झारखंड: मर्यादा सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए क्यों? जयराम के समर्थन में बाबूलाल, पुलिस पर उठाए तीखे सवाल
Jairam Mahato-Dhanbad Police Row: जयराम महतो-बरवाअड्डा थाना प्रभारी विवाद में बाबूलाल मरांडी ने पुलिस एसोसिएशन और सरकार पर सवाल उठाए। पूछा- मर्यादा सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए क्यों?
HighLights:
- जयराम महतो-बरवाअड्डा थाना प्रभारी विवाद पर बाबूलाल मरांडी ने दी प्रतिक्रिया
- पूछा- मर्यादा और शिष्टाचार का नियम क्या सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए है?
- पुलिस एसोसिएशन की भूमिका पर भी नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल
धनबाद (Threesocieties.com Desk): Dhanbad Police–Jairam Mahato Row: डुमरी विधायक और जेएलकेएम के संस्थापक जयराम महतो तथा बरवाअड्डा थाना प्रभारी के बीच कथित बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। मामले में पुलिस एसोसिएशन की ओर से लगातार दिए जा रहे बयानों के बीच झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी खुलकर सामने आए हैं।
विधानसभा सदस्य और थाना प्रभारी के बीच हॉट-टॉक के बाद पुलिस एसोसिएशन से लेकर तरह-तरह के बयान सामने आ रहे हैं। अच्छी बात है कि भाषा, शिष्टाचार और मर्यादा बनी रहनी चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मर्यादा सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए है?
— Babulal Marandi (@yourBabulal) August 26, 2026
क्या पुलिस एसोसिएशन ने उस गालीबाज दारोग़ा… https://t.co/Dho40JwWzv
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर पूरे विवाद को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बातचीत में भाषा, शिष्टाचार और मर्यादा का होना जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या मर्यादा का नियम सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए ही लागू होता है? उनकी इस टिप्पणी को जयराम महतो के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, मरांडी ने अपने बयान में पुलिस और जनप्रतिनिधि दोनों के लिए समान रूप से मर्यादा और शिष्टाचार की जरूरत पर जोर दिया।
पुलिस एसोसिएशन से बाबूलाल का सीधा सवाल
बाबूलाल मरांडी ने पुलिस एसोसिएशन की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या पुलिस एसोसिएशन ने कभी किसी ऐसे दरोगा या पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिसने आम लोगों के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया हो? उन्होंने सवाल उठाया कि आम नागरिक से बातचीत के दौरान पुलिसकर्मियों के व्यवहार और भाषा को लेकर क्या कभी पुलिस एसोसिएशन ने सार्वजनिक रूप से नसीहत या निंदा की है। मरांडी का कहना है कि अगर जनप्रतिनिधियों के व्यवहार और भाषा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो पुलिसकर्मियों के आचरण को लेकर भी समान मानदंड लागू होना चाहिए।
चास थाना प्रभारी के कथित गाली-गलौज का मामला फिर उठा
नेता प्रतिपक्ष ने अपने बयान में बोकारो जिले के चास थाना प्रभारी से जुड़ा कथित गाली-गलौज वाला ऑडियो भी याद दिलाया। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले इस मामले का ऑडियो वायरल हुआ था। बाबूलाल मरांडी के मुताबिक, उस समय उन्होंने सरकार से मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की थी। उनका आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय सरकार ने ऐसे पुलिस अधिकारियों को संरक्षण देने का काम किया। इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुलिस अधिकारी के कथित अभद्र व्यवहार को लेकर कोई कार्रवाई नहीं होती, तो फिर जनप्रतिनिधियों के मामले में अलग मानदंड क्यों अपनाया जाए?
'क्या पुलिस को गाली देने का विशेषाधिकार मिला है?'
बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में बेहद तीखे अंदाज में सवाल उठाया कि अगर आम व्यक्ति द्वारा किसी को गाली देना अपराध माना जाता है, तो पुलिस को जनता के साथ अपशब्दों का इस्तेमाल करने का कौन-सा विशेषाधिकार मिला है?
उन्होंने सवाल किया कि "यह विशेषाधिकार आखिर किसने दिया?"
मरांडी ने कहा कि थानों में आम लोगों के साथ कथित अभद्र व्यवहार, फोन पर गाली-गलौज और दुर्व्यवहार की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों को भी जनता से बातचीत करने का तरीका और शिष्टाचार सीखना होगा।
बातचीत रिकॉर्ड करने और वायरल करने पर भी सवाल
जयराम महतो और थाना प्रभारी के विवाद के संदर्भ में बाबूलाल मरांडी ने बातचीत रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने को लेकर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि बिना सहमति किसी व्यक्ति से हुई बातचीत को रिकॉर्ड कर सार्वजनिक करना क्या उसकी निजता का उल्लंघन नहीं है? उनका सवाल था कि क्या निजता से जुड़े कानून सिर्फ आम लोगों के लिए हैं या पुलिसकर्मियों पर भी समान रूप से लागू होते हैं? हालांकि, किसी विशेष मामले में रिकॉर्डिंग की वैधता और आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित तथ्यों और कानून के आधार पर ही किया जा सकता है।
जयराम महतो विवाद में बढ़ी राजनीतिक गर्मी
बरवाअड्डा थाना प्रभारी और डुमरी विधायक जयराम महतो के बीच कथित तीखी बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। एक ओर पुलिस एसोसिएशन ने विधायक के कथित व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर बाबूलाल मरांडी ने पुलिस के आचरण और एसोसिएशन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।इससे विवाद अब केवल विधायक और थाना प्रभारी के बीच कथित विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। मामला पुलिस आचरण, जनप्रतिनिधियों की मर्यादा, निजता और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे बड़े सवालों से जुड़ गया है।
सरकार पर भी निशाना
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर थानों में आम लोगों के साथ अभद्र भाषा और दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आती हैं और ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो इसका असर पुलिस और जनता के रिश्ते पर पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की नीति और कथित संरक्षण के कारण ऐसे हालात पैदा हो रहे हैं। उनका कहना है कि व्यवस्था में सुधार के लिए केवल निलंबन जैसी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि जहां अपराध बनता हो वहां प्राथमिकी दर्ज कर कानून के अनुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए।
'पुलिस को पