Highlights:
- PM नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देखा वायुसेना का प्रदर्शन
- आधुनिक लड़ाकू विमानों राफेल-सुखोई ने अपनी गति, शक्ति और सटीक फॉर्मेशन फ्लाइंग का प्रदर्शन किया
- तेजस के रोमांचक एरोबैटिक करतबों ने भारत की रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया
- नौ हॉक विमानों की एरोबैटिक टीम ने आसमान में आकर्षक आकृतियां बनाईं
वाराणसी (Threesocieties.com Desk): मां गंगा की अविरल धारा, काशी के ऐतिहासिक घाट और आसमान में गूंजते लड़ाकू विमानों की गर्जना। रविवार को आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में भारतीय वायुसेना के शौर्य, साहस और आधुनिक तकनीकी क्षमता का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, स्वदेशी तेजस समेत कई सैन्य विमानों और हेलीकॉप्टरों ने अपने हवाई कौशल से दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

और भी पढ़ें
- धनबाद: BCCL की नई वेबसाइट लॉन्च, अब मिलेगा बेहतर और सुरक्षित डिजिटल अनुभव
- धनबाद : खटाल हटाने के खिलाफ आंदोलन की तैयारी, 4 नवंबर को पहुंचेंगे MP पप्पू यादव
- Jharkhand : जमीन पर बैठीं सिमडेगा DC कंचन सिंह, सुनीं मलार समाज की समस्याएं
- कार्तिक मास 27 अक्टूबर से शुरू, दीपावली-छठ समेत इन पर्वों की देखें पूरी लिस्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस भव्य एयर शो को देखा। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में देश की सैन्य शक्ति, स्वदेशी रक्षा तकनीक, तीनों सेनाओं के समन्वय और राष्ट्रसेवा के संकल्प की झलक दिखाई दी।
गंगा के दोनों तटों पर मौजूद लोगों की निगाहें आसमान पर टिकी रहीं। कहीं लड़ाकू विमानों की तेज रफ्तार ने रोमांच पैदा किया, तो कहीं हेलीकॉप्टरों की सटीक उड़ान और सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम की कलात्मक आकृतियों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। काशी की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़े फॉर्मेशन के नामों ने इस आयोजन को एक विशेष रंग दिया।
गंगा के ऊपर ‘विंग्स ओवर गंगा’, शक्ति और संस्कृति का अनूठा संगम
वाराणसी में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो केवल सैन्य विमानों की उड़ान का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारतीय वायुसेना की परंपरा, आधुनिक युद्धक क्षमता और सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत करने वाला आयोजन भी रहा। काशी की धार्मिक पहचान और गंगा की महत्ता को ध्यान में रखते हुए कई हवाई फॉर्मेशन के नाम भारतीय परंपराओं, पौराणिक मान्यताओं और स्थानीय विरासत से प्रेरित रखे गए। ‘ओंकार’, ‘गंगा’, ‘रुद्र’, ‘भागीरथी’, ‘त्रिदेव’, ‘महादेव’, ‘विश्वनाथ’ और ‘नीलकंठ’ जैसे नामों ने कार्यक्रम को काशी की आध्यात्मिक पहचान से जोड़ा। विमानों और हेलीकॉप्टरों की समन्वित उड़ान के दौरान वायुसेना के पायलटों ने अनुशासन, सटीकता और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन किया। हर फॉर्मेशन के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया और रोमांचक करतबों के बाद तालियों की गूंज सुनाई देती रही।
सारंग हेलीकॉप्टर टीम ने किया शानदार आगाज
एयर शो की शुरुआत भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के प्रदर्शन से हुई। हेलीकॉप्टरों ने आपसी तालमेल, नियंत्रित गति और सटीक दिशा परिवर्तन के जरिए अपनी उड़ान क्षमता दिखाई। हेलीकॉप्टरों के बीच बेहद करीबी समन्वय और अनुशासित उड़ान ने दर्शकों का ध्यान खींचा। इस प्रदर्शन ने सैन्य विमानन में प्रशिक्षण, एकाग्रता और टीमवर्क की अहमियत को रेखांकित किया। इसके बाद भारतीय वायुसेना की 94 वर्षों की गौरवशाली यात्रा और राष्ट्रसेवा के संकल्प को याद किया गया। कार्यक्रम में आधुनिक सैन्य क्षमता के साथ वायुसेना की परंपरा और देश की सुरक्षा में उसके योगदान को भी प्रमुखता मिली।
‘ओंकार’ और ‘गंगा’ फॉर्मेशन ने मोहा मन
