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Highlights:

  • कुसुम विहार में भारती एवं नीमा ने संयुक्त रूप से मनाई भगवान धन्वंतरि जयंती
  • धनबाद विधायक राज सिन्हा समेत कई गणमान्य लोग और चिकित्सक हुए शामिल
  • जयप्रकाश नारायण सिंह ने भगवान धन्वंतरि की उत्पत्ति और औषधीय महत्व पर डाला प्रकाश

धनबाद (Threesocieties.com Desk): भारती एवं नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) के संयुक्त तत्वावधान में कुसुम विहार में भगवान धन्वंतरि जयंती पूरे हर्षोल्लास, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। इस अवसर पर भगवान धन्वंतरि की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम में धनबाद विधायक राज सिन्हा समेत सामाजिक, धार्मिक एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग शामिल हुए। आयोजन के दौरान भगवान धन्वंतरि के जीवन, आयुर्वेद, पारंपरिक औषधियों और मानव जीवन में स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।

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कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज एवं स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण का संदेश देना था। वक्ताओं ने कहा कि भगवान धन्वंतरि केवल आराधना के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि भारतीय चिकित्सा परंपरा, आयुर्वेद और निरोग जीवन की अवधारणा के भी प्रतीक हैं।

भगवान धन्वंतरि की उत्पत्ति और चार भुजाओं का महत्व बताया

कार्यक्रम में आरोग्य भारती के झारखंड प्रांत सचिव जयप्रकाश नारायण सिंह ने भगवान धन्वंतरि की उत्पत्ति से लेकर उनके स्वरूप और धार्मिक एवं औषधीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भगवान धन्वंतरि की चार भुजाओं में धारण किए गए विभिन्न प्रतीकों, अस्त्रों, औषधियों और जलकुंभ के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में भगवान धन्वंतरि को देवताओं का वैद्य माना गया है। उनका स्वरूप चिकित्सा, औषधि, आरोग्य और दीर्घायु का संदेश देता है।

जयप्रकाश नारायण सिंह ने कहा कि भगवान धन्वंतरि की आराधना का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ करना नहीं है। उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारना भी जरूरी है। हमें यह समझना होगा कि स्वस्थ रहना केवल व्यक्तिगत जरूरत नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली, बेहतर स्वास्थ्य जागरूकता और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जब व्यक्ति स्वस्थ रहेगा, तभी परिवार स्वस्थ होगा। स्वस्थ परिवारों से स्वस्थ समाज और स्वस्थ समाज से मजबूत एवं स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होगा।

औषधीय मसालों और काढ़े की उपयोगिता पर अरुण राय ने डाला प्रकाश

कार्यक्रम में पर्यावरण प्रमुख अरुण राय ने भगवान धन्वंतरि के हाथों में धारण की गई औषधियों और पारंपरिक मसालों की उपयोगिता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाले कई मसालों का पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में भी विशेष महत्व रहा है। इनका उपयोग विभिन्न घरेलू औषधीय तैयारियों में किया जाता रहा है।  अरुण राय ने कोरोना महामारी का उल्लेख करते हुए पारंपरिक मसालों से तैयार काढ़े के प्रचलित उपयोग की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में हल्दी, अदरक, तुलसी और अन्य औषधीय सामग्रियों का उपयोग लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी घरेलू उपायों में किया जाता रहा है। उन्होंने भारतीय चिकित्सा परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझने तथा उनके प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।

विधायक राज सिन्हा समेत कई गणमान्य लोगों ने की पूजा-अर्चना

भगवान धन्वंतरि जयंती के अवसर पर उपस्थित सभी गणमान्य लोगों ने सामूहिक रूप से भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम में धनबाद विधायक राज सिन्हा की विशेष उपस्थिति रही। इस अवसर पर आरोग्य भारती के झारखंड प्रांत सचिव जयप्रकाश नारायण सिंह, पर्यावरण प्रमुख अरुण राय, महानगर अध्यक्ष दिनेश प्रसाद सिंह, जिला अध्यक्ष डॉ. विकास रमण, कार्याध्यक्ष दयाशंकर चौबे, जिला उपाध्यक्ष यतींद्र नाथ ठाकुर, महानगर उपाध्यक्ष डॉ. मुक्ति किशोर, जिला सचिव विकास ओझा, सह सचिव लालटु प्रमाणिक और महानगर सह सचिव अजय सिन्हा उपस्थित रहे। इसके अलावा एकल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविंद्र कुमार ओझा, दयाशंकर तिवारी, डॉ. जलंधर, डॉ. राजेश सहित नीमा के विभिन्न पदाधिकारी और चिकित्सक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

सभी ने भगवान धन्वंतरि के समक्ष पूजा-अर्चना कर समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा परंपरा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया।

हीरापुर के अजली लाला मंदिर में भी हुआ धन्वंतरि पूजन

धन्वंतरि जयंती के अवसर पर धनबाद के हीरापुर स्थित अजली लाला मंदिर में भी भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की गई। आरोग्य भारती की महिला इकाई की ओर से आयोजित इस पूजन कार्यक्रम में महिला आयाम प्रमुख रामा सिन्हा और जिला अध्यक्ष ममता सिंह का मार्गदर्शन रहा। इस दौरान श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान धन्वंतरि का पूजन किया गया। आयोजन के माध्यम से स्वास्थ्य, आरोग्य और समाज कल्याण का संदेश दिया गया।

आयुर्वेद और स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश

धन्वंतरि जयंती के आयोजन ने एक बार फिर भारतीय चिकित्सा परंपरा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि केवल बीमारी होने पर उपचार कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित दिनचर्या, संतुलित खानपान, स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना भी जरूरी है। आयोजकों ने भगवान धन्वंतरि के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने और स्वस्थ समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।