BCCL में कोयला चोरी पर बड़ा एक्शन: CISF सहायक कमांडेंट डिमोट, दिल्ली तक पहुंची जांच

BCCL धनबाद में कथित कोयला चोरी मामले में CISF के सहायक कमांडेंट अरुण जय कुमार को डिमोट कर इंस्पेक्टर बनाया गया है। दिल्ली मुख्यालय तक पहुंची जांच में कई अधिकारियों, ट्रांसफर-पोस्टिंग और संपत्ति की भी जांच की जा रही है।

BCCL में कोयला चोरी पर बड़ा एक्शन: CISF सहायक कमांडेंट डिमोट, दिल्ली तक पहुंची जांच
ISF अफसर डिमोट; ट्रांसफर-पोस्टिंग भी जांच के घेरे में।

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  • कोयला चोरी मामले में CISF के सहायक कमांडेंट अरुण जय कुमार पर बड़ी कार्रवाई
  • पदावनत कर दोबारा इंस्पेक्टर बनाया गया, निलंबन जारी रहेगा
  • दिल्ली मुख्यालय को भेजी गई स्पेशल रिपोर्ट के बाद जांच तेज
  • कई अन्य अधिकारियों और जवानों की भूमिका भी जांच के दायरे में
  • ट्रांसफर-पोस्टिंग, सर्विस रिकॉर्ड और संपत्ति की भी होगी जांच

धनबाद (Threesocieties.com Desk):  बीसीसीएल धनबाद इकाई में कथित कोयला चोरी के मामले में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए सहायक कमांडेंट अरुण जय कुमार को पदावनत (डिमोट) कर पुनः इंस्पेक्टर बना दिया है। उन पर अपने कार्यक्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रही कोयला चोरी को रोकने में विफल रहने और संदिग्ध भूमिका के आरोपों के बीच यह कार्रवाई की गई है। मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है और इसकी जांच दिल्ली स्थित CISF मुख्यालय तक पहुंच चुकी है।

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जानकारी के अनुसार अरुण जय कुमार पिछले वर्ष ही इंस्पेक्टर से लोकल रैंक प्रमोशन पाकर सहायक कमांडेंट बने थे। उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और CISF की पेशेवर छवि को और बेहतर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, बीसीसीएल क्षेत्र में लगातार सामने आ रही कथित कोयला चोरी की घटनाओं के बाद उनकी कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई।

दिल्ली मुख्यालय को भेजी गई स्पेशल रिपोर्ट

सूत्रों के अनुसार CISF की ओर से एक विस्तृत स्पेशल रिपोर्ट दिल्ली मुख्यालय भेजी गई है, जिसमें बीसीसीएल धनबाद इकाई में उनकी कार्यप्रणाली को संदेहास्पद बताते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। रिपोर्ट के आधार पर उन्हें वर्तमान पद से हटाकर इंस्पेक्टर बनाया गया है तथा निलंबन की कार्रवाई भी जारी रखी गई है। जब तक विभागीय जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनकी सेवा स्थिति पर अंतिम निर्णय लंबित रहेगा।

कई अधिकारी और जवान भी जांच के घेरे में

उच्च स्तरीय जांच में केवल एक अधिकारी ही नहीं, बल्कि कई अन्य अधिकारियों और जवानों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मियों और कथित कोयला माफिया के बीच किसी प्रकार का संपर्क तो नहीं था। सूत्रों का कहना है कि जांच में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है तथा आवश्यकता पड़ने पर आगे और विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।

ट्रांसफर-पोस्टिंग की भी होगी जांच

मामले की जांच केवल कथित कोयला चोरी तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में लाई गई है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों ने प्रभाव का इस्तेमाल कर बीसीसीएल धनबाद जैसी संवेदनशील इकाई में अपनी तैनाती कराई थी। जांच एजेंसियां अब संबंधित अधिकारियों के ट्रांसफर रिकॉर्ड, पूर्व सेवा इतिहास और उनकी घोषित आय के मुकाबले संपत्ति का भी परीक्षण कर रही हैं। उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं सेवा अवधि के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई।

धनबाद के साथ बोकारो पर भी नजर

जांच का दायरा अब धनबाद से आगे बढ़कर बोकारो के कोयला उत्पादन क्षेत्रों तक पहुंच गया है। बेरमो अनुमंडल के चलकरी, अगवाली, गोमिया, चंद्रपुरा, नावाडीह, फुसरो समेत कई इलाकों में कथित अवैध कोयला कारोबार पर नजर रखी जा रही है।

सूत्रों का मानना है कि यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिले तो आने वाले दिनों में इन इलाकों में भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी आकलन कर रही हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियों को होने वाले आर्थिक नुकसान में अवैध कोयला कारोबार की कितनी भूमिका रही है।

जांच पर टिकी निगाहें

फिलहाल पूरे मामले में विभागीय जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और संभावित आगे की कार्रवाई पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इस बीच, बीसीसीएल के कोयला क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और सख्त किए जाने की भी तैयारी बताई जा रही है।