बिहार: 29 साल बाद इंसाफ: भुटकुन शुक्ला हत्याकांड में बॉडीगार्ड निकला कातिल, दोषी दीपक सिंह को उम्रकैद

वैशाली के चर्चित भुटकुन शुक्ला हत्याकांड में 29 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। भुटकुन शुक्ला की हत्या के दोषी उनके बॉडीगार्ड दीपक सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। जानिए पूरे मामले की टाइमलाइन और आरोपी का आपराधिक इतिहास।

बिहार: 29 साल बाद इंसाफ: भुटकुन शुक्ला हत्याकांड में बॉडीगार्ड निकला कातिल, दोषी दीपक सिंह को उम्रकैद
भुटकुन शुक्ला हत्याकांड में बॉडीगार्ड दीपक को उम्रकैद।

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HighLights:

  • 29 साल पुराने चर्चित भुटकुन शुक्ला हत्याकांड में अदालत का फैसला
  • भुटकुन शुक्ला के बॉडीगार्ड दीपक सिंह को आजीवन कारावास की सजा
  • भुटकुन शुक्ला बाहुबली छोटन शुक्ला और पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला के भाई थे

मुजफ्फरपुर/हाजीपुर ((Threesocieties.com Desk):  बिहार के चर्चित भुटकुन शुक्ला हत्याकांड में लगभग तीन दशक बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी दीपक सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (दशम) सर्वेश कुमार मिश्रा की अदालत ने आरोपी को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

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यह मामला वर्ष 1997 का है और बिहार के चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है। फैसले के साथ करीब 29 वर्षों से लंबित इस मुकदमे का कानूनी अध्याय समाप्त हो गया।

अपने ही बॉडीगार्ड ने की थी हत्या

भुटकुन शुक्ला की हत्या 16 जुलाई 1997 को वैशाली जिले के लालगंज थाना क्षेत्र के खंजाहाचक स्थित उनके पैतृक आवास पर गोली मारकर कर दी गई थी। जांच के दौरान उनके करीबी और निजी बॉडीगार्ड दीपक सिंह का नाम सामने आया। लंबे समय तक चली सुनवाई और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना और अब उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

छोटन शुक्ला और मुन्ना शुक्ला से है पारिवारिक संबंध

भुटकुन शुक्ला बिहार के चर्चित बाहुबली छोटन शुक्ला के भाई थे। वहीं वे लालगंज के पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला के भी भाई थे। इस कारण यह हत्याकांड उस समय पूरे बिहार में सुर्खियों में रहा था।

बैंक मैनेजर हत्याकांड में गिरफ्तारी के बाद फिर आया चर्चा में

दोषी दीपक सिंह पिछले वर्ष उस समय फिर चर्चा में आया जब उसे 14 वर्ष पुराने बैंक प्रबंधक हत्याकांड में गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार उसने उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक, सरमस्तपुर (पारू) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक लालबहादुर सिंह की हत्या कर शव को बैंक के कैश केबिन में गमछे के फंदे से लटका दिया था। इस मामले में पुलिस ने दीपक सिंह और संजय सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। दीपक लंबे समय तक फरार रहा। अदालत ने उसके खिलाफ कुर्की का आदेश जारी किया था और उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। बाद में बिहार एसटीएफ ने उसे उत्तर प्रदेश के वाराणसी से गिरफ्तार कर पारू पुलिस के हवाले किया था।

कई जिलों में सक्रिय था गिरोह

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दीपक सिंह कभी भुटकुन शुक्ला गिरोह का शार्प शूटर रहा था। उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस का दावा है कि उसका नेटवर्क मुजफ्फरपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी सहित कई जिलों तक फैला हुआ था। बताया जाता है कि उसकी मां स्थानीय स्तर पर मुखिया भी हैं।

करीब तीन दशक बाद मिला न्याय

भुटकुन शुक्ला हत्याकांड का फैसला बिहार की न्यायिक व्यवस्था में लंबे समय तक चले मुकदमों के महत्वपूर्ण उदाहरणों में शामिल हो गया है। अदालत के इस फैसले के साथ लगभग 29 साल पुराने चर्चित हत्या मामले में दोषी को सजा मिल गई। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि बिहार के चर्चित आपराधिक मामलों में भी एक अहम कानूनी पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।