HighLights:
- अनंत सिंह को बिहार विधानसभा सचिवालय का कारण बताओ नोटिस
- सात दिनों के भीतर देना होगा जवाब, सदस्यता समाप्त करने पर मांगा गया स्पष्टीकरण
- जदयू ने दल-बदल कानून के उल्लंघन का लगाया आरोप
- पटना स्नातक चुनाव में अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार करने का मामला
- जदयू ने अनंत सिंह को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया है
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार की राजनीति में बाहुबली नेता और जदयू के निष्कासित विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अब उनकी विधानसभा सदस्यता पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बिहार विधानसभा सचिवालय ने अनंत सिंह को दल-बदल कानून के कथित उल्लंघन के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है कि उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त क्यों नहीं की जाए?
विधानसभा सचिवालय की इस कार्रवाई के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। यदि अनंत सिंह निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं, तो उनकी विधायकी पर आगे कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
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विधानसभा सचिवालय ने जारी किया नोटिस
बिहार विधानसभा के प्रभारी सचिव संजय कुमार सिंह की ओर से सोमवार को अनंत सिंह के नाम कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में उनसे पूछा गया है कि दल-बदल कानून के उल्लंघन के आरोपों के आधार पर उनकी विधानसभा की सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए?अनंत सिंह को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। विधानसभा सचिवालय की यह कार्रवाई जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की ओर से भेजे गए पत्र के आधार पर की गई है।
जदयू ने लगाया दल-बदल कानून के उल्लंघन का आरोप
जदयू ने अपने पत्र में अनंत सिंह पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और दल-बदल कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। दरअसल, हाल में संपन्न विधान परिषद के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव के दौरान अनंत सिंह की भूमिका को लेकर पार्टी ने नाराजगी जताई थी। पार्टी का आरोप है कि अनंत सिंह ने जदयू के अधिकृत उम्मीदवार के बजाय दूसरी पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार किया।
पटना स्नातक चुनाव बना विवाद की वजह
विवाद की मुख्य वजह पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव है। इस सीट से जदयू ने अपने वरिष्ठ नेता नीरज कुमार को अधिकृत उम्मीदवार बनाया था। वहीं, अनंत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने जदयू के अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करने के बजाय अनसुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार किया। जदयू ने इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ गतिविधि और दल-बदल कानून के उल्लंघन का मामला बताते हुए विधानसभा सचिवालय से कार्रवाई की मांग की।
पहले ही छह साल के लिए पार्टी से हो चुके हैं निष्कासित
इस विवाद के बाद जदयू ने अनंत सिंह के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई भी की थी। पार्टी ने उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने के साथ उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था। अब मामला विधानसभा सचिवालय तक पहुंच गया है। पार्टी से निष्कासन के बाद विधानसभा सदस्यता पर उठे सवाल ने अनंत सिंह की राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
क्या जा सकती है अनंत सिंह की विधायकी?
विधानसभा सचिवालय के नोटिस के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो सकती है? फिलहाल उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए सात दिनों का समय दिया गया है। उनके जवाब और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी। दल-बदल कानून के तहत किसी विधायक की सदस्यता समाप्त करने का फैसला निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया जाता है। इसलिए नोटिस जारी होने का मतलब तत्काल सदस्यता समाप्त होना नहीं है।
अब सबकी नजर अनंत सिंह के जवाब और विधानसभा सचिवालय की आगे की कार्रवाई पर टिकी है। सात दिनों की यह समयसीमा उनके राजनीतिक भविष्य के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।