JPSC-JSSC घोटाला: रिश्तेदारों की ‘सेटिंग’ से लेकर पेपर लीक तक, अभय तिवारी के खुलासों ने मचाई हलचल

JPSC-JSSC घोटाले में अभय तिवारी के कथित खुलासों से हड़कंप। JSSC CGL पेपर लीक, 12 लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी, FRO-ACF पदों पर लाखों की कथित बोली और रिश्तेदारों के चयन के आरोपों की CID जांच कर रही है।

JPSC-JSSC घोटाला: रिश्तेदारों की ‘सेटिंग’ से लेकर पेपर लीक तक, अभय तिवारी के खुलासों ने मचाई हलचल
अभय तिवारी और कई रिश्तेदारों के JSSC CGL में चयन।

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  • अभय तिवारी के कथित बयान से JSSC CGL पेपर लीक मामले में बड़ा दावा
  • 12 लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी लेने और 15 छात्रों को 65 सवाल रटाने का आरोप
  • FRO के लिए 20-25 लाख और ACF के लिए 30-35 लाख रुपये की कथित बोली
  • 20 अभ्यर्थियों से 5.80 करोड़ रुपये वसूले जाने का दावा

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नियुक्तियों को लेकर विवाद के बीच जेपीएससी मेधा घोटाले के मामले में गिरफ्तार अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज तिवारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीआईडी की जांच में सामने आए दावों के मुताबिक, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक, अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये की वसूली और कथित तौर पर रिश्तेदारों के चयन से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।

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अभय तिवारी को जेपीएससी की परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) का मार्केटिंग मैनेजर बताया गया है। सीआईडी ने उसे जेपीएससी मेधा घोटाले के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

एक परिवार के कई लोगों के चयन पर उठे सवाल

छात्रों के आंदोलन के दौरान जारी एक पोस्टर में अभय तिवारी के साथ उसके कई रिश्तेदारों के नाम और तस्वीरें प्रदर्शित की गई थीं। आरोप लगाया गया कि अभय तिवारी और उसके परिवार व रिश्तेदारी से जुड़े कई लोग जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में सफल हुए और इनमें कई वर्तमान में सरकारी पदों पर कार्यरत हैं। पोस्टर में अभय तिवारी के अलावा उसके भाई अक्षय तिवारी, भाई की पत्नी सुषमा कुमारी, साला, साली, ममेरे भाई उपेंद्र मिश्रा समेत कई रिश्तेदारों के नाम शामिल बताए गए हैं। कुछ नामों के साथ बीएसओ पद और रैंक का भी उल्लेख किया गया था।

अभय तिवारी के बारे में यह भी बताया गया है कि वह गोड्डा के पोड़ैयाहाट में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत था। उसके भाई अक्षय तिवारी के महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत होने और भाभी सुषमा कुमारी के निगरानी विभाग में पदस्थापित होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इन नियुक्तियों में किसी तरह की अनियमितता हुई या सभी अभ्यर्थी अपनी योग्यता के आधार पर सफल हुए, यह जांच का विषय है। सीआईडी कथित रिश्तेदारी और चयन के पूरे मामले का सत्यापन कर रही है।

12 लाख रुपये में पेपर लीक का दावा

सीआईडी के सामने दिए गए कथित बयान में अभय तिवारी ने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के प्रश्नपत्र और उत्तर से संबंधित गंभीर खुलासे किए हैं। आरोप के मुताबिक, परीक्षा से पहले प्रत्येक अभ्यर्थी से 12 लाख रुपये लिए गए। दावे के अनुसार, बोकारो में करीब 15 अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र से जुड़े 65 सवाल और उनके उत्तर रटाए गए थे। 15 अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 12-12 लाख रुपये की वसूली हुई, यानी कुल रकम करीब 1.80 करोड़ रुपये बताई गई है। अभय तिवारी के कथित बयान के मुताबिक, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में वह खुद भी सफल हुआ था और उसका रैंक 48 बताया गया है। उसके भाई अक्षय तिवारी और अक्षय की पत्नी सुषमा कुमारी के चयन का भी उल्लेख सामने आया है।

