Highlights: 

  • बिहार में जेडीयू उम्मीदवारों को हराने वाले दो निर्दलीय MLC भाजपा में शामिल हो गए
  •  तिरहुत स्नातक सीट से लगातार दूसरी बार जीते बंशीधर ब्रजवासी ने थामा BJP का दामन
  • सारण शिक्षक सीट से जीते राहुल राज ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की
  • पटना में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने दोनों को पार्टी की पट्टी पहनाई

पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार की राजनीति में एक बार फिर नए सियासी समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। विधान परिषद चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के उम्मीदवारों को हराकर जीत दर्ज करने वाले दो निर्दलीय विधान पार्षद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ आ गए हैं। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार दूसरी बार जीतने वाले बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नवनिर्वाचित एमएलसी राहुल राज ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है।

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शनिवार को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एनडीए विधानमंडल दल की बैठक के दौरान दोनों नेताओं को पार्टी में शामिल कराया गया। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने दोनों को पार्टी की पट्टी पहनाकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी दोनों नेताओं का अभिनंदन किया। खास बात यह है कि दोनों एमएलसी ने हालिया विधान परिषद चुनाव में जेडीयू के उम्मीदवारों को हराया था। ऐसे में उनका भाजपा में शामिल होना बिहार की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा को विधान परिषद में दो नए सदस्य मिले हैं, वहीं इस घटनाक्रम से एनडीए के भीतर जेडीयू की राजनीतिक स्थिति और गठबंधन के समीकरणों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। दोनों नेताओं ने भाजपा में शामिल होने के पीछे शिक्षक हितों और उनकी मांगों को प्रभावी तरीके से सरकार तक पहुंचाने की जरूरत को प्रमुख वजह बताया है।

भाजपा कार्यालय में हुआ दोनों नेताओं का स्वागत

बिहार भाजपा के नए प्रभारी हरीश द्विवेदी शनिवार को पहली बार पटना पहुंचे। उनके आगमन के बाद प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, सह प्रभारी और पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। इसी दौरान निर्दलीय एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज भी भाजपा कार्यालय पहुंचे। एनडीए विधानमंडल दल की बैठक के दौरान संजय सरावगी ने दोनों को पार्टी की पट्टी पहनाकर भाजपा में शामिल कराया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी दोनों नेताओं का स्वागत किया। बैठक में भाजपा के सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य मौजूद थे। दोनों एमएलसी के भाजपा में आने को पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। खासकर इसलिए कि दोनों ने चुनाव में जेडीयू प्रत्याशियों को हराकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई थी।

बंशीधर ब्रजवासी बोले- निर्दलीय रहकर सीमित थे प्रयास, अब शिक्षक हितों के लिए लड़ेंगे

भाजपा में शामिल होने के बाद बंशीधर ब्रजवासी ने कहा कि निर्दलीय रहने के कारण वे शिक्षकों के मुद्दों को सदन में उठा तो सकते थे, लेकिन उनकी मांगों को सरकार से पूरा कराना अपेक्षाकृत कठिन था। उनके मुताबिक, किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ने से शिक्षकों की समस्याओं और मांगों को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद मिलेगी। बंशीधर ब्रजवासी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ अपने संबंधों का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उन्हें छोटे भाई की तरह मानते हैं। चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें मुलाकात के लिए बुलाया था और उनकी प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी ली थी। बंशीधर के अनुसार, उन्होंने मुख्यमंत्री को स्पष्ट रूप से बताया था कि वे शिक्षकों के हितों और उनकी समस्याओं को लेकर चुनाव मैदान में उतरे थे। इस पर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर अधिकारियों के साथ बैठक कराने का भरोसा दिया था। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए उन्हें जहां भी खड़ा होना पड़ेगा, वे पीछे नहीं हटेंगे। इसी उद्देश्य से उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है।

