IIT ISM का कमाल: अब सूखे पत्तों से बनेगी पोषक जैविक खाद, किसानों को भी मिलेगा लाभ

IIT (ISM) Dhanbad और संसार ग्रीन सूखे पत्तों को जैविक खाद में बदलेंगे। पहल से पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की सेहत और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

IIT ISM का कमाल: अब सूखे पत्तों से बनेगी पोषक जैविक खाद, किसानों को भी मिलेगा लाभ
IIT-ISM की अनोखी पहल: सूखे पत्तों से बनेगी जैविक खाद, सुधरेगी मिट्टी।

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  • IIT ISM Dhanbad सूखे पत्तों को जैविक खाद में बदलने की तैयारी में
  • संस्थान के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन के साथ मिलकर शुरू होगी पहल
  • सूखे पत्तों को जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण पर लगेगी रोक
  • पहल से सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकॉनमी को मिलेगा बढ़ावा

धनबाद (Threesocieties.com Desk): पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। संस्थान अपने इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन के साथ मिलकर पेड़ों से गिरने वाले सूखे और बेकार पत्तों को पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदलने की तैयारी कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य सूखे पत्तों को जलाने या कचरे के रूप में फेंकने के बजाय उनका वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करना है।

इस परियोजना के जरिए एक तरफ जहां सूखे पत्तों से होने वाले कचरे का बेहतर प्रबंधन किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर मिट्टी की सेहत सुधारने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए उपयोगी खाद तैयार की जाएगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रिसोर्स रिकवरी और सर्कुलर इकॉनमी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सूखे पत्ते कचरा नहीं, उपयोगी जैविक संसाधन

आईआईटी (आईएसएम) के संस्थागत परिसर और सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी मात्रा में पेड़ों से सूखे पत्ते गिरते हैं। आम तौर पर इन पत्तों को या तो जला दिया जाता है या फिर कचरे के साथ फेंक दिया जाता है। पत्तों को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जबकि उन्हें बिना उचित प्रक्रिया के फेंक देने से उनमें मौजूद ऑर्गेनिक मैटर का उपयोग नहीं हो पाता। प्रस्तावित परियोजना के तहत इन सूखे पत्तों को वैज्ञानिक तरीके से डीकंपोज किया जाएगा। इसके बाद उनमें आवश्यक ऑर्गेनिक न्यूट्रिएंट्स और लाभकारी माइक्रोऑर्गेनिज्म मिलाकर पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद तैयार की जाएगी।

IIT (ISM) और संसार ग्रीन मिलकर करेंगे काम

परियोजना को लेकर हुई रणनीतिक चर्चा में आईआईटी (आईएसएम) के डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस प्रो. आलोक कुमार दास, संसार ग्रीन के डायरेक्टर राजीव सिंह, धनबाद की जिला कृषि पदाधिकारी अंजना और आईआईटी (आईएसएम) के सहायक कुलसचिव मृण्त्युंजय शर्मा शामिल हुए।

प्रो. आलोक कुमार दास ने कहा कि आईआईटी (आईएसएम) पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के इनोवेटिव समाधान को लगातार बढ़ावा देता रहा है। उन्होंने कहा कि सूखे पत्ते वास्तव में कचरा नहीं, बल्कि ऑर्गेनिक मैटर का एक अच्छा स्रोत हैं। इन्हें उपयोगी खाद में बदलकर वेस्ट मैनेजमेंट और सॉयल हेल्थ, दोनों में सुधार किया जा सकता है।

कैंपस से लेकर खेतों तक होगा इस्तेमाल

इस परियोजना के तहत तैयार होने वाली जैविक खाद का इस्तेमाल कई स्तरों पर किया जा सकेगा। इसका उपयोग कैंपस गार्डन, नर्सरी, प्लांटेशन, लैंडस्केपिंग, ऑर्गेनिक खेती और सॉयल रेस्टोरेशन में किया जा सकेगा। इसके अलावा तैयार खाद को किसानों, गार्डनर्स, नर्सरी संचालकों और आम लोगों को भी उपलब्ध कराने की योजना है। इससे जैविक खाद की उपलब्धता बढ़ेगी और लोग रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैविक खाद का इस्तेमाल कर सकेंगे।

दूसरे संस्थानों के लिए मॉडल तैयार करने की योजना

आईआईटी (आईएसएम) का लक्ष्य सिर्फ अपने कैंपस में सूखे पत्तों का इस्तेमाल करना नहीं है, बल्कि ऐसा मॉडल विकसित करना है जिसे दूसरे संस्थान भी अपनाया जा सके। इस मॉडल को विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, उद्योगों, हाउसिंग सोसाइटी और नगर निकायों में लागू करने की संभावना है। ऐसा होने पर बड़ी मात्रा में निकलने वाले बायोडिग्रेडेबल वेस्ट को कचरा मानने के बजाय उपयोगी संसाधन में बदला जा सकेगा। इससे कचरे के निपटारे की समस्या कम होने के साथ पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

संसार ग्रीन उठाएगा ऑपरेशनल खर्च

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत परियोजना के लिए आवश्यक मशीनरी, उपकरण, मानव संसाधन, उत्पादन और अन्य ऑपरेशनल खर्च संसार ग्रीन द्वारा वहन किया जाएगा। वहीं आईआईटी (आईएसएम) खाद के उत्पादन और भंडारण के लिए आवश्यक स्थान उपलब्ध कराएगा।यह साझेदारी संस्थान की रिसर्च और इनोवेशन क्षमता को स्टार्टअप की व्यावसायिक विशेषज्ञता से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों को भी फायदा

सूखे पत्तों से जैविक खाद तैयार करने की यह पहल कई स्तरों पर लाभ पहुंचा सकती है। पत्तों को जलाने की जरूरत कम होने से वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। वहीं जैविक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी में ऑर्गेनिक मैटर और पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर हो सकती है।आईआईटी (आईएसएम) को उम्मीद है कि यह पहल आगे चलकर ऑर्गेनिक फार्मिंग, सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट, रिसोर्स रिकवरी और सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने वाला एक उपयोगी मॉडल साबित होगी। अगर यह मॉडल बड़े स्तर पर लागू होता है, तो शहरों और संस्थानों से निकलने वाले सूखे पत्तों को कचरे के बजाय खेती और हरियाली के लिए उपयोगी संसाधन में बदला जा सकेगा।