सुप्रीम कोर्ट पहुंचा JPSC विवाद, CBI जांच की मांग पर केंद्र और झारखंड सरकार को नोटिस

JPSC Exam 2025: 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और झारखंड सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। जानिए पूरा मामला।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा JPSC विवाद, CBI जांच की मांग पर केंद्र और झारखंड सरकार को नोटिस
JPSC-JSSC भर्ती विवाद अब हाईकोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

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  • JPSC की 2025 प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
  • CBI या स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
  • केंद्र सरकार और झारखंड सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस
  • JPSC और अन्य संबंधित पक्षों से भी जवाब मांगा गया

नई दिल्ली/ रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सोमवार, 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सर्वोच्च अदालत ने मामले में केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, JPSC और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

याचिका में परीक्षा की कथित गड़बड़ियों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने अथवा सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि याचिका का मुख्य जोर परीक्षा को सीधे रद्द कराने के बजाय पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने पर है।

CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई

यह जनहित याचिका हरिशरण देवगन की ओर से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। याचिका में JPSC Combined Civil Services Preliminary Competitive Examination-2025 की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

19 अप्रैल 2026 को हुई थी प्रारंभिक परीक्षा

याचिका में जिस JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 का उल्लेख है, उसका आयोजन 19 अप्रैल 2026 को किया गया था। यह परीक्षा JPSC के विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत आयोजित हुई थी। याचिका में परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को लेकर कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि परीक्षा की प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से जुड़े सवालों का स्वतंत्र एजेंसी से परीक्षण जरूरी है। इसी आधार पर CBI या किसी स्वतंत्र जांच व्यवस्था की मांग सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई है।

JPSC-JSSC विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम

JPSC की परीक्षा को लेकर विवाद ऐसे समय सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, जब झारखंड में JPSC और JSSC की कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन और कानूनी लड़ाई जारी है। परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्रों ने लगातार प्रदर्शन किए हैं और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग उठाई है। सुप्रीम कोर्ट का नोटिस इस पूरे विवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।हालांकि, अदालत द्वारा नोटिस जारी किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को सही मान लिया है। अभी संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना है। इसके बाद अदालत याचिका में उठाए गए मुद्दों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की दिशा तय करेगी।

हाईकोर्ट के फैसले से भी जुड़ा है भर्ती विवाद

JPSC विवाद के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने 20 अगस्त को 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा कि नियमित नियुक्तियों को उचित कानूनी प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट के आदेश से उन अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है, जिनकी नियुक्तियां राज्य सरकार के रद्दीकरण आदेश से प्रभावित हो रही थीं।

अदालत ने सरकार से संबंधित मामले में जवाब भी मांगा है।इसके बाद JSSC-CGL और CDPO भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के सरकारी फैसले पर भी हाईकोर्ट ने रोक लगाई और सरकार को जवाब दाखिल करने का समय दिया। इससे साफ है कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद अब कई स्तरों पर न्यायिक जांच के दायरे में है।

अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, JPSC और अन्य संबंधित पक्षों का जवाब इस मामले में महत्वपूर्ण होगा। अदालत आगे यह तय कर सकती है कि याचिका में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध सामग्री के आधार पर स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है या नहीं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने न तो JPSC की 2025 प्रारंभिक परीक्षा रद्द की है और न ही CBI जांच का आदेश दिया है। अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है। इसलिए इस स्तर पर इसे CBI जांच का आदेश नहीं, बल्कि स्वतंत्र जांच की मांग पर न्यायिक प्रक्रिया की महत्वपूर्ण शुरुआत माना जाना चाहिए।

अभ्यर्थियों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट पर

JPSC-JSSC भर्ती विवाद के बीच अभ्यर्थियों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर रहेगी। एक तरफ 11वीं-13वीं JPSC नियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट से प्रभावित अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर 2025 की 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग सर्वोच्च अदालत के सामने पहुंच गई है।

ऐसे में झारखंड की भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य सरकार के जवाब, JPSC के पक्ष और अदालत की आगे की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है।