AIIMS Deoghar Convocation: डॉक्टर डिग्री नहीं, सेवा और संवेदना को बनाएं धर्म:उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने देवघर एम्स के दीक्षांत समारोह में डॉक्टरों से निष्ठा, ईमानदारी और संवेदना के साथ मरीजों की सेवा करने की अपील की। जानें मेडिकल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और 11 मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान से जुड़ी पूरी खबर।

AIIMS Deoghar Convocation: डॉक्टर डिग्री नहीं, सेवा और संवेदना को बनाएं धर्म:उपराष्ट्रपति
देवघर एम्स के दीक्षांत समारोह में 11 मेधावी विद्यार्थियों को मिला सम्मान।

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  • उपराष्ट्रपति ने युवा डॉक्टरों को सेवा, निष्ठा, ईमानदारी और दया का संदेश दिया।
  • कहा- डॉक्टर जरूरतमंद लोगों का सबसे बड़ा भरोसा हैं, इसलिए सामाजिक दायित्व निभाना जरूरी 
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को बताया अहम कड़ी
  • देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 380 से बढ़कर 846 और एमबीबीएस की सीटें 51 हजार से बढ़कर 1.39 लाख हुई

देवघर (Threesocieties.com Desk): एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवा डॉक्टरों को चिकित्सा पेशे के मूल उद्देश्य की याद दिलाते हुए कहा कि डॉक्टरों को सिर्फ डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि निष्ठा, ईमानदारी, दया और संवेदना के साथ मरीजों की सेवा को अपना धर्म बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों के लिए डॉक्टर सबसे बड़ा भरोसा होते हैं, क्योंकि कई बार किसी मरीज का जीवन समय पर मिलने वाले उपचार और चिकित्सक के फैसले पर निर्भर करता है। ऐसे में चिकित्सा पेशे से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को अपने सामाजिक दायित्व को समझना चाहिए।

शनिवार को आयोजित समारोह में उपराष्ट्रपति ने मेडिकल विद्यार्थियों, चिकित्सकों और अन्य उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी विकसित समाज की बुनियाद होती हैं। चिकित्सा शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। डॉक्टरों को अपने ज्ञान और कौशल का इस्तेमाल जरूरतमंदों, गरीबों, ग्रामीण आबादी और वंचित समुदायों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में करना चाहिए। समारोह में एमबीबीएस, नर्सिंग और एमडी-एमएस के विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। वहीं, 11 मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष सम्मान और पदक से सम्मानित किया गया।

विकसित भारत के लक्ष्य में स्वास्थ्य व्यवस्था अहम कड़ी

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। स्वस्थ नागरिक ही देश के सामाजिक, आर्थिक और वैज्ञानिक विकास में प्रभावी योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में समाज को लाभ पहुंचाने की क्षमता है, लेकिन चिकित्सा शिक्षा का प्रभाव सीधे तौर पर लोगों के जीवन और स्वास्थ्य पर दिखाई देता है। एक डॉक्टर किसी मरीज का इलाज करके न केवल उसकी जिंदगी बचा सकता है, बल्कि उसके पूरे परिवार को भी संकट से उबार सकता है।

उपराष्ट्रपति के अनुसार, एम्स जैसी संस्थाएं देश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं और बेहतर मेडिकल शिक्षा के विस्तार में अहम योगदान दे रही हैं। इन संस्थानों का उद्देश्य केवल बड़े शहरों में आधुनिक इलाज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाना भी है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था जरूरी है, जिसमें आम नागरिक को बेहतर उपचार के लिए अनावश्यक रूप से दूर-दराज के शहरों का रुख नहीं करना पड़े।

देवघर एम्स पूर्वी भारत के लिए साबित होगा महत्वपूर्ण

उपराष्ट्रपति ने एम्स देवघर की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान झारखंड के साथ-साथ पूरे पूर्वी भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। बेहतर चिकित्सा सुविधाओं, मेडिकल शिक्षा और शोध के माध्यम से यह क्षेत्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि पहले गंभीर बीमारियों के इलाज और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के लिए लोगों को दिल्ली जैसे बड़े शहरों तक जाना पड़ता था। अब देवघर में एम्स जैसी संस्था उपलब्ध होने से इस क्षेत्र के मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।

छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना समय की आवश्यकता है। इस दिशा में नए एम्स संस्थानों की स्थापना महत्वपूर्ण कदम है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश में देवघर समेत विभिन्न स्थानों पर स्थापित एम्स संस्थान क्षेत्रीय विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि एम्स देवघर आने वाले वर्षों में इलाज, चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।

मेडिकल कॉलेजों की संख्या 380 से बढ़कर 846 हुई

देश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पहले भारत में 380 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 846 हो गई है। उन्होंने एमबीबीएस और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में सीटों की बढ़ती संख्या को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पहले देश में एमबीबीएस की कुल 51 हजार सीटें थीं, जो अब बढ़कर 1.39 लाख हो गई हैं। इसी तरह, पीजी मेडिकल शिक्षा की सीटें पहले 31 हजार थीं, जो बढ़कर 86 हजार हो गई हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का विस्तार देश की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। अधिक मेडिकल कॉलेजों और सीटों से डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, चिकित्सा क्षेत्र की सफलता केवल डॉक्टरों की संख्या तक सीमित नहीं है। मरीजों को समय पर उपचार, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, आधुनिक उपकरण और संवेदनशील व्यवहार उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए इन सभी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।

डॉक्टरों की पढ़ाई में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी महिला सशक्तीकरण का संकेत

उपराष्ट्रपति ने मेडिकल शिक्षा में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में छात्राओं की बढ़ती संख्या महिला सशक्तीकरण और शिक्षा के क्षेत्र में बदलते अवसरों को दर्शाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों को समाज के प्रति जिम्मेदारी के रूप में देखने की अपील की। डिग्री प्राप्त करना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन इसके बाद वास्तविक चुनौती अपने ज्ञान को व्यावहारिक जीवन में उतारने और मरीजों को बेहतर उपचार देने की होती है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा पेशे में सफलता के लिए तकनीकी दक्षता के साथ धैर्य, सहानुभूति और जिम्मेदारी की भावना भी जरूरी है। मरीज और उनके परिजन अक्सर कठिन परिस्थितियों से गुजरते हैं। ऐसे समय में डॉक्टर का व्यवहार और संवाद भी उपचार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।

AI और आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण, लेकिन मानवीय स्पर्श की जगह नहीं ले सकती

आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग पर चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि तकनीक चिकित्सा क्षेत्र को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे जांच, रोग की पहचान, उपचार की योजना और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार के अवसर पैदा होते हैं। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक चाहे कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, वह मानवीय स्पर्श और संवेदना की जगह नहीं ले सकती। चिकित्सा पेशे में मरीज की स्थिति को समझना, उसकी चिंताओं को सुनना और उसे भरोसा देना बेहद जरूरी है। डॉक्टरों को आधुनिक तकनीक का लाभ उठाने के साथ अपने मानवीय दृष्टिकोण को भी बनाए रखना चाहिए।उपराष्ट्रपति का यह संदेश चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीकी ज्ञान और मानवीय संवेदना का संतुलन निर्णायक भूमिका निभाएगा।

ड्रोन से दूरस्थ क्षेत्रों तक दवाइयां पहुंचाने की पहल की सराहना

एम्स देवघर की आधुनिक पहल का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने सुदूर और जनजातीय क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से दवाइयां और आपातकालीन चिकित्सा सामग्री पहुंचाने के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती है। कई बार भौगोलिक परिस्थितियों और परिवहन की सीमाओं के कारण मरीजों को दवाइयां, जांच और आपातकालीन सहायता समय पर नहीं मिल पाती। ऐसी परिस्थितियों में तकनीक आधारित पहल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं। ड्रोन के माध्यम से जरूरी चिकित्सा सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है। एम्स देवघर की यह पहल आधुनिक तकनीक को जनसेवा से जोड़ने का उदाहरण है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि चिकित्सा संस्थानों की भूमिका अस्पताल परिसर तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें समाज की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप नए समाधान तलाशने चाहिए।

इलाज के साथ शोध के क्षेत्र में भी अहम भूमिका

उपराष्ट्रपति ने कहा कि एम्स देवघर इलाज के साथ चिकित्सा शोध के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। किसी भी आधुनिक चिकित्सा संस्थान के लिए मरीजों का उपचार, नई चिकित्सा पद्धतियों का अध्ययन और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर शोध करना आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एम्स देवघर आने वाले समय में झारखंड और पूर्वी भारत के लिए चिकित्सा सेवाओं तथा शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि मेडिकल संस्थानों को विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण देना चाहिए, जहां वे नई तकनीकों को सीखने के साथ चिकित्सा क्षेत्र की चुनौतियों को समझ सकें। शोध और नवाचार के माध्यम से उपचार की गुणवत्ता बेहतर बनाने तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रभावी समाधान खोजने में मदद मिल सकती है।

नर्सिंग और पैरामेडिकल कर्मी स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम कड़ी

नर्सिंग और पैरामेडिकल की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में ये कर्मचारी मरीजों की देखभाल और उपचार प्रक्रिया की पहली और अहम कड़ी होते हैं। अस्पतालों में मरीजों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने, डॉक्टरों के साथ समन्वय स्थापित करने और उपचार के दौरान देखभाल सुनिश्चित करने में नर्सिंग तथा पैरामेडिकल कर्मियों की बड़ी भूमिका होती है।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपने पेशे के प्रति समर्पित रहने और मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार करने का संदेश दिया। बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए डॉक्टरों के साथ-साथ प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का योगदान भी जरूरी है।

11 मेधावी छात्र-छात्राओं को मिला विशेष सम्मान

एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में मेडिकल क्षेत्र में अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इस दौरान एमबीबीएस, नर्सिंग और एमडी-एमएस के विद्यार्थियों ने अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के महत्वपूर्ण पड़ाव को हासिल किया। समारोह में 11 मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष सम्मान और पदक प्रदान किए गए। यह सम्मान विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों और मेहनत को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।

उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए प्रेरित किया। चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश करने वाले इन युवाओं के सामने अब मरीजों की सेवा, पेशेवर दक्षता बनाए रखने और समाज के प्रति दायित्व निभाने की चुनौती होगी। दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि चिकित्सा पेशे में नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का प्रतीक भी है।

भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू और तिलका मांझी के योगदान को किया याद

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने झारखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू और तिलका मांझी के त्याग एवं योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इन महान व्यक्तित्वों ने साहस, स्वाभिमान, हौसले और संघर्ष की प्रेरणा दी। उनके जीवन से सीख लेकर युवा पीढ़ी को अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहना चाहिए। देवघर में आयोजित इस समारोह के दौरान स्थानीय सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी सामने आया। उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को अपने पेशे के माध्यम से समाज की सेवा करने और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आने की प्रेरणा दी।

विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने का संकल्प लेने की अपील

उपराष्ट्रपति ने बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में आने को अपने लिए सौभाग्य की बात बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी सफलता में योगदान देने वाले शिक्षकों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करें। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित लोगों से शिक्षकों और अभिभावकों के सम्मान में तालियां बजाने का आग्रह किया। उन्होंने विद्यार्थियों और अन्य उपस्थित लोगों को नशे से दूर रहने का संकल्प भी दिलाया। उनका संदेश था कि स्वस्थ जीवन, अनुशासन और सकारात्मक सोच व्यक्तिगत विकास के साथ समाज के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

समारोह में कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित

एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा और देवघर के विधायक सुरेश पासवान उपस्थित थे। इसके अलावा एम्स देवघर की अध्यक्ष एमवी पद्मा श्रीवास्तव तथा तथा एम्स देवघर के निदेशक सह सीईओ प्रो. डॉ. नितिन एम. गंगने सहित अन्य गणमान्य लोग भी समारोह में शामिल हुए।