Nepal Flood : 165 शव बरामद, 1,500 लापता; करीब 300 भारतीयों की तलाश, 21 भारतीयों समेत 116 का रेस्क्यू
नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही। नेपाल में 165 शव बरामद और 826 लोग लापता हैं। करीब 300 भारतीयों समेत नेपाल और तिब्बत में लगभग 1,500 लोगों की तलाश जारी है। ग्लेशियर-रॉक लैंडस्लाइड से आई इस आपदा में राहत और बचाव अभियान जारी है।
HighLights:
- नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से 165 शव बरामद, 826 लोग अभी भी लापता
- नेपाल और तिब्बत में कुल लापता लोगों की संख्या करीब 1,500 तक पहुंचने की आशंका
- नेपाल के विदेश मंत्री के मुताबिक करीब 300 भारतीय भी लापता
- तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में 558 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट
काठमांडू (Threesocieties.com Desk): नेपाल-चीन सीमा पर भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। रासुवा जिले के रसुवागढ़ी-टिमुरे इलाके से लेकर नुवाकोट, धादिंग और चितवन तक बाढ़ और मलबे ने घरों, सड़कों, पुलों तथा बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार गुरुवार सुबह तक 165 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 826 लोग अब भी लापता हैं। दूसरी ओर चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी सैकड़ों लोगों के लापता होने की सूचना है।
ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत को मिलाकर लापता लोगों की संख्या करीब 1,500 तक पहुंच सकती है। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया है कि लापता लोगों में करीब 300 भारतीय नागरिक भी हैं।
राहत और बचाव अभियान तेज, 21 भारतीयों समेत 116 लोग सुरक्षित निकाले गए
आपदा के बाद नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया है। खराब मौसम, टूटे रास्तों और जगह-जगह जमा मलबे के कारण अभियान में काफी मुश्किलें आ रही हैं। रसुवा के टिमुरे क्षेत्र में हेलीकॉप्टरों की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में अलग-अलग चरणों में 100 से अधिक लोगों को एयरलिफ्ट किए जाने की जानकारी है। अधिकारियों के मुताबिक बचाव अभियान लगातार जारी है और लापता लोगों की तलाश के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
करीब 300 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रियों की भी तलाश
नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाके से बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लापता होने की सूचना है। यह क्षेत्र कैलाश मानसरोवर यात्रा और तिब्बत जाने वाले यात्रियों के लिए प्रमुख मार्ग है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों में सैकड़ों यात्रियों के संपर्क से बाहर होने की बात सामने आई है। इनमें भारत समेत कई देशों के नागरिक शामिल हैं। अलग-अलग समय पर जारी सूचियों में भारतीयों की संख्या भी बदलती रही है।
गुरुवार को नेपाल के विदेश मंत्री की ओर से करीब 300 भारतीयों के लापता होने की जानकारी सामने आई।इससे पहले नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक सूची में 105 भारतीय और 37 एनआरआई समेत सैकड़ों यात्रियों के लापता होने की सूचना थी। जैसे-जैसे अलग-अलग जिलों और सीमा क्षेत्र से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं, लापता लोगों की संख्या में बदलाव हो रहा है।
तिब्बत में भी भारी तबाही, 550 से ज्यादा लोगों के लापता होने की रिपोर्ट
बाढ़ का असर नेपाल तक सीमित नहीं रहा। चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग काउंटी में भी भारी तबाही हुई है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार यहां 558 लोग लापता बताए गए हैं, जिनमें करीब 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। तिब्बत में भी मौतों की पुष्टि हुई है। इस तरह नेपाल और तिब्बत को मिलाकर लापता लोगों की संख्या करीब 1,500 तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि विभिन्न एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर है और बचाव अभियान जारी रहने के साथ यह संख्या बदल सकती है।
30 फीट तक उठी पानी और मलबे की लहर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बाढ़ इतनी अचानक और तेज थी कि लोगों को संभलने या सुरक्षित स्थान पर पहुंचने तक का मौका नहीं मिला। पानी के साथ भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा नीचे की ओर आया। कई जगह पानी की ऊंची लहरों ने घरों और कारोबारी प्रतिष्ठानों को अपनी चपेट में ले लिया। लोग जान बचाने के लिए घरों की ऊपरी मंजिलों और छतों पर चढ़ गए। सोशल मीडिया पर सामने आए और सत्यापित किए गए वीडियो में ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग के आसपास पानी और मलबे का भयावह बहाव दिखाई देता है।
