सुप्रीम कोर्ट में हंगामा पड़ा भारी! CJI के खिलाफ अपशब्द, कोर्टरूम में कागज फेंकने पर लॉ छात्र समेत 2 गिरफ्तार
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी और कोर्टरूम में हंगामा करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने लखनऊ यूनिवर्सिटी के दो लॉ छात्रों को गिरफ्तार किया है। तिलक मार्ग थाने में FIR दर्ज कर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
HighLights:
- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा करने के मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी।
- CJI के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी और कोर्टरूम में कागज फेंकने का आरोप।
- तिलक मार्ग थाना में सुप्रीम कोर्ट सुरक्षा कर्मियों की शिकायत पर FIR दर्ज।
- पुलिस का दावा- जांच में सामने आए साजिश के संकेत, कई धाराओं में केस दर्ज।
- परिवार ने मानसिक तनाव और धोखाधड़ी के मामले को घटना की वजह बताया।
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कथित रूप से हंगामा करने, मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने और अदालत की कार्यवाही में बाधा डालने के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने लखनऊ यूनिवर्सिटी के दो लॉ छात्रों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में नई दिल्ली के तिलक मार्ग थाना में एफआईआर दर्ज की गई है।
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समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रबल प्रताप सिंह (24) और चंद्र भान (23) के रूप में हुई है। दोनों लखनऊ यूनिवर्सिटी में एलएलबी की पढ़ाई कर रहे हैं। पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा, शांति भंग करने समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
सुनवाई के दौरान कोर्टरूम में हुआ हंगामा
पुलिस के अनुसार, यह घटना 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर-13 में हुई थी। उस समय जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई चल रही थी। आरोप है कि प्रबल प्रताप सिंह, जो स्वयं अपना पक्ष रख रहे थे, सुनवाई के दौरान अचानक उत्तेजित हो गए। उन्होंने अदालत की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न किया, मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की और बेंच की ओर कागज फेंक दिए। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए उन्हें कोर्टरूम से बाहर निकाल दिया।
सुप्रीम कोर्ट सुरक्षा कर्मियों की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट सुरक्षा स्टाफ के बयान के आधार पर तिलक मार्ग थाना में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्य जुटाए। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिनसे यह आशंका बनी कि घटना पूर्व नियोजित भी हो सकती है। हालांकि इस पहलू की जांच अभी जारी है।
पहले हिरासत, फिर गिरफ्तारी
घटना के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की थी। प्रारंभिक पूछताछ के बाद मामला नई दिल्ली जिला पुलिस को सौंप दिया गया। विस्तृत जांच के बाद मंगलवार रात दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट
जानकारी के अनुसार प्रबल प्रताप सिंह इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उनकी मांग लखनऊ में दर्ज कराई जाने वाली एक एफआईआर से जुड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
परिवार ने मानसिक तनाव का किया दावा
प्रबल प्रताप के परिवार ने गिरफ्तारी के बाद कहा है कि वह लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। परिवार का आरोप है कि एक निजी कंपनी में कथित धोखाधड़ी, आर्थिक शोषण और वेतन नहीं मिलने के कारण वह परेशान थे। परिजनों का कहना है कि इसी मामले में न्याय की गुहार लगाने के लिए उन्होंने अदालत का रुख किया था। उनका दावा है कि घटना के बाद काफी समय तक परिवार को गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई।
परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की
प्रबल के पिता सुरेंद्र सिंह यादव ने बेटे पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। वहीं उनकी मां और बहनों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच तथा परिवार को कानूनी प्रक्रिया की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। ममेरे भाई रवि यादव के अनुसार, प्रबल का मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया है। परिवार का कहना है कि घटना से पहले वह लगातार मानसिक दबाव में थे।
पुलिस की जांच जारी
दिल्ली पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच सभी पहलुओं से की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, सुरक्षा कैमरों की फुटेज और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नोट: मामले में पुलिस और परिवार के दावे अलग-अलग हैं। पुलिस जहां अदालत की कार्यवाही में बाधा और आपत्तिजनक व्यवहार की जांच कर रही है, वहीं परिवार मानसिक तनाव और पूर्व विवादों को घटना का कारण बता रहा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है।




