Highlights:

  • धनबाद के हीरापुर स्थित ऐतिहासिक हरि मंदिर में विजयादशमी पर पारंपरिक सिंदूर खेला का आयोजन
  • बंगाली रीति-रिवाज के अनुसार महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया
  • महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की
  • मां दुर्गा की विदाई के समय भावुक हुए श्रद्धालु, अगले वर्ष फिर आगमन की कामना की

धनबाद (Threesocieties.com Desk): विजयादशमी के अवसर पर धनबाद के हीरापुर स्थित ऐतिहासिक हरि मंदिर में पारंपरिक सिंदूर खेला का आयोजन किया गया। बंगाली रीति-रिवाज के अनुसार आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में महिलाओं ने उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया। मां दुर्गा की विदाई से पहले महिलाओं ने उनके चरणों में सिंदूर अर्पित किया और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख, शांति, समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य की कामना की।

दुर्गोत्सव के समापन पर हरि मंदिर परिसर में भक्ति और उल्लास का माहौल देखने को मिला। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने सिंदूर खेला की रस्म निभाई। इस दौरान एक ओर महिलाओं के चेहरे पर उत्सव की खुशी दिखाई दी, तो दूसरी ओर मां दुर्गा की विदाई के समय भावुकता भी नजर आई। श्रद्धालुओं ने मां से अगले वर्ष फिर आने और अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।

बंगाली परंपरा के अनुसार हुआ सिंदूर खेला

हीरापुर का ऐतिहासिक हरि मंदिर अपनी पारंपरिक दुर्गापूजा के लिए जाना जाता है। विजयादशमी पर यहां सिंदूर खेला के आयोजन में बंगाली संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिली। महिलाओं ने विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की और उन्हें सिंदूर अर्पित किया। इसके बाद महिलाओं ने एक-दूसरे के माथे और चेहरे पर सिंदूर लगाकर मंगलकामनाएं दीं। इस पारंपरिक रस्म के दौरान महिलाओं का उत्साह देखते ही बना। मंदिर परिसर में श्रद्धा, उल्लास और आपसी सौहार्द का वातावरण बना रहा। बंगाली समाज में सिंदूर खेला विजयादशमी की एक महत्वपूर्ण परंपरा है। इसमें विवाहित महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। इसे सौभाग्य, वैवाहिक मंगलकामना, प्रेम और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

सिंदूर खेला में दिखी आस्था और उत्साह की झलक

सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। एक-दूसरे को सिंदूर लगाने के साथ उन्होंने परिवार की सुख-समृद्धि और समाज में शांति की कामना की। इस दौरान मंदिर परिसर में उत्सवी माहौल बना रहा। पारंपरिक धार्मिक ध्वनियों और उल्लास के बीच श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की आराधना की। बंगाली परंपरा के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम ने धनबाद की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सौहार्द को भी प्रदर्शित किया। सिंदूर खेला केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि महिलाओं के बीच स्नेह, एकजुटता और मंगलकामना व्यक्त करने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ महिलाओं ने इस परंपरा में हिस्सा लिया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।

मां दुर्गा की विदाई पर भावुक हुए श्रद्धालु

दुर्गोत्सव के अंतिम दिन मां दुर्गा की विदाई का क्षण श्रद्धालुओं के लिए भावुक करने वाला रहा। सिंदूर खेला के दौरान जहां उत्साह और खुशी का माहौल था, वहीं मां की विदाई की बेला में भक्तों की आंखों में भावुकता भी दिखाई दी। महिलाओं ने मां दुर्गा से अगले वर्ष फिर आने की कामना की। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की कि मां अपने भक्तों के परिवारों में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखें। दुर्गापूजा के दौरान कई दिनों तक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों से भक्तिमय रहा मंदिर परिसर विदाई के समय भावनाओं से भर उठा। मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और अगले वर्ष उनके पुनः आगमन की प्रतीक्षा ने इस आयोजन को विशेष बना दिया।

धनबाद की सांस्कृतिक परंपरा की दिखी झलक

हीरापुर स्थित ऐतिहासिक हरि मंदिर में आयोजित सिंदूर खेला ने एक बार फिर धनबाद की सांस्कृतिक विविधता को सामने रखा। बंगाली परंपरा के अनुसार मनाई जाने वाली इस रस्म में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जुड़ाव और आपसी सद्भाव का संदेश भी दिखाई दिया।विजयादशमी पर सिंदूर खेला के साथ दुर्गोत्सव के समापन का माहौल श्रद्धा, उल्लास और भावुकता से भरा रहा। मां दुर्गा की विदाई के साथ श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर उनके आगमन की उम्मीद जताई और सुख-समृद्धि की मंगलकामना की।