प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर उत्तर तक पहुंचने का आरोप

पूछताछ में कथित तौर पर अभय तिवारी ने बताया कि उसकी कंपनी टीडीपीएल को पहले जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में बायोमीट्रिक से जुड़ा काम मिलता था। कम दर पर काम करने से इनकार करने के बाद कंपनी को डी-इंपैनल किए जाने और बाद में परीक्षा संचालन का काम दूसरी एजेंसी को मिलने की बात भी सामने आई है।

आरोप है कि प्रश्नपत्र की छपाई और बायोमीट्रिक से जुड़े काम से जुड़े लोगों के माध्यम से अभय तिवारी तक प्रश्नपत्र और उत्तर पहुंचा। इसके बाद बोकारो में चयनित अभ्यर्थियों को कथित तौर पर सवाल और उत्तर याद करवाए गए। जांच एजेंसी अब इस पूरे दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि कर रही है कि प्रश्नपत्र वास्तव में कैसे लीक हुआ, किन लोगों की भूमिका थी और परीक्षा प्रक्रिया में कहां-कहां सेंधमारी हुई।

FRO के लिए 20-25 लाख, ACF के लिए 30-35 लाख की कथित बोली

अभय तिवारी के कथित बयान में वन विभाग से जुड़े पदों पर भी कथित पैसे के खेल का उल्लेख है। दावे के मुताबिक, FRO पद के लिए 20 से 25 लाख रुपये और ACF पद के लिए 30 से 35 लाख रुपये तक की रकम तय होने की बात कही गई। आरोप के अनुसार, FRO के 12 और ACF के 8 यानी कुल 20 अभ्यर्थियों को कथित तौर पर ‘सेट’ किया गया था। इनमें से 19 अभ्यर्थियों के सफल होने का दावा किया गया है। इन अभ्यर्थियों से कथित तौर पर कुल 5.80 करोड़ रुपये वसूले गए, जिसमें से करीब एक करोड़ रुपये अपने पास रखने की बात अभय तिवारी के कथित बयान में सामने आई है। यदि जांच में ये दावे सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी नियुक्तियों में कथित संगठित भ्रष्टाचार और बिचौलियों के नेटवर्क की ओर भी इशारा करेगा।

12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने का भी दावा

अभय तिवारी को लेकर यह भी दावा किया गया है कि उसने करीब 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं। इसी कारण छात्रों के बीच उसकी भूमिका को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि उसने रांची में होटल कारोबार से शुरुआत की थी। बाद में होटल और मैनपावर सप्लाई से जुड़े कारोबार के जरिए उसकी मुलाकात टीडीपीएल से जुड़े अधिकारियों से होने की बात कही गई है।सीआईडी अब उसके आर्थिक लेनदेन, संपत्ति, बैंक खातों, संपर्कों और सरकारी परीक्षाओं से जुड़े नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है।

होटल लीज पर लेने का भी खुलासा

जांच के दौरान कथित तौर पर यह जानकारी भी सामने आई कि अभय तिवारी ने सरकारी नौकरी में कथित ‘सेटिंग’ से कमाई गई रकम से होटल लीज पर लिया था। उसके ठिकानों से कुछ दस्तावेज और अन्य सामग्री मिलने की बात भी कही गई है। देवघर जिले के मारगोमुंडा प्रखंड के कुदारखोसो गांव निवासी अभय तिवारी के पारिवारिक और आर्थिक पृष्ठभूमि की भी जांच की जा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल—प्रतिभा या ‘सेटिंग’?

जेएसएससी सीजीएल में एक ही परिवार और रिश्तेदारी से जुड़े कई लोगों के सफल होने के आरोपों ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, पेपर लीक और करोड़ों रुपये की कथित वसूली के दावे मामले को और गंभीर बना रहे हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों और कथित स्वीकारोक्ति के अंतिम सत्य की पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। सीआईडी के सामने दिए गए बयान को भी जांच के दौरान स्वतंत्र साक्ष्यों से सत्यापित किया जाना जरूरी है।

अब निगाह इस बात पर है कि सीआईडी की जांच में अभय तिवारी के कथित नेटवर्क से जुड़े कितने लोगों की भूमिका सामने आती है और क्या जेपीएससी-जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में कथित ‘सेटिंग’ के आरोपों की पुष्टि करने वाले ठोस साक्ष्य मिलते हैं।