलग परिवहन व्यवस्था विकसित करने का आग्रह किया।

समर्पित कोल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर ही स्थायी समाधान

कालीचरण सिंह ने कहा कि यदि कोयला परिवहन के लिए अलग कोल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बनाया जाता है तो इससे दोहरा लाभ होगा। एक ओर कोयले की ढुलाई तेज और व्यवस्थित होगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों को जाम, प्रदूषण और दुर्घटनाओं से राहत मिलेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी देने और जल्द कार्य शुरू कराने की मांग की।

ऊर्जा उत्पादन और जनहित में संतुलन जरूरी

सांसद ने सदन में कहा कि झारखंड देश की ऊर्जा व्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विकास तभी सार्थक होगा जब उद्योग और जनहित के बीच संतुलन बनाया जाए।उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी और प्रभावित क्षेत्रों को जल्द राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।