एयर शो के दौरान तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों की ‘ओंकार’ फॉर्मेशन ने राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय वायुसेना के ध्वज के साथ उड़ान भरी। इस फॉर्मेशन ने राष्ट्रीय गौरव और आध्यात्मिक आस्था का संगम प्रस्तुत किया। इसके बाद तीन चेतक हेलीकॉप्टरों की ‘गंगा’ फॉर्मेशन ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। मां गंगा के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए हेलीकॉप्टरों से पुष्पवर्षा की गई। गंगा की धारा के ऊपर से बरसते फूलों का दृश्य आयोजन के भावनात्मक और आकर्षक क्षणों में शामिल रहा। काशी के घाटों और गंगा की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत इस प्रदर्शन ने एयर शो को स्थानीय सांस्कृतिक पहचान से जोड़ दिया।
सुखोई, राफेल और अन्य लड़ाकू विमानों ने दिखाई ताकत
एयर शो के दौरान भारतीय वायुसेना के विभिन्न लड़ाकू विमानों ने अपनी परिचालन क्षमता और फॉर्मेशन फ्लाइंग का प्रदर्शन किया। सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, मिराज-2000, जगुआर और मिग-29 जैसे विमानों की मौजूदगी ने भारतीय वायुसेना की बहुआयामी क्षमता को सामने रखा। ‘रुद्र’ फॉर्मेशन में सुखोई-30 एमकेआई ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद अलग-अलग फॉर्मेशन के माध्यम से हवाई निगरानी, टोही क्षमता और आधुनिक युद्ध अभियानों में सूचना के महत्व को प्रदर्शित किया गया।
‘विश्वनाथ’ फॉर्मेशन में तीन सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान शामिल रहे, जबकि ‘पशुपति’ फॉर्मेशन में चार जगुआर विमानों ने उड़ान भरी। ‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन में तीन राफेल विमानों ने आधुनिक लड़ाकू विमानन की क्षमता का प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रकार के लड़ाकू विमानों का संयुक्त प्रदर्शन यह दिखाने का माध्यम बना कि आधुनिक हवाई अभियानों में केवल विमान की गति और शक्ति ही महत्वपूर्ण नहीं है। पायलटों का प्रशिक्षण, सटीक तालमेल, सामरिक जानकारी और समय पर निर्णय लेना भी उतना ही अहम है।
तीनों सेनाओं के समन्वय की झलक
एयर शो में संयुक्त सैन्य क्षमता और अलग-अलग सेवाओं के बीच तालमेल को भी प्रदर्शित किया गया। ‘त्रिदेव’ फॉर्मेशन में भारतीय नौसेना के कामोव-31 हेलीकॉप्टर और थलसेना तथा वायुसेना के एएलएच हेलीकॉप्टरों के प्रदर्शन के माध्यम से संयुक्त अभियान क्षमता की झलक दिखाई गई। ‘भागीरथी’ फॉर्मेशन में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर और अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों के समन्वय को प्रस्तुत किया गया। इस तरह के प्रदर्शन ने आधुनिक युद्धक्षेत्र में हेलीकॉप्टरों की उपयोगिता और विभिन्न सैन्य प्लेटफॉर्म के बीच समन्वय का महत्व रेखांकित किया। कार्यक्रम में परिवहन विमानों, निगरानी प्रणालियों और हवा में ईंधन भरने की क्षमता से जुड़े विमानों की भी भूमिका दिखाई गई। इन क्षमताओं के जरिए लंबी दूरी के अभियानों, सैनिकों और आवश्यक सामग्री के परिवहन तथा हवाई मिशनों को समर्थन देने की भूमिका को समझाया गया।
स्वदेशी तेजस ने दिखाया आत्मनिर्भर भारत का सामर्थ्य
एयर शो के प्रमुख आकर्षणों में स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस का एकल प्रदर्शन शामिल रहा। भारतीय रक्षा विमानन तकनीक के महत्वपूर्ण उदाहरण तेजस ने अपनी फुर्ती, गति और नियंत्रित उड़ान कौशल से दर्शकों को रोमांचित किया। तेजस ने कई तरह के एरोबैटिक करतब प्रस्तुत किए। विमान के तीव्र मोड़, नियंत्रित रोल और अलग-अलग उड़ान मुद्राओं ने पायलट के प्रशिक्षण तथा विमान की उड़ान क्षमताओं को प्रदर्शित किया।
तेजस का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि यह भारत में विकसित रक्षा तकनीक और स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में विमान का विकास और उसका परिचालन भारतीय विमानन उद्योग की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है। तेजस के करतबों के दौरान दर्शकों की निगाहें लगातार आसमान पर बनी रहीं। प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि देश की रक्षा क्षमता में आधुनिक विमानों के साथ-साथ स्वदेशी अनुसंधान, इंजीनियरिंग और तकनीकी विकास भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने आसमान में उकेरीं कलात्मक आकृतियां