राहुल राज ने भी शिक्षक हितों को बताया भाजपा में आने की वजह

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी बने राहुल राज ने भी भाजपा में शामिल होने के पीछे शिक्षक हितों को ही प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की विभिन्न मांगों और समस्याओं को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। इस दौरान शिक्षक समुदाय से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। राहुल राज के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को जायज बताया और उन्हें पूरा करने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समुदाय की समस्याओं को सदन में मजबूती से उठाना उनकी प्राथमिकता रहेगी। उनका उद्देश्य शिक्षकों की आवाज को प्रभावी तरीके से सरकार तक पहुंचाना और उनकी मांगों के समाधान की दिशा में काम करना है। इस तरह दोनों एमएलसी ने भाजपा में शामिल होने के पीछे किसी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा के बजाय शिक्षक हितों को अपनी प्राथमिकता बताया है।

जेडीयू उम्मीदवारों को हराकर बने थे विधान पार्षद

दोनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने की खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि हालिया विधान परिषद चुनाव में उन्होंने एनडीए के घटक दल जेडीयू के उम्मीदवारों को हराकर जीत दर्ज की थी।

1. बंशीधर ब्रजवासी ने अभिषेक झा को दी थी शिकस्त

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से बंशीधर ब्रजवासी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी। उन्होंने जेडीयू के उम्मीदवार अभिषेक झा को 9,147 वोटों से पराजित किया था। अभिषेक झा लगातार दूसरी बार इस सीट पर बंशीधर ब्रजवासी से चुनाव हार गए। उनकी जीत को शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच बंशीधर की मजबूत पकड़ के रूप में देखा गया था।

2. राहुल राज ने आनंद पुष्कर को हराया था

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राहुल राज ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। उन्होंने एनडीए समर्थित जेडीयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर को 1,815 वोटों से हराकर जीत हासिल की थी। राहुल राज पहले भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य रह चुके हैं। हालांकि, एनडीए के फैसले के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद भाजपा ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अब चुनाव जीतने के बाद उनकी भाजपा में वापसी बिहार की राजनीति का अहम घटनाक्रम बन गई है।

जेडीयू में क्यों बढ़ सकती है नाराजगी?

दोनों निर्दलीय एमएलसी का भाजपा में शामिल होना एनडीए के भीतर राजनीतिक चर्चा को तेज कर सकता है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि दोनों नेताओं ने चुनाव में जेडीयू के प्रत्याशियों को हराया था। तिरहुत स्नातक सीट पर अभिषेक झा की हार के बाद जेडीयू के कुछ नेताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया था। जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने भी इस मुद्दे पर भाजपा नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए थे। 

उन्होंने आरोप लगाया था कि एनडीए के कुछ नेताओं का दिल साफ नहीं था। इस बयान के बाद गठबंधन के भीतर आपसी तालमेल को लेकर चर्चा हुई थी। अब जिन निर्दलीय उम्मीदवारों ने जेडीयू प्रत्याशियों को चुनाव में हराया, उन्हीं का भाजपा में शामिल होना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं ने शिक्षक हितों को अपनी प्राथमिकता बताया है, लेकिन इस घटनाक्रम का असर भाजपा और जेडीयू के आपसी संबंधों पर किस तरह पड़ता है, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी।

भाजपा को मिला फायदा, एनडीए के समीकरण पर रहेगी नजर

बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के भाजपा में शामिल होने से पार्टी को विधान परिषद में दो नए सदस्य मिले हैं। साथ ही शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में दोनों नेताओं के प्रभाव का लाभ भी भाजपा को मिल सकता है। दूसरी ओर, जेडीयू के लिए यह घटनाक्रम असहज स्थिति पैदा कर सकता है। चुनाव में उसके उम्मीदवारों को हराने वाले दोनों नेता अब उसी गठबंधन के प्रमुख घटक भाजपा का हिस्सा बन गए हैं। फिलहाल दोनों नेताओं ने शिक्षक समुदाय के हितों को अपनी राजनीतिक प्राथमिकता बताया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा में उनकी भूमिका क्या रहती है और उनके शामिल होने से बिहार में एनडीए के भीतर राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

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