हरियाणा: हरियाणा: पहले वाली कांग्रेस नहीं रही, रास्ते से भटक गई है: भूपेंद्र सिंह हुड्डा

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  • हरियाणा में कांग्रेस टूट की ओर ?
  • हुड्ड़ा ने रोहतक में आयोजित की 'परिवर्तन महारैली'
  • देश हित में किया आर्टिकल 370 को हटाने का स्वागत
  • देशहित और राष्ट्र के मामलों से समझौता नहीं
रोहतक:

हरियाणा में कांग्रेस टूट की ओर अग्रसर है. कभी भी एक्स सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपनी अलग पार्टी बना सकते हैं. हुड्डा ने रविवार को रोहतक में आयोजित की 'परिवर्तन महारैली' में इसके संकेत दे दिये. 'परिवर्तन महारैली' में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके गुट के ही ज्यादातर नेता मौजूद रहे. हुड्डा ने कहा कि मैं यहां सारी चीजों से मुक्त होकर अपनी बात कहने आया हूं. हरियाणा में कांग्रेस से अलग होने का संकेत देते हुए कहा आज खुद को अतीत से मुक्त करता हूं. मुझे नेताओं व रैली में मौजूद लोगों द्वारा कोई भी फैसला लेने का जो अधिकार दिया है उसके लिए मैं एक कमेटी का गठन करुंगा. कमेटी की सलाह पर इस बारे में कोई भी फैसला लूंगा. भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस अब वह नहीं जो हुआ करती थी, रास्ते से भटक गई है.उन्होंने कहा कि वह आर्टिकल 370 को हटाये जाने के पक्ष में थे जबकि कांग्रेस के कई नेता इसके खिलाफ थे. जब सरकार कुछ सही करती है तो मैं उनका समर्थन करता हूं. मेरे कई साथियों ने आर्टिकल 370 को हटाने का विरोध किया, मेरी पार्टी रास्ते से भटक गई है. यह वह कांग्रेस नहीं है, जो हुआ करती थी. जब बात स्वाभिमान और देशभक्ति की आती है तो मैं किसी पर भी समझौता नहीं कर सकता. हरियाणा सरकार को देना होगा 5 सालों का हिसाब उन्होंने कहा कि मैं आर्टिकल 370 को हटाने का समर्थन करता हूं लेकिन मैं हरियाणा सरकार को बताना चाहता हूं कि आपको जवाब देना होगा कि आपने पिछले पांच साल में क्या किया, इस फैसले के पीछे छिपिए मत. हमारे हरियाणा के भाई कश्मीर में सिपाही के रूप में ड्यूटी पर हैं इसलिए मैंने इसका समर्थन किया. हुड्डा ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ऐलान किया कि अगर हम सरकार बनाते हैं तो आंध्र प्रदेश की तरह एक कानून बनायेंगे, जिसके तहत 75 पर्सेंट नौकरियां हरियाणा के लोगों के लिए ही होंगी. अगर वह सीएम बने तो 4 डेप्युटी सीएम बनायेंगे. एक ओबीसी, एक अनुसूचित जाति , एक ब्राह्मण व एक अन्य किसी वर्ग से. आज हरियाणा बर्बादी की ओर है. आज किसान तबाही की ओर है और बेरोजगारी बढ़ रही है. हुड्डा ने कहा, मैं 72 साल का हो गया हूं और रिटायर होना चाहता था, लेकिन हरियाणा की हालत देखकर संघर्ष का फैसला किया देशहित से ऊपर कुछ नहीं. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद हटाने का हमारे (कांग्रेस) कु्छ नेताओं ने विरोध किया, यह सही नहीं था. मैंने देशहित के इस निर्णय का समर्थन किया. उन्होंने कहा, मेरे परिवार की चार पीढि़यों कांग्रेस से जुड़ी रही है. हमने कांग्रेस के लिए जी जान से मेहतन की, लेकिन अब कांग्रेस पहले वाली नहीं रही. 370 पर कांग्रेस कुछ भटक गई, लेकिन देशभक्ति और स्वाभिमान का मैं किसी से समझौता नहीं करूंगा, इसीलिए मैंने 370 हटाने का समर्थन किया. उन्होंने कहा, उसूलों के लिए टकराना भी जरूरी है, जिंदा हो तो जिंदा दिखना जरूरी है. भूपेंद्र हुड्डा के बेटे व एक्स एमपी दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हम प्यार, विकास और बढ़ोतरी के रास्ते पर चलते हैं और पिछले पांच सालों में बीजेपी ने बेरोजगारी, दंगों और असहिष्णुता का रास्ता दिखाया है. आज हमारे पास एक मौका है कि हम हरियाणा की राजनीति को उस दिशा में ले जाएं, जो हरियाणा का विकास कर सके. रैली में हुड्डा समर्थक करीब 13 एमएलए, कई एक्स एमएलए सहित हरियाणा के कई सीनीयर कांग्रेस लीडर मौजूद थे. रैली से पहले ही कयास लगाये जा रहे थे हुड्डा कांग्रेस से अलग राह की ओर कदम बढ़ा सकते हैं. रैली में कहीं भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी का फोटो व कांग्रेस का चुनाव चिन्ह नजर नहीं आया.हुड्डा ने जिस तरह अपनी ही पार्टी को कटघरे में खड़ा किया, उससे उन अटकलों को बल मिल रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले हुड्डा नई पार्टी बना सकते हैं. रोहतक रैली में हुड्डा इसका ऐलान नहीं करने के पीछे हुड्डा की संभवतः दबाव की रणनीति है. फिलहाल उन्होंने पार्टी आलाकमान को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अगर उन्हें सूबे में पार्टी की कमान नहीं दी जाती और फ्री हैंड नहीं दिया जाता तो वह अलग राह चुन सकते हैं.