JPSC-JSSC आंदोलन: CGL रद्द और CBI जांच पर सरकार ने कहा ‘नहीं’, 10 अगस्त को विधानसभा घेरेंगे छात्र
JPSC-JSSC विवाद में सरकार और छात्रों के बीच वार्ता विफल रही। CGL रद्द और CBI जांच पर सहमति नहीं बनी। सरकार JPSC 14वीं व बैकलॉग परीक्षा रद्द करने को तैयार, छात्र 10 अगस्त को विधानसभा घेराव पर अड़े।
HighLights:
- JPSC-JSSC विवाद पर सरकार और छात्रों के बीच वार्ता बेनतीजा
- CGL परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग पर नहीं बनी सहमति
- JPSC 14वीं प्रारंभिक और दो बैकलॉग परीक्षाएं रद्द करने पर सरकार तैयार
- सरकार ने 98 प्रतिशत मांगों पर सहमति का दावा किया
- छात्रों ने सरकार के दावे को बताया गलत, कहा- 13 में से सिर्फ 3 परीक्षाएं रद्द
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन रविवार को सरकार और अभ्यर्थियों के बीच वार्ता के बाद भी खत्म नहीं हुआ। राज्य सरकार की ओर से चार मंत्रियों की कमेटी ने आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बातचीत की। सरकार ने दावा किया कि छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगों पर सहमति बन गई है, लेकिन JSSC CGL परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग पर सहमति नहीं बन सकी।
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सरकार ने JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और सिविल सेवा की बैकलॉग परीक्षाएं रद्द करने पर सहमति जताई है। वहीं, 14वीं JPSC परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी की जांच जारी रखने तथा जरूरत पड़ने पर वित्तीय अनियमितताओं की ED जांच की अनुशंसा करने की बात कही गई है।
दूसरी ओर, आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के 98 प्रतिशत मांगें मानने के दावे को खारिज कर दिया है। छात्रों का कहना है कि उनकी 13 प्रमुख मांगों में से केवल तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति बनी है। छात्र CGL रद्द करने और CBI जांच की मांग पर अब भी अड़े हुए हैं। इसी वजह से छात्रों ने आंदोलन जारी रखने और 10 अगस्त को विधानसभा घेराव करने का ऐलान किया है।
चार मंत्रियों ने की छात्रों से वार्ता
आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत के लिए सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा की कमेटी बनाई गई है। रविवार को राजकीय अतिथिशाला में छात्रों के विभिन्न गुटों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत हुई। वार्ता में सरकार ने अपनी ओर से कई मांगों पर सहमति की जानकारी दी।

मंत्रियों ने छात्रों से आंदोलन समाप्त करने और सोमवार को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को रद्द कर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। मंत्री सुदिव्य कुमार के अनुसार, सरकार छात्रों की मांगों को लेकर गंभीर है और करीब 98 प्रतिशत मांगों पर सहमति बन चुकी है। हालांकि, छात्रों ने सभी मांगों पर लिखित आश्वासन की मांग की।
JPSC 14वीं परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाएं रद्द करने पर सहमति
सरकार ने JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2023 और बैकलॉग परीक्षा-2025 को रद्द करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा परीक्षा आयोजित कराने वाली TDPL एजेंसी से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की जांच कराने की बात भी कही गई है। सरकार का कहना है कि JPSC परीक्षा में अनियमितता की शिकायत सामने आने के बाद CID जांच शुरू की गई। जांच के दौरान कई जगह छापेमारी हुई और अब तक 19 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है। CID के ADG मनोज कौशिक ने कहा कि जांच में डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए गए हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
CGL रद्द करने की मांग पर सरकार ने जताई असमर्थता
छात्रों की सबसे प्रमुख मांगों में JSSC CGL परीक्षा रद्द करना शामिल है। सरकार ने इस मांग को मानने से इनकार करते हुए कहा कि CGL परीक्षा न्यायालय के निर्देशों के तहत हुई है। मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार अपने स्तर से परीक्षा रद्द करने में सक्षम नहीं है। हालांकि, सरकार ने परीक्षा से जुड़े आरोपों की जांच के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी से जांच कराने की बात कही है। छात्रों का कहना है कि केवल जांच का आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उनका मुख्य जोर परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने पर है।
CBI जांच पर भी नहीं बनी सहमति
आंदोलनकारी अभ्यर्थी JPSC और JSSC से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार ने CBI जांच की मांग स्वीकार नहीं की। सरकार ने कहा कि JPSC मामले की CID जांच चल रही है। वहीं, यदि जांच में वित्तीय लेन-देन या आर्थिक अनियमितता का मामला सामने आता है तो ED से जांच कराने की अनुशंसा की जा सकती है।
यही मुद्दा वार्ता टूटने की सबसे बड़ी वजहों में शामिल रहा।
