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HighLights:

  •  मधुबनी के बलिराजगढ़ गांव में ASI की फायरिंग से एक ग्रामीण की मौत,गोली लगने से तीन अन्य ग्रामीण घायल
  • महिला के घर में गलत नीयत से घुसने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप घिरने के बाद ASI ने चलाईं गोलियां
  • आरोपी ASI चंद्रमोहन सिंह तत्काल प्रभाव से निलंबित,  हत्या की प्राथमिकी दर्ज, गिरफ्तारी के लिए दो विशेष टीमें गठित

मधुबनी (Threesocieties.com Desk): बिहार के मधुबनी जिले में पुलिस की वर्दी को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। बाबूबरही थाना क्षेत्र के बलिराजगढ़ गांव में देर रात पुलिस पिकेट पर तैनात एक सहायक उपनिरीक्षक (ASI) ने कथित तौर पर अपनी सर्विस पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी में एक ग्रामीण की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

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मृतक की पहचान 50 वर्षीय अशोक यादव के रूप में हुई है। घायलों में धनिकलाल यादव, फूलो देवी और विजेंद्र यादव शामिल हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। आरोपी ASI चंद्रमोहन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उसके खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो विशेष टीमें बनाई गई हैं।

महिला के घर में घुसने को लेकर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, बलिराजगढ़ गांव निवासी विजय यादव की पत्नी अपने मायके गई हुई थी। घर में उनकी पुत्री और पड़ोस में रहने वाले अशोक यादव की पुत्री सोई हुई थीं। आरोप है कि इसी दौरान पुलिस पिकेट पर तैनात ASI चंद्रमोहन सिंह गलत नीयत से विजय यादव के घर में घुस गया। उसकी गतिविधियों की भनक लगने पर पड़ोस में रहने वाली फूलो देवी ने बाहर से दरवाजे की सिटकनी बंद कर दी और शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने ASI को घेर लिया। बताया जाता है कि खुद को भीड़ से घिरा देखकर ASI ने अपनी सर्विस पिस्टल निकाल ली और फायरिंग शुरू कर दी।

5-6 राउंड फायरिंग में चार ग्रामीणों को लगी गोली

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ASI ने करीब 5 से 6 राउंड गोलियां चलाईं। इस दौरान अशोक यादव, धनिकलाल यादव, फूलो देवी और विजेंद्र यादव गोली लगने से घायल हो गए। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। सभी घायलों को तत्काल बाबूबरही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने अशोक यादव को मृत घोषित कर दिया। बाकी तीन घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया।अशोक यादव की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बताया गया है कि उनकी बेटी की शादी 14 दिसंबर को होने वाली थी। अशोक यादव बेंगलुरु में पान की दुकान चलाते थे।

अवैध संबंध के शक में ग्रामीणों की नजर में था ASI

घटना को लेकर पुलिस अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी में अवैध संबंध का एंगल भी सामने आया है। एसएसपी योगेन्द्र कुमार के अनुसार, बलिराजगढ़ में बनाए गए पुलिस पिकेट पर ASI की तैनाती थी। वह सामान लेने के लिए संबंधित स्थान पर आता-जाता था। इसी दौरान एक महिला से उसके संबंध होने की बात सामने आई है। बताया गया कि ASI अक्सर उस महिला के पास जाता था। ग्रामीणों को उसकी गतिविधियों पर संदेह था और वे कुछ समय से उस पर नजर रख रहे थे। घटना वाली रात भी ASI कथित तौर पर उसी महिला के पास पहुंचा था। इसके बाद ग्रामीणों ने संबंधित घर को चारों तरफ से घेर लिया। खुद को ग्रामीणों के आक्रोश से बचाने के लिए ASI ने कथित तौर पर गोलियां चला दीं। हालांकि, पूरे मामले में आरोपों, घटनाक्रम और फायरिंग की परिस्थितियों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

पहले भी गोलीबारी की घटना को लेकर विवादों में रहा है ASI

आरोपी ASI चंद्रमोहन सिंह का नाम पहले भी गोलीबारी से जुड़े एक विवाद में सामने आ चुका है। वह पूर्व में मधवापुर थाना में पदस्थापित रहा था।बताया जाता है कि बेनीपट्टी इलाके में शराब तस्करी के संदेह में एक बाइक सवार को रोकने के दौरान गोलीबारी हुई थी। उस घटना में बाइक सवार की मौत हो गई थी। आरोप है कि उस समय भी 4-5 राउंड गोलियां चलाई गई थीं। इस मामले में ASI चंद्रमोहन सिंह और डायल 112 के चालक को निलंबित किया गया था। अब बलिराजगढ़ की घटना में उसका नाम सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली और आरोपी की पूर्व गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा के लिए बनाई गई थी पुलिस पिकेट

बलिराजगढ़ में पुलिस पिकेट स्थापित करने के पीछे एक महत्वपूर्ण वजह पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा थी। मई 2026 में बलिराजगढ़ खुदाई स्थल पर कुछ उपद्रवी तत्वों द्वारा काम प्रभावित करने और खुदाई में मिले पुरातात्विक अवशेषों की चोरी किए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद एसएसपी और ग्रामीणों के बीच बैठक हुई थी। बैठक में स्थल की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती का निर्णय लिया गया था। इसके तहत वहां एक ASI, तीन पुलिसकर्मी और दो चौकीदारों की तैनाती की गई थी। पुलिसकर्मी ड्यूटी के बाद आवासीय बालिका विद्यालय में रहते थे। इसी व्यवस्था के तहत पुलिस पिकेट संचालित हो रही थी। विडंबना यह है कि जिस पुलिस पिकेट का उद्देश्य इलाके में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था, उसी पिकेट पर तैनात पुलिस अधिकारी पर ग्रामीणों पर गोली चलाने का गंभीर आरोप लगा है।

ASI निलंबित, हत्या का केस दर्ज; गिरफ्तारी के लिए दो टीमें गठित

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरीय अधिकारी सक्रिय हो गए। अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात की। घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जानकारी जुटाई गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फायरिंग के बाद आरोपी ASI चंद्रमोहन सिंह फरार हो गया। उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उसके खिलाफ हत्या समेत संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दो विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है।

घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कानून की रक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिस अधिकारी ने आखिर किन परिस्थितियों में ग्रामीणों पर गोलियां चलाईं और इस पूरी घटना की वास्तविक वजह क्या थी।