झारखंड शराब घोटाला: CBI जांच की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंचे बाबूलाल मरांडी, ACB पर लगाए गंभीर आरोप
झारखंड शराब घोटाले में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड हाईकोर्ट में CBI जांच की मांग करते हुए PIL दायर की। ACB पर 14 महीने तक चार्जशीट दाखिल नहीं करने और 14 आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिलने के आरोप लगाए गए हैं।
- झारखंड शराब घोटाले की CBI जांच की मांग को लेकर बाबूलाल मरांडी ने हाईकोर्ट में PIL दायर की
- ACB पर 14 महीने तक चार्जशीट दाखिल नहीं करने का आरोप
- चार्जशीट में देरी के कारण 17 में से 14 आरोपियों को मिली डिफॉल्ट बेल
- शराब नीति, टेंडर प्रक्रिया और प्लेसमेंट एजेंसियों की भूमिका पर उठाए सवाल
- IAS अधिकारियों समेत कई हाई-प्रोफाइल लोगों की संलिप्तता का आरोप
रांची (Threesocieties.com): झारखंड के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले को लेकर सियासी और कानूनी लड़ाई अब नए दौर में पहुंच गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग करते हुए झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में राज्य सरकार, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और शराब नीति की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मरांडी ने अदालत से आग्रह किया है कि राज्य एजेंसी की जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
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'छत्तीसगढ़ मॉडल' की शराब नीति पर सवाल
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2022 में झारखंड सरकार ने छत्तीसगढ़ मॉडल के आधार पर नई शराब नीति लागू की थी, जो शुरू से ही विवादों में रही। आरोप लगाया गया है कि फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर कुछ पसंदीदा प्लेसमेंट एजेंसियों को करोड़ों रुपये के ठेके दिए गए। इसके अलावा शराब की बोतलों पर होलोग्राम उपलब्ध कराने वाली कंपनी, मैनपावर सप्लाई एजेंसी और थोक शराब कारोबार से जुड़ी कंपनियों की भूमिका को भी संदेह के घेरे में बताया गया है। मरांडी का दावा है कि इन प्रक्रियाओं से राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ।
ACB की जांच पर उठे गंभीर सवाल
याचिका में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। बाबूलाल मरांडी का कहना है कि वर्ष 2025 में मामला दर्ज होने के बाद करीब 14 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई। उनका आरोप है कि जांच एजेंसी ने जानबूझकर देरी की, जिससे कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हुई और आरोपियों को राहत मिल गई।
14 आरोपियों को मिली डिफॉल्ट बेल
मरांडी ने अदालत को बताया कि समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण गिरफ्तार किए गए 17 आरोपियों में से 14 को डिफॉल्ट बेल मिल गई। इनमें तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे और संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। याचिका के अनुसार, विनय कुमार चौबे को गिरफ्तारी के 92 दिन बाद भी आरोप पत्र दाखिल नहीं होने के कारण डिफॉल्ट बेल मिली। मरांडी का आरोप है कि एसीबी का रवैया निष्पक्ष जांच के बजाय आरोपियों को संरक्षण देने वाला रहा।
IAS अधिकारियों समेत कई रसूखदारों का जिक्र
जनहित याचिका में दावा किया गया है कि शराब घोटाले के तार शासन-प्रशासन के शीर्ष स्तर तक जुड़े हुए हैं। इसमें कई प्रभावशाली व्यक्तियों और आईएएस अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक बताई गई है। मरांडी ने अदालत से कहा है कि यदि मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी को नहीं सौंपी गई तो पूरे घोटाले की सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी और सरकारी राजस्व को हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर भी स्पष्ट नहीं होगी।
अब हाईकोर्ट के फैसले पर नजर
इस जनहित याचिका के दाखिल होने के बाद अब सभी की निगाहें झारखंड हाईकोर्ट पर टिकी हैं। अदालत इस मामले में राज्य सरकार और एसीबी से जवाब मांग सकती है। यदि अदालत सीबीआई जांच पर विचार करती है तो यह झारखंड के सबसे चर्चित कथित शराब घोटाले की जांच को नया मोड़ दे सकता है।
नोट: यह मामला फिलहाल न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और जांच के परिणामों के बाद ही तय होंगे।




