Jharkhand: कोडरमा सिविल सर्जन गिरफ्तार! 15 वर्षीय नाबालिग से यौन शोषण का आरोप
कोडरमा सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार को 15 वर्षीय नाबालिग से कथित यौन शोषण के मामले में गिरफ्तार किया गया। उरवां स्थित फार्म हाउस से देर रात गिरफ्तारी, POCSO एक्ट के तहत FIR और जेल भेजे जाने की पूरी खबर पढ़ें Threesocieties.com पर।
Highlights:
- नाबालिग से यौन शोषण के आरोप में कोडरमा सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार गिरफ्तार
- महिला थाना कोडरमा में FIR दर्ज , पॉक्सो एक्ट समेत संबंधित धाराएं
- गिरफ्तारी: शनिवार देर रात उरवां स्थित फार्म हाउस से
- मेडिकल जांच और पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेजे गए
कोडरमा (Threesocieties.com Desk): झारखंड के कोडरमा जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। 15 वर्षीय आदिवासी नाबालिग लड़की के कथित यौन शोषण के मामले में कोडरमा के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने शनिवार की देर रात चंदवारा के उरवां स्थित उनके फार्म हाउस से उन्हें हिरासत में लिया। पूछताछ और सदर अस्पताल में मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी करने के बाद रविवार दोपहर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
मामले में नाबालिग के बयान के आधार पर महिला थाना कोडरमा में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें पॉक्सो (POCSO) एक्ट समेत संबंधित कानूनी धाराएं लगाई गई हैं। जिले के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी की गिरफ्तारी से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
चाइल्ड हेल्पलाइन पर फोन करने के बाद सामने आया मामला
पुलिस के अनुसार, मामला तब सामने आया जब हजारीबाग जिले के विशुनगढ़ थाना क्षेत्र की रहने वाली 15 वर्षीय नाबालिग ने शनिवार को चाइल्ड हेल्पलाइन हजारीबाग पर फोन कर अपनी आपबीती बताई। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने मामले में हस्तक्षेप किया और नाबालिग को बाल कल्याण समिति (CWC), हजारीबाग के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यहां पीड़िता का आधिकारिक बयान दर्ज कराया गया। नाबालिग की शिकायत और बयान के आधार पर संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद कोडरमा पुलिस को सूचना मिली और प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
मां के इलाज के दौरान हुआ था संपर्क, तीन बार शोषण का आरोप
पीड़िता ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि वर्ष 2025 में वह अपनी मां का इलाज कराने के लिए कोडरमा सिविल सर्जन के उरवां स्थित निजी अस्पताल गई थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात डॉ. अनिल कुमार से हुई थी। नाबालिग के आरोप के मुताबिक, आरोपी ने उसे बहला-फुसलाकर कथित रूप से यौन शोषण किया। पीड़िता ने अपने बयान में पिछले दो महीनों के दौरान तीन बार यौन शोषण किए जाने का आरोप लगाया है। बताया गया है कि कथित घटनाओं से परेशान होकर नाबालिग ने आखिरकार चाइल्ड हेल्पलाइन से संपर्क किया और अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत सामने आने के बाद बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों और पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की।
आधी रात फार्म हाउस पहुंची पुलिस टीम, सिविल सर्जन दबोचे गये
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोडरमा के पुलिस अधीक्षक कुमार शिवाशीष के निर्देश पर पुलिस टीम ने कार्रवाई की। हजारीबाग में नाबालिग का बयान दर्ज होने के बाद कोडरमा पुलिस को मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद पुलिस की विशेष टीम ने शनिवार देर रात उरवां स्थित फार्म हाउस पर पहुंचकर डॉ. अनिल कुमार को हिरासत में लिया।
पुलिस कार्रवाई के बाद उन्हें तिलैया डैम ओपी में रखा गया। रविवार सुबह उन्हें महिला थाना लाकर पूछताछ की गई। पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सदर अस्पताल में उनकी मेडिकल जांच कराई गई। इसके बाद पुलिस ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। कोडरमा पुलिस अधीक्षक कुमार शिवाशीष ने आरोपी सिविल सर्जन की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की पुष्टि की है।
POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज, जांच में जुटी पुलिस
नाबालिग की उम्र 18 वर्ष से कम होने के कारण मामला बाल यौन अपराध संरक्षण कानून यानी पॉक्सो एक्ट के दायरे में आता है। पीड़िता के आवेदन और बयान के आधार पर महिला थाना कोडरमा में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पॉक्सो एक्ट बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया कानून है। ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान और निजता की रक्षा करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों, घटनाक्रम और संबंधित परिस्थितियों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
कोडरमा जिले के सिविल सर्जन जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात अधिकारी की गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि शिकायत एक नाबालिग से संबंधित है और प्राथमिकी में पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। सिविल सर्जन जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर होते हैं। ऐसे में वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप और उनकी गिरफ्तारी ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं। मामले में आरोपी का पक्ष सामने आने तथा जांच में अन्य तथ्य स्पष्ट होने के बाद ही आगे की स्थिति का पता चलेगा।
मीडिया के सवालों पर आरोपी ने नहीं दिया जवाब
आरोपी सिविल सर्जन को जेल भेजे जाने के दौरान मीडिया ने उनका पक्ष जानने का प्रयास किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। फिलहाल मामले में उनकी ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कानून के अनुसार, किसी भी आरोपी को दोषसिद्ध होने तक निर्दोष माना जाता है। इसलिए मामले में अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
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