धनबाद में BCCL पर लगा बड़ा आरोप, 10 हजार लोगों की सड़क काटने पर हाईकोर्ट में PIL
धनबाद के जहाजटांड़ में BCCL पर सार्वजनिक सड़क काटने और खनन सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन का आरोप लगा है। करीब 10 हजार ग्रामीणों के प्रभावित होने का दावा करते हुए झारखंड हाईकोर्ट में PIL दायर की गई है।
HighLights:
- जहाजटांड़ में सार्वजनिक सड़क काटने के आरोप पर झारखंड हाईकोर्ट में PIL दायर
- 21 अगस्त की रात 100 से अधिक लोगों से सड़क कटवाने का आरोप
- याचिका में BCCL पर खनन सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का भी गंभीर आरोप
- हाईकोर्ट से सड़क बहाली, DGMS जांच और स्वतंत्र जांच समिति की मांग
धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयलांचल में सार्वजनिक सड़क काटने और खनन सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन का मामला अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। धनबाद के जहाजटांड़ बस्ती से जुड़े इस मामले में निवासी खेमलाल महतो ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में BCCL और उसकी आउटसोर्सिंग एजेंसी पर बस्ती को जोड़ने वाली सार्वजनिक सड़क काटने का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि सड़क कटने से करीब 10 हजार ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हुई है। PIL में सड़क को तत्काल बहाल करने, सुरक्षित पक्की वैकल्पिक सड़क उपलब्ध कराने, DGMS से खनन क्षेत्र का निरीक्षण कराने और पूरे मामले की समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई है।
2015 में 1.65 करोड़ रुपये से बनी थी सड़क
याचिका में बताया गया है कि भौरा से जहाजटांड़ तक करीब 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से वर्ष 2015 में बनाई गई थी। इसके निर्माण पर करीब 1.65 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। याचिकाकर्ता के अनुसार, यह सड़क सरकारी योजना के तहत सार्वजनिक धन से बनी थी और आसपास के ग्रामीणों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम थी। ऐसे में आरोप है कि इसे बिना निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के काटना गंभीर मामला है। PIL में इसी आधार पर सड़क की स्थिति बहाल करने और ग्रामीणों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
2019 से लगातार मिल रहा था सड़क बनाने का आश्वासन
याचिका में दावा किया गया है कि सड़क विवाद को लेकर वर्ष 2019, 2020, 2021 और 2023 में अलग-अलग स्तर पर बैठकें और पत्राचार हुए। इन बैठकों में कथित तौर पर वैकल्पिक पक्की सड़क बनाने और मूल सड़क बहाल करने का आश्वासन दिया गया था। याचिका के मुताबिक, मामले में विधायक, अनुमंडल पदाधिकारी और BCCL के CMD स्तर तक बातचीत हुई, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्षों तक आश्वासन मिलने के बाद भी सड़क को लेकर स्थिति जस की तस बनी रही।
21 अगस्त की रात सड़क काटने का आरोप
PIL में सबसे गंभीर आरोप 21 अगस्त 2026 की रात सड़क काटे जाने को लेकर लगाया गया है। याचिका के अनुसार, रात करीब 11:30 बजे BCCL और उसकी आउटसोर्सिंग एजेंसी ने 100 से अधिक लोगों को लगाकर सड़क काट दी। आरोप है कि इस कार्रवाई से पहले न तो ग्रामीणों को उचित सूचना दी गई और न ही कोई सरकारी आदेश दिखाया गया। सड़क काटे जाने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
याचिका के अनुसार, इसके बाद कोयला ढुलाई भी कई दिनों तक प्रभावित रही। स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस और CISF की तैनाती करनी पड़ी। याचिका में यह भी कहा गया है कि धनबाद के मेयर ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था और सड़क बहाल होने तक परियोजना का काम रोकने की बात कही थी।
BCCL के साथ DGMS भी याचिका के दायरे में
मामला सिर्फ सड़क काटे जाने तक सीमित नहीं है। PIL में खनन सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि वैकल्पिक सड़क के किनारे 30 मीटर से अधिक ऊंचा ओवरबर्डन डंप मौजूद है, जिसकी ढलान लगभग 90 डिग्री बताई गई है। याचिका में इसे खनन सुरक्षा मानकों के विपरीत बताया गया है।
याचिका में Coal Mines Regulations-2017 के नियम 108 का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि अधिकतम ढलान और आवश्यक बेंचिंग से जुड़े प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है। इसके अलावा नियम 101 और 106 के तहत सड़क निर्माण और ओपनकास्ट खनन से जुड़े मानकों के कथित उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है।
नोट: ये सभी आरोप याचिका में किए गए दावे हैं। मामले में अदालत के अंतिम निष्कर्ष और संबंधित पक्षों का जवाब अलग विषय है।
DGMS पर भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप
याचिका में Directorate General of Mines Safety (DGMS) की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि सुरक्षा मानकों से जुड़े कथित उल्लंघनों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसी वजह से हाईकोर्ट से मांग की गई है कि संबंधित खनन क्षेत्र का तत्काल DGMS निरीक्षण कराया जाए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित गैर-अनुपालक खनन गतिविधियों को रोकने के लिए कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट से क्या-क्या मांगा गया?
PIL में हाईकोर्ट से कई महत्वपूर्ण राहत की मांग की गई है। इनमें प्रमुख रूप से—
जहाजटांड़ को जोड़ने वाली सार्वजनिक सड़क को तत्काल बहाल कराया जाए।
जब तक मूल सड़क बहाल नहीं होती, तब तक सुरक्षित पक्की वैकल्पिक सड़क उपलब्ध कराई जाए।
DGMS की टीम से मौके का तत्काल निरीक्षण कराया जाए।
सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित खनन गतिविधियों पर कार्रवाई की जाए।
सड़क काटे जाने की पूरी घटना की समयबद्ध जांच कराई जाए।
DGMS, जिला खनन पदाधिकारी और ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों वाली स्वतंत्र समिति गठित की जाए।
BCCL को सड़क और खनन गतिविधियों से जुड़े अनुपालन की समय-समय पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए।
भविष्य में प्रशासनिक अनुमति के बिना सार्वजनिक सड़क काटने पर रोक लगाने के लिए स्थायी निर्देश जारी किया जाए।
10 हजार ग्रामीणों की आवाजाही का सवाल
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर स्थानीय ग्रामीणों पर पड़ने का दावा किया गया है। याचिका में करीब 10 हजार लोगों के प्रभावित होने की बात कही गई है। ग्रामीण क्षेत्र में सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं होती, बल्कि स्कूल, अस्पताल, बाजार और रोजगार तक पहुंच का प्रमुख साधन भी होती है। ऐसे में सार्वजनिक सड़क काटे जाने और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा सीधे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ जाता है।
अब इस मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई और अदालत की ओर से दिए जाने वाले निर्देश पर सबकी नजर है। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत सड़क बहाली, खनन सुरक्षा और कथित नियम उल्लंघन को लेकर क्या रुख अपनाती है।