एयर शो के अंतिम चरण में सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का प्रदर्शन प्रमुख आकर्षण बना। नौ हॉक विमानों वाली टीम ने समन्वित उड़ान, नियंत्रित दिशा परिवर्तन और आकर्षक आकृतियों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। टीम ने आसमान में अलग-अलग फॉर्मेशन बनाते हुए अपनी सटीकता और अनुशासन का प्रदर्शन किया। विमानों का एक साथ उड़ना, निर्धारित दूरी बनाए रखना और बेहद कम अंतर पर तालमेल के साथ करतब दिखाना पायलटों के उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का परिचायक रहा।
सूर्यकिरण टीम के प्रदर्शन में फॉर्मेशन परिवर्तन, फ्लावर और बैरल रोल जैसे करतब शामिल रहे। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों के उत्साह को चरम पर पहुंचा दिया। एरोबैटिक प्रदर्शन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होता। इसके लिए पायलटों के बीच भरोसा, असाधारण एकाग्रता, सटीक नियंत्रण और निरंतर अभ्यास जरूरी होता है। सूर्यकिरण टीम ने अपने प्रदर्शन से भारतीय वायुसेना की पेशेवर दक्षता की झलक दिखाई।
आधुनिक हथियार प्रणालियों और परिचालन क्षमता पर रहा जोर
कार्यक्रम में आधुनिक लड़ाकू विमानों की भूमिका और विभिन्न प्रकार की हथियार प्रणालियों का भी उल्लेख किया गया। लंबी दूरी तक सटीक प्रहार, हवाई श्रेष्ठता, जमीनी लक्ष्यों पर कार्रवाई और निगरानी क्षमता आधुनिक वायु अभियानों के महत्वपूर्ण पहलू हैं। सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000 और अन्य विमानों की विभिन्न भूमिकाओं के जरिए भारतीय वायुसेना की बहुआयामी परिचालन क्षमता को रेखांकित किया गया।
आधुनिक हवाई युद्ध में रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, निगरानी प्रणाली और सामरिक सूचनाओं की अहम भूमिका होती है। लक्ष्य की पहचान, संभावित खतरे का आकलन और उचित समय पर कार्रवाई के लिए इन प्रणालियों का प्रभावी उपयोग आवश्यक है। एयर शो में प्रस्तुत काल्पनिक हवाई युद्ध के दृश्य ने भी दर्शकों को आधुनिक हवाई अभियानों की जटिलता से परिचित कराया। इसमें विमानों के बीच सामरिक समन्वय, लक्ष्य का पीछा करने और उसे रोकने जैसी परिस्थितियों को प्रदर्शित किया गया।
काशी की विरासत से जुड़े नामों ने बढ़ाई आयोजन की खासियत
‘विंग्स ओवर गंगा’ की एक विशेषता यह रही कि फॉर्मेशन के नाम काशी, गंगा और भारतीय धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से प्रेरित थे। ‘विश्वनाथ’, ‘महादेव’, ‘नीलकंठ’, ‘पशुपति’, ‘भागीरथी’ और ‘गंगा’ जैसे नामों ने आधुनिक सैन्य विमानन को स्थानीय सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा। इन नामों के जरिए आयोजन में भारत की आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति समर्पण को एक साथ प्रस्तुत किया गया। काशी जैसे ऐतिहासिक शहर में इस तरह का आयोजन सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के साथ सांस्कृतिक प्रतीकों को भी विशेष महत्व देता है। गंगा के ऊपर विमानों की गर्जना, हेलीकॉप्टरों की समन्वित उड़ान और सूर्यकिरण टीम के आकर्षक करतबों ने इस आयोजन को यादगार बनाया।
भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ पर विशेष आयोजन
भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एयर शो में वायुसेना की गौरवशाली यात्रा, प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकी क्षमता और राष्ट्रसेवा के संकल्प को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। लड़ाकू विमानों से लेकर परिवहन विमान, निगरानी प्लेटफॉर्म और हेलीकॉप्टरों तक, विभिन्न प्रकार के विमानों की मौजूदगी ने वायुसेना की व्यापक भूमिका की झलक दिखाई। इस आयोजन ने यह भी रेखांकित किया कि देश की हवाई सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक, दक्ष पायलट, प्रशिक्षित कर्मी और विभिन्न सैन्य सेवाओं के बीच समन्वय बेहद जरूरी है। वाराणसी में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो ने भारतीय वायुसेना के शौर्य और सामर्थ्य को प्रदर्शित करने के साथ काशी की सांस्कृतिक पहचान को भी विशेष स्थान दिया। गंगा के ऊपर गूंजते लड़ाकू विमानों की गर्जना और आसमान में बनती आकर्षक आकृतियां इस भव्य आयोजन की सबसे यादगार झलकियों में शामिल रहीं।
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, भारतीय सेनाओं के अधिकारी और अन्य विशिष्ट अतिथि भी मौजूद रहे।