दिल्ली दंगा केस में बड़ा फैसला: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन को उम्रकैद

दिल्ली दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने हत्या को बेहद क्रूर बताते हुए दोषियों पर जुर्माना भी लगाया।

दिल्ली दंगा केस में बड़ा फैसला: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन को उम्रकैद
कोर्ट ने ताहिर हुसैन को सुनाई उम्रकैद की सजा।

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  • कोर्ट ने कहा- "अंकित को जानवरों की तरह मारा गया, शव नाले में फेंका गया"
  • हत्या, आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में दोषियों को सजा
  • अभियोजन ने मांगी थी फांसी, लेकिन कोर्ट ने उम्रकैद सुनाई
  • अलग-अलग धाराओं में जुर्माना भी लगाया गया

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk):  फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में दिल्ली की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। अदालत ने ताहिर हुसैन के साथ दोषी ठहराए गए नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी विभिन्न धाराओं में उम्रकैद और जुर्माने की सजा दी है।

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यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है, जिसमें आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की नृशंस हत्या कर दी गई थी। उनका शव 26 फरवरी 2020 को चांदबाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था।

कोर्ट ने हत्या को बताया बेहद क्रूर

सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अंकित शर्मा के साथ बेहद अमानवीय व्यवहार किया गया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि "अंकित शर्मा को जानवरों की तरह मारा गया और हत्या के बाद उनका शव नाले में फेंक दिया गया। यह ऐसा अपराध है जिसने पूरे समाज को झकझोर दिया।" हालांकि अदालत ने यह भी माना कि अभियोजन पक्ष इस मामले को "रेयरेस्ट ऑफ द रेयर" साबित करने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं कर सका।

अभियोजन ने मांगी थी फांसी

विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने अदालत में दलील दी थी कि यह हत्या पूरी तरह सुनियोजित, निर्मम और समाज में भय का वातावरण पैदा करने वाली थी। अभियोजन ने सभी दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग करते हुए कहा था कि ऐसे अपराधों में कठोरतम सजा ही उचित संदेश दे सकती है।

बचाव पक्ष ने दी थी ये दलील

दूसरी ओर बचाव पक्ष ने अदालत से कहा कि यह मामला "रेयरेस्ट ऑफ द रेयर" की श्रेणी में नहीं आता। दोषियों की पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कम सजा देने का अनुरोध किया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था और अब उम्रकैद की सजा सुनाई।

मौत की सजा क्यों नहीं दी गई?

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि दोषियों का पहले से हिंसक या आपराधिक इतिहास रहा है। रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि उन्हें सुधारना असंभव है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृत्युदंड देने पर कोई कानूनी रोक नहीं है, लेकिन किसी व्यक्ति का जीवन समाप्त करने का आदेश देने के लिए केवल भीड़ का हिस्सा होना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। इसके लिए और अधिक असाधारण परिस्थितियों का होना आवश्यक है।

अलग-अलग धाराओं में लगाया गया जुर्माना

अदालत ने ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों को हत्या, आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए उम्रकैद के साथ-साथ अलग-अलग धाराओं के तहत आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।

फैसले के बाद कोर्ट परिसर में भावुक माहौल

फैसला सुनाए जाने के बाद कोर्ट रूम में दोषियों के परिजन भावुक हो गए। कई परिजन रोने लगे और कोर्ट परिसर में एक महिला के बेहोश होने की भी सूचना सामने आई।

क्या है पूरा मामला?

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर हिंसा भड़क उठी थी। इसी दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे। अगले दिन उनका शव चांदबाग क्षेत्र के एक नाले से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया था। मामले की जांच के बाद पुलिस ने ताहिर हुसैन सहित कई लोगों के खिलाफ हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया था। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सभी प्रमुख आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अब उम्रकैद की सजा सुनाई है।

यह फैसला 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है और आने वाले समय में इससे जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई पर भी इसकी कानूनी और सामाजिक दृष्टि से अहम छाप पड़ सकती है।