BCCL में बंद भूमिगत खदानें फिर होंगी गुलजार? INMOSSA ने दिया बड़ा प्रस्ताव
BCCL में भूमिगत कोयला खनन को बढ़ावा देने के लिए INMOSSA ने बंद खदानों के पुनः संचालन और Continuous Miner, Longwall जैसी आधुनिक तकनीक अपनाने का प्रस्ताव दिया।
HighLights:
- INMOSSA ने BCCL में भूमिगत खदानों के विकास का प्रस्ताव दिया
- बंद और बंद पड़ी खदानों का सर्वे कराने की मांग
- Continuous Miner और Longwall जैसी आधुनिक तकनीकों पर जोर
- गहरे कोयला भंडार के बेहतर इस्तेमाल की योजना
धनबाद (Threesocieties.com Desk): भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में भूमिगत कोयला खनन को नई गति देने की पहल शुरू हुई है। भूमिगत खदानों के विकास और बंद पड़ी खदानों के पुनः संचालन को लेकर INMOSSA ने BCCL प्रबंधन के समक्ष महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। संगठन ने बंद, बंद पड़ी और संभावित भूमिगत खदानों का तकनीकी एवं आर्थिक अध्ययन कर उन्हें आधुनिक तकनीक के साथ दोबारा विकसित करने की मांग की है।
INMOSSA के उप महासचिव कुश कुमार सिंह ने 4 नवंबर 2026 को कार्मिक नगर स्थित अपने आवासीय कार्यालय में इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर BCCL प्रबंधन को सौंपा। प्रस्ताव में भूमिगत खनन की संभावनाओं का तकनीकी, भू-वैज्ञानिक, सुरक्षा और तकनीकी-आर्थिक दृष्टिकोण से विस्तृत अध्ययन कराने की मांग की गई है।
गहरे कोयला भंडार के इस्तेमाल पर जोर
INMOSSA का कहना है कि BCCL देश की महत्वपूर्ण कोकिंग कोल उत्पादक कंपनियों में शामिल है। ऐसे में गहराई में मौजूद कोयला भंडार का बेहतर उपयोग करने के लिए भूमिगत खनन को मजबूत करना जरूरी है।संगठन के अनुसार भूमिगत खदानों के विकास से गुणवत्तापूर्ण कोकिंग कोल के उत्पादन में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण और विस्थापन से जुड़ी समस्याओं को भी कम किया जा सकता है।
Continuous Miner और Longwall तकनीक अपनाने का सुझाव
प्रस्ताव में भूमिगत खनन को आधुनिक और अधिक उत्पादक बनाने के लिए Continuous Miner और Longwall जैसी मशीनीकृत तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया है। INMOSSA ने सुझाव दिया है कि जहां तकनीकी और आर्थिक रूप से ये तकनीकें व्यवहार्य हों, वहां इनका इस्तेमाल किया जाए। इससे भूमिगत खनन की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
बंद खदानों का सर्वे कर तैयार हो रोडमैप
संगठन ने BCCL प्रबंधन से बंद और बंद पड़ी भूमिगत खदानों के साथ-साथ उन खदानों का भी सर्वे कराने की मांग की है, जहां भविष्य में भूमिगत खनन की संभावना मौजूद है। सर्वेक्षण के बाद प्रत्येक खदान की भू-वैज्ञानिक स्थिति, कोयला भंडार, सुरक्षा, तकनीकी व्यवहार्यता और आर्थिक संभावनाओं का आकलन कर पुनः संचालन का रोडमैप तैयार करने का सुझाव दिया गया है।
रोजगार के भी बढ़ेंगे अवसर
INMOSSA के मुताबिक भूमिगत खनन के विस्तार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही कुशल मानव संसाधन तैयार करने में भी मदद मिलेगी। संगठन ने कहा कि सुपरवाइजरी स्टाफ को भूमिगत खनन का व्यावहारिक अनुभव मिलने से कंपनी में तकनीकी दक्षता भी मजबूत होगी। आधुनिक भूमिगत खनन तकनीकों के विस्तार से भविष्य के लिए प्रशिक्षित और कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है।
ओपनकास्ट और अंडरग्राउंड माइनिंग में संतुलन जरूरी
INMOSSA ने कहा कि BCCL को केवल ओपनकास्ट खनन पर निर्भर रहने के बजाय ओपनकास्ट और भूमिगत खनन के बीच संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए। संगठन का मानना है कि ऐसा करने से कोयला संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल, गुणवत्तापूर्ण कोकिंग कोल उत्पादन, रोजगार सृजन और दीर्घकालिक सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा। प्रस्ताव में BCCL प्रबंधन से भूमिगत खनन की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर व्यवहार्य खदानों के पुनर्विकास और पुनः संचालन की दिशा में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया गया है।
बैठक में ये लोग रहे मौजूद
इस दौरान कुश कुमार सिंह, वाई.के. सिंह, शिव शंकर महतो, विजय यादव, अरुण कुमार दूबे, राकेश प्रसाद सिन्हा, रवि भूषण प्रसाद, रवि ओंकार, अमित नारायण, अमित झा, पोखन साव, श्रीश कुमार, उमाकांत राय, मिहिर रजवार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
Threesocieties News Desk 



