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HighLights:

  • आदिवासी नेत्री निशा भगत के निधन से गुमला में शोक की लहर 
  • पिता इंदु भगत ने पिठोरिया थाना में लिखित शिकायत देकर मांगा न्याय
  • सोशल मीडिया पर चरित्र हनन और मानसिक प्रताड़ना का लगाया आरोप
  •  शिकायत में अजय तिर्की, ज्योत्स्ना केरकेट्टा समेत अन्य लोगों के नाम

रांची (Threesocieties.com Desk): आदिवासी अस्मिता, सरना संस्कृति और सामाजिक अधिकारों की आवाज बुलंद करने वाली युवा सामाजिक कार्यकर्ता निशा कुमारी भगत के आकस्मिक निधन से गुमला सहित पूरे जनजातीय समाज में शोक की लहर है। उनके निधन ने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। इस बीच निशा के पिता इंदु भगत ने पिठोरिया थाना में लिखित आवेदन देकर बेटी को कथित रूप से मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना देने तथा सोशल मीडिया पर चरित्र हनन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले में नामजद लोगों सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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निशा का पार्थिव शरीर देर रात गुमला पहुंचने के बाद डीएसपी रोड स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है। राजनीतिक, सामाजिक और जनजातीय संगठनों से जुड़े लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। शनिवार दोपहर 12 बजे झारखंड के तीन पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास भी उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

पिता ने पिठोरिया थाना में दी लिखित शिकायत, प्रताड़ना का लगाया आरोप

निशा भगत के पिता इंदु भगत ने पिठोरिया थाना प्रभारी को दिए आवेदन में बेटी की मौत के लिए कथित मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना को जिम्मेदार ठहराया है। आवेदन के अनुसार, इंदु भगत मूल रूप से गुमला जिले के घाघरा थाना क्षेत्र के जोरटांड़ पोस्ट घाट गांव के निवासी हैं।पिता का आरोप है कि उनकी बेटी को लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था।

सोशल मीडिया पर उसके चरित्र को लेकर आपत्तिजनक बातें कही गईं और झूठे चारित्रिक लांछन लगाए गए। परिवार का कहना है कि इस कथित प्रताड़ना के कारण निशा अत्यधिक मानसिक दबाव में थीं। आवेदन में अजय तिर्की, ज्योत्स्ना केरकेट्टा, जमीन के कारोबार से जुड़े कुछ लोगों और चर्च से जुड़े कुछ व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पिता ने आरोप लगाया है कि निशा को घर से बाहर आने-जाने के दौरान भी परेशान किया जाता था। हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही इन आरोपों की सच्चाई और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

आत्महत्या से पहले सोशल मीडिया पर जारी किया था बयान

पिता की शिकायत में निशा की ओर से आत्महत्या से पहले सोशल मीडिया पर जारी किए गए वीडियो और बयान का भी उल्लेख किया गया है। परिवार का कहना है कि उस वीडियो में निशा ने कुछ लोगों के नाम लेकर अपनी परेशानी और आरोपों का जिक्र किया था। पिता ने पुलिस से मांग की है कि सोशल मीडिया पर जारी वीडियो, संबंधित पोस्ट, डिजिटल साक्ष्य और अन्य उपलब्ध सामग्री की जांच की जाए। उन्होंने वीडियो में जिन लोगों का उल्लेख किया गया है, उनकी भूमिका की भी जांच करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

तीन पूर्व मुख्यमंत्री देंगे श्रद्धांजलि

निशा भगत के निधन की खबर से गुमला में शोक का माहौल है। उनके आवास पर लगातार राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि पहुंच रहे हैं। शनिवार दोपहर 12 बजे झारखंड के तीन पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस दौरान जनजातीय समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के जुटने की भी संभावना है। निशा के निधन के बाद आदिवासी समाज से जुड़े संगठनों के बीच उनके सामाजिक योगदान और मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा हो रही है।

होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई से सामाजिक संघर्ष तक का सफर

निशा कुमारी भगत की पहचान केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में नहीं थी, बल्कि उन्होंने आदिवासी अस्मिता, सरना संस्कृति और सामाजिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपनी अलग पहचान बनाई थी। गुमला शहर के बड़ाईक मोहल्ला स्थित डीएसपी रोड की रहने वाली निशा के पिता हांदू भगत झारखंड के विभिन्न आंदोलनों से जुड़े रहे हैं।

पिता के आंदोलनकारी विचारों और आदिवासी अधिकारों के संघर्ष का निशा के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने दुर्गापुर के डीएसएमएस संस्थान से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद बेंगलुरु में नौकरी शुरू की। हालांकि, कुछ समय बाद नौकरी छोड़कर गुमला लौट आईं और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हो गईं। गुमला लौटने के बाद उन्होंने आदिवासी संस्कृति, परंपरा, सरना धर्म, सरना झंडे की पहचान और जल-जंगल-जमीन से जुड़े अधिकारों को लेकर आवाज उठानी शुरू की।

सरना संस्कृति और आदिवासी अस्मिता के मुद्दों पर थीं सक्रिय

निशा भगत आदिवासी समाज में सामाजिक कुरीतियों और मतांतरण से जुड़े सवालों पर लगातार अपनी बात रखती थीं। सरना और सनातन परंपराओं के बीच सांस्कृतिक संबंधों की बात रखने के साथ ही वह आदिवासी समाज की पहचान और परंपराओं को संरक्षित करने की पक्षधर थीं। उनकी कोशिश आदिवासी महिलाओं और युवतियों को सामाजिक संगठनों से जोड़ने और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने की थी। सितंबर 2025 में उन्हें केंद्रीय सरना समिति की केंद्रीय महिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस पद पर रहते हुए उन्होंने महिलाओं को संगठित करने और सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में काम किया।

विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी थीं निशा भगत

सामाजिक गतिविधियों के साथ निशा ने राजनीतिक क्षेत्र में भी कदम रखा था। वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के टिकट पर गुमला विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। दिसंबर 2025 में मतांतरण के विरोध में मुंडन कराकर भी वह चर्चा में आई थीं। आदिवासी समाज के मुद्दों पर उनकी सक्रियता और बेबाकी ने उन्हें क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई थी।

निडर और संघर्षशील स्वभाव की थीं निशा

निशा से अपने संगठनात्मक जुड़ाव को याद करते हुए एक करीबी ने बताया कि वर्ष 2008-09 में गुमला में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री के रूप में काम करने के दौरान उन्होंने ही निशा को संगठन से जोड़ा था। उनके अनुसार, निशा शुरू से ही निडर, साहसी और संघर्षशील स्वभाव की थीं। किसी जरूरतमंद की मदद करने में वह हमेशा आगे रहती थीं। संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखने की क्षमता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।

निधन से सामाजिक और संगठनात्मक क्षेत्र में शोक

निशा भगत के आकस्मिक निधन से उनके समर्थकों, परिचितों और सामाजिक संगठनों में गहरा दुख है। उनके करीबी उन्हें एक ऐसी युवा सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में याद कर रहे हैं, जिन्होंने कम उम्र में आदिवासी समाज के मुद्दों को लेकर अपनी पहचान बनाई। वहीं, पिता की शिकायत के बाद अब मामले में पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। परिवार ने निष्पक्ष जांच कर बेटी को न्याय दिलाने की मांग की है।

निशा भगत का निधन जहां गुमला और जनजातीय समाज के लिए अपूरणीय क्षति है, वहीं उनकी मौत से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने आना भी बेहद जरूरी है।