टाटा संस में बड़ा बदलाव: एन चंद्रशेखरन ने दिया इस्तीफा, फरवरी 2027 तक संभालेंगे कमान

Tata Sons Chairman N Chandrasekaran Resigns: एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। वे फरवरी 2027 तक पद पर रहेंगे। कार्यकाल विस्तार, नए कारोबारों में निवेश और टाटा ट्रस्ट्स से मतभेदों के बीच यह बड़ा फैसला सामने आया है।

टाटा संस में बड़ा बदलाव: एन चंद्रशेखरन ने दिया इस्तीफा, फरवरी 2027 तक संभालेंगे कमान
टाटा ट्रस्ट्स से मतभेद के बीच बड़ा फैसला।

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     HighLights:

  • एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया
  • वे 20 फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे
  • पांच साल के नए कार्यकाल के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति नहीं बन पाई थी
  • टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद चर्चा में रहे

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) से ठीक पहले आया है। हालांकि, चंद्रशेखरन तत्काल पद नहीं छोड़ेंगे। वे अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करते हुए 20 फरवरी 2027 तक टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे।चंद्रशेखरन ने संकेत दिया है कि वे फरवरी 2027 के बाद अपने कार्यकाल के विस्तार की मांग नहीं करेंगे। उनके इस्तीफे को टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व में बड़े बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

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पांच साल के एक्सटेंशन पर नहीं बनी सहमति

एन. चंद्रशेखरन के मुताबिक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से उनके अगले पांच साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की गई थी। इस प्रस्ताव को टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड के सामने भी रखा गया था। यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने आया था, लेकिन बोर्ड के एक सदस्य के समर्थन नहीं देने के कारण इस पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी। इसके बाद करीब छह महीने तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं हो सका।

चंद्रशेखरन ने अपने इस्तीफे में कहा कि टाटा संस के कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट अहम मोड़ पर हैं। ऐसे में फरवरी 2027 के बाद कंपनी की कमान किसके हाथ में होगी, इसे लेकर समय रहते स्पष्टता जरूरी है। उनका कहना है कि कर्मचारियों, निवेशकों, कारोबार साझेदारों और अन्य हितधारकों के लिए नेतृत्व को लेकर स्पष्टता महत्वपूर्ण है।

इस्तीफे के पीछे क्या हैं बड़ी वजहें?

1. कार्यकाल बढ़ाने को लेकर मतभेद

चंद्रशेखरन के अगले पांच साल के कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस बोर्ड के भीतर मतभेद सामने आए। पांच साल के विस्तार के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी। यही विवाद उनके इस्तीफे की सबसे प्रमुख वजहों में माना जा रहा है।

2. नए कारोबारों में भारी निवेश और प्रदर्शन पर सवाल

चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने एविएशन, डिजिटल कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर और बैटरी जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। इनमें कुछ कारोबार अभी शुरुआती चरण में हैं और घाटे में चल रहे हैं। खास तौर पर एअर इंडिया के प्रदर्शन और नए कारोबारों में पूंजी लगाने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। वित्त वर्ष 2026 में एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा करीब ₹22,238 करोड़ बताया गया है। वहीं टाटा डिजिटल का घाटा करीब ₹4,974 करोड़ रहा। इन आंकड़ों को लेकर टाटा समूह की नई कारोबारी रणनीति पर चर्चा तेज हुई।

3. टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा

टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाए या इसे निजी कंपनी के रूप में ही रखा जाए, यह भी समूह के भीतर लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। टाटा ट्रस्ट्स के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आने की बात कही जाती रही है। टाटा संस की संभावित लिस्टिंग से समूह के नियंत्रण, शेयरहोल्डिंग और भविष्य की रणनीति पर व्यापक असर पड़ सकता है।

4. टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच तालमेल

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी है। इसलिए टाटा समूह के रणनीतिक और बड़े फैसलों में दोनों के बीच तालमेल बेहद महत्वपूर्ण है। नए कारोबारों में निवेश, पूंजी आवंटन, एअर इंडिया की रणनीति, टाटा संस की भविष्य की दिशा और चेयरमैन के कार्यकाल जैसे मुद्दों पर मतभेदों ने दोनों संस्थाओं के बीच संबंधों को चर्चा में ला दिया।

चंद्रशेखरन के 9 साल में कितना बदला टाटा ग्रुप?

एन. चंद्रशेखरन ने वर्ष 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने पारंपरिक कारोबारों के साथ-साथ कई नए और रणनीतिक क्षेत्रों में विस्तार किया।

रेवेन्यू में बड़ा इजाफा

वित्त वर्ष 2020 में टाटा ग्रुप का रेवेन्यू करीब ₹7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर करीब ₹16.24 लाख करोड़ पहुंच गया।

मुनाफे में भी बढ़ोतरी

ग्रुप का मुनाफा भी इस अवधि में करीब ₹32,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ तक पहुंचा।

लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप बढ़ा

टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप वित्त वर्ष 2020 में करीब ₹9.31 लाख करोड़ था, जो 2026 में बढ़कर लगभग ₹24.39 लाख करोड़ हो गया।

इस दौरान टाटा ग्रुप ने एविएशन सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत की। एअर इंडिया का अधिग्रहण, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, बैटरी और डिजिटल कारोबार में विस्तार चंद्रशेखरन के कार्यकाल के प्रमुख फैसलों में शामिल रहे।

टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में क्या अंतर है?

टाटा ग्रुप: टाटा नाम से संचालित अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों का व्यापक समूह टाटा ग्रुप कहलाता है। इसमें TCS, Tata Motors, Tata Steel, Tata Power और Air India जैसी कंपनियां शामिल हैं।

टाटा संस: यह टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी है। टाटा संस के पास समूह की कई प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी है और यह समूह की रणनीतिक दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

टाटा ट्रस्ट्स: यह टाटा से जुड़े परोपकारी और सामाजिक ट्रस्टों का समूह है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।

अब कैसे चुना जाएगा टाटा संस का नया चेयरमैन?

चंद्रशेखरन के कार्यकाल के बाद टाटा संस के नए चेयरमैन का चयन एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगा। इसके लिए चयन समिति संभावित उम्मीदवारों पर विचार करेगी। समिति में टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नामित सदस्य, टाटा संस बोर्ड का एक सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी सदस्य शामिल होते हैं। समिति संभावित उम्मीदवार के नाम की सिफारिश टाटा संस बोर्ड के सामने करेगी। इसके बाद बोर्ड उम्मीदवार की योग्यता, अनुभव और टाटा ग्रुप की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नियुक्ति पर फैसला करेगा। नए चेयरमैन के सामने टाटा ग्रुप के मौजूदा कारोबारों को मजबूत करने के साथ-साथ एअर इंडिया, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और डिजिटल कारोबार में किए गए बड़े निवेश से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने की चुनौती होगी।

इस्तीफे की खबर के बाद टाटा कंपनियों के शेयरों में गिरावट

एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद टाटा ग्रुप की कई लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। TCS, Tata Motors, Tata Steel और Tata Consumer के शेयरों में कारोबार के दौरान करीब 3% तक की गिरावट दर्ज किए जाने की खबर है। बाजार की नजर अब इस बात पर है कि टाटा संस की कमान किसे सौंपी जाती है और नया नेतृत्व समूह की मौजूदा विस्तार रणनीति को किस दिशा में ले जाता है।