भूकंप नहीं, ग्लेशियर-रॉक लैंडस्लाइड से आया विनाशकारी सैलाब
शुरुआत में इस घटना को भूकंप से जोड़कर देखा गया था। बुधवार सुबह नेपाल-चीन सीमा के पास भूकंप जैसे तेज झटके महसूस किए गए थे। शुरुआती रिपोर्टों में इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया गया। लेकिन बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) और अन्य वैज्ञानिक आकलनों से संकेत मिला कि यह सामान्य भूकंप नहीं था। पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा, जिससे भारी लैंडस्लाइड हुआ और मलबे का विशाल बहाव नदी में पहुंच गया। इसी प्रक्रिया से भूकंप जैसा भूकंपीय झटका पैदा हुआ।
प्रारंभिक उपग्रह विश्लेषण के मुताबिक ल्हेंदे खोला नदी के ऊपरी हिस्से में करीब 20 किलोमीटर दूर बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने से यह तबाही शुरू हुई। इसके बाद मलबे से भरा पानी भोटेकोशी नदी की ओर तेजी से बढ़ा और रास्ते में आने वाले इलाकों को तबाह करता चला गया।
एक झटके में उजड़ गए गांव, सड़क-पुल और बिजली परियोजनाएं तबाह
बाढ़ ने नेपाल के कई जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया है। सड़कें टूट गईं, पुल बह गए और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा। कई इलाकों में संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में पानी और मलबे के तेज बहाव ने निचले इलाकों तक तबाही पहुंचाई। चितवन तक शव मिलने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाढ़ का बहाव कितनी दूर तक गया।
चश्मदीदों ने सुनाई तबाही की दर्दनाक कहानी
बाढ़ से बचने वाले लोगों ने बताया कि उन्हें अचानक तेज आवाज और पानी-मलबे का सैलाब दिखाई दिया। कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका कीचड़ और पानी से भर गया। एक घायल बुजुर्ग ने बताया कि मलबे का बहाव उनके घर की तरफ तेजी से बढ़ा। उन्होंने अपनी पत्नी को बचाने की कोशिश की और छत की ओर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन तेज बहाव में पत्नी बह गई। कई अन्य लोगों ने पेड़ों और ऊंची जगहों का सहारा लेकर अपनी जान बचाई। इन दर्दनाक घटनाओं के बीच राहतकर्मी अब मलबे में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं। अधिकारियों को आशंका है कि कई लोग अब भी मलबे और कीचड़ के नीचे दबे हो सकते हैं।
बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती बना खराब मौसम
नेपाल के पहाड़ी इलाके में लगातार खराब मौसम राहत एवं बचाव अभियान के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई सड़कें और पुल टूट जाने के कारण जमीनी रास्ते बंद हैं। ऐसे में हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों तक भोजन, दवाइयां और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।बचाव एजेंसियां लापता लोगों की सूची तैयार करने के साथ-साथ बरामद शवों की पहचान भी कर रही हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट सूचनाओं के बजाय सरकारी एजेंसियों से जारी जानकारी पर भरोसा करें।
तिब्बत में झील को लेकर भी बढ़ी चिंता
चीनी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों में ग्यिरोंग क्षेत्र में एक झील से जुड़े संभावित खतरे का भी उल्लेख किया गया है। बाढ़ और मलबे के कारण पहाड़ी क्षेत्र में जलस्रोतों की स्थिति को लेकर प्रशासन सतर्क है। इससे बचाव कार्य और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
लगातार बदल रहे हैं आंकड़े
नेपाल-तिब्बत सीमा की इस आपदा में सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई इलाकों से अभी संपर्क पूरी तरह बहाल नहीं हुआ है। इसी कारण मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है। गुरुवार सुबह नेपाल की आधिकारिक रिपोर्ट में 165 शव बरामद और 826 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई। वहीं तिब्बत में 558 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है। ऐसे में दोनों क्षेत्रों को मिलाकर लापता लोगों की संख्या करीब 1,500 बताई जा रही है।
फिलहाल पूरा फोकस मलबे में फंसे लोगों को निकालने, लापता भारतीयों समेत विदेशी नागरिकों का पता लगाने और प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने पर है। अधिकारियों को आशंका है कि तलाशी अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।