सरकार के '98 प्रतिशत मांगें पूरी' दावे पर छात्रों का पलटवार
सरकार के 98 प्रतिशत मांगों पर सहमति के दावे को छात्रों ने सिरे से खारिज कर दिया।
छात्र नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार का यह दावा सही नहीं है। उनके अनुसार, छात्रों ने कुल 13 परीक्षाओं से जुड़ी मांगें रखी थीं, लेकिन सरकार ने इनमें से केवल तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताई है। छात्र नेताओं ने CID जांच को भी स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना जरूरी है।
10 अगस्त को विधानसभा घेराव, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
वार्ता के बाद छात्रों ने साफ कर दिया कि उनकी मांगें पूरी नहीं हुई हैं, इसलिए आंदोलन जारी रहेगा। अभ्यर्थियों ने सोमवार 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का कार्यक्रम जारी रखने की घोषणा की है। छात्र नेताओं ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से करने की अपील की है। वहीं, सरकार और प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे विधानसभा घेराव का कार्यक्रम रद्द कर वापस लौटें और बातचीत के जरिए समाधान निकालें।
विधानसभा के 750 मीटर दायरे में धारा 163 लागू
प्रस्तावित विधानसभा घेराव को देखते हुए रांची जिला प्रशासन ने नए विधानसभा परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में BNS की धारा 163 लागू की गई है। निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र में धरना, प्रदर्शन, जुलूस, रैली तथा बिना अनुमति के पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई है। प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की गई है।
परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रस्ताव
छात्र आंदोलन के बीच सरकार ने भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई बदलावों की जानकारी दी है। प्रस्तावित सुधारों के तहत:
JSSC की परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा।
प्री और मेन्स परीक्षा अलग-अलग आयोजित करने की व्यवस्था पर काम होगा।
परीक्षा को तीन पालियों में कराने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
प्रश्नपत्रों की अलग-अलग कॉपियों के जरिए सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी है।
परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र किस क्रम में जाएगा, इसकी जानकारी परीक्षा के दिन सुबह 5:30 बजे देने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
मेन्स परीक्षा को CBT यानी कंप्यूटर आधारित परीक्षा के माध्यम से कराने पर जोर दिया जा रहा है।
छात्रों के लॉगिन में उनके परीक्षा परिणाम और प्राप्त अंकों की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
विद्यार्थियों की सुविधा के लिए Student Facility Centre बनाने का प्रस्ताव है।
सरकार का कहना है कि इन सुधारों का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और अभ्यर्थियों के बीच विश्वास बहाल करना है।
सरकार की अपील बनाम छात्रों का आंदोलन
फिलहाल JPSC-JSSC विवाद में सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध बना हुआ है। सरकार जहां बातचीत के जरिए आंदोलन समाप्त करने और विधानसभा घेराव रद्द करने की अपील कर रही है, वहीं छात्र CGL परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
अब सबकी नजर 10 अगस्त के विधानसभा घेराव पर है। प्रशासन की सुरक्षा तैयारियों और छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना तथा छात्रों के साथ संवाद जारी रखना बड़ी चुनौती होगी।
CID समन के बाद आयोग के तीनों सदस्यों ने दिया इस्तीफा
झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितता और ओएमआर शीट में हेराफेरी के मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के इस्तीफे के बाद अब जेपीएससी के तीन सदस्यों डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने भी अपने पद से इस्तीफा देते हुए राज्यपाल को त्यागपत्र भेज दिया है। तीनों का ईस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। इन तीनों सदस्यों को झारखंड पुलिस की सीआईडी ने पूछताछ के लिए समन जारी किया था, जिसके बाद राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। सोमवार को डॉ. अजिता भट्टाचार्य से सीआईडी की पूछताछ होनी है।
जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा और अन्य परीक्षाओं के संचालन में बड़े पैमाने पर धांधली, ओएमआर शीट में छेड़छाड़ और अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराने के आरोपों की जांच सीआईडी कर रही है। इसी सिलसिले में सीआईडी ने आयोग की इन तीनों महिला व पुरुष सदस्यों (डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद) को अलग-अलग तारीखों पर पूछताछ के लिए बुलाया था। इससे पहले, जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते के कार्यालय व आवास पर सीआईडी की छापेमारी के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया था।
Anjala Kumar 



