BCCL जमीन विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्रधान जिला जज का आदेश रद्द

धनबाद के सरायढेला में 11 डिसमिल जमीन विवाद पर झारखंड हाईकोर्ट ने प्रधान जिला जज का आदेश रद्द कर दिया। मामले में नए सिरे से सुनवाई और जरूरत पड़ने पर जमीन की दोबारा मापी का निर्देश दिया गया है।

BCCL जमीन विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्रधान जिला जज का आदेश रद्द
BCCL जमीन विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला।

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  • सरायढेला की 11 डिसमिल जमीन विवाद में झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला
  • हाईकोर्ट ने प्रधान जिला जज, धनबाद का 7 अगस्त 2023 का आदेश रद्द किया
  • मामला नए सिरे से सुनवाई के लिए अपीलीय अदालत में भेजा गया
  • उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार और जरूरत पड़ने पर दोबारा जमीन मापी का निर्देश
  • दोनों पक्षों को 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे अदालत में उपस्थित होना होगा

रांची/धनबाद (Threesocieties.com Desk): झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद के सरायढेला मौजा में 11 डिसमिल जमीन से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने जमीन खरीदार तपेश्वर सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए प्रधान जिला जज, धनबाद के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें उनकी अपील खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए अपीलीय अदालत में वापस भेज दिया है।

अदालत ने निर्देश दिया है कि मामले में उपलब्ध दस्तावेजों पर विधिवत विचार किया जाए। साथ ही, यदि जरूरत महसूस हो तो दोनों पक्षों की मौजूदगी में विवादित जमीन की दोबारा मापी और सीमांकन कराया जाए, ताकि जमीन की वास्तविक स्थिति और सीमा स्पष्ट हो सके।हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े दोनों पक्षों को 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे प्रधान जिला जज, धनबाद की अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला

मामला धनबाद के सरायढेला मौजा स्थित खाता संख्या 90 और प्लॉट संख्या 84 की 11 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता तपेश्वर सिंह के अनुसार उन्होंने वर्ष 2004 में रजिस्टर्ड सेल डीड के माध्यम से उक्त जमीन खरीदी थी। जमीन की खरीद के बाद उनके नाम पर म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज हुआ। जमीन का लगान भी उनके नाम से जमा किया गया। इसके अलावा मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MADA) की ओर से मकान निर्माण के लिए नक्शा भी स्वीकृत किया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि इन दस्तावेजों से उनके जमीन पर अधिकार का दावा स्पष्ट होता है। हालांकि, बाद में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की ओर से इस जमीन पर अपना दावा किया गया।

BCCL ने जमीन पर जताया दावा

BCCL का दावा है कि विवादित जमीन उसके द्वारा भू-अर्जन केस संख्या 7/65-66 के तहत अधिग्रहित जमीन का हिस्सा है। कंपनी के अनुसार याचिकाकर्ता ने BCCL की जमीन पर अतिक्रमण किया है। इसके बाद मामला एस्टेट ऑफिसर के समक्ष पहुंचा। तपेश्वर सिंह की ओर से विवादित जमीन की मापी और सीमांकन कराने की मांग की गई थी। हालांकि, उनकी मांग स्वीकार नहीं की गई। एस्टेट ऑफिसर ने 22 जून 2017 को जमीन पर कथित अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया। इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने अपील दायर की थी।

प्रधान जिला जज के आदेश को हाईकोर्ट ने किया रद्द

एस्टेट ऑफिसर के आदेश के खिलाफ दायर अपील को प्रधान जिला जज, धनबाद ने 7 अगस्त 2023 को खारिज कर दिया था। इसके बाद तपेश्वर सिंह ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि एस्टेट ऑफिसर के समक्ष जमीन से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। इनमें सेल डीड, म्यूटेशन आदेश, लगान रसीद, MADA की ओर से नक्शा स्वीकृति पत्र, BCCL का पत्र और जमीन की मापी से संबंधित दस्तावेज शामिल थे। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इसके बावजूद अपीलीय अदालत के आदेश में यह टिप्पणी की गई कि याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया था।

रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

हाईकोर्ट ने इस बिंदु पर गौर करते हुए कहा कि अपीलीय अदालत की यह टिप्पणी रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों के विपरीत है। अदालत के अनुसार, मामले में कई दस्तावेज रिकॉर्ड पर मौजूद थे, इसलिए उनकी समुचित जांच और विचार किया जाना आवश्यक था। हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि प्लॉट संख्या 84 कुल 44 डिसमिल का है। इसी प्लॉट में से 11 डिसमिल जमीन को लेकर दोनों पक्षों के दावे सामने आए हैं। एक ओर BCCL इस 11 डिसमिल हिस्से को अपने द्वारा अधिग्रहित जमीन का हिस्सा बता रहा है, जबकि दूसरी ओर तपेश्वर सिंह इसी हिस्से को वर्ष 2004 में खरीदी गई जमीन बता रहे हैं।

जमीन की मापी से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

हाईकोर्ट ने माना कि जब दोनों पक्ष एक ही जमीन के हिस्से पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं, तब विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति और सीमा स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है। इसी वजह से अदालत ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए अपीलीय अदालत में भेज दिया। अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने का निर्देश दिया है। साथ ही जरूरत पड़ने पर दोनों पक्षों की मौजूदगी में जमीन की दोबारा मापी और सीमांकन कराने को कहा गया है। इस आदेश के बाद अब मामले की सुनवाई फिर से प्रधान जिला जज, धनबाद की अदालत में होगी।

5 अक्टूबर को दोनों पक्षों को होना होगा उपस्थित

हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार मामले से जुड़े दोनों पक्षों को 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे प्रधान जिला जज, धनबाद की अदालत में उपस्थित होना है। अब आगे की सुनवाई में जमीन से जुड़े दस्तावेजों, पूर्व के रिकॉर्ड और जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच महत्वपूर्ण होगी। जरूरत पड़ने पर मौके पर मापी और सीमांकन भी कराया जा सकता है। इस तरह सरायढेला की 11 डिसमिल जमीन को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद में हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की दोबारा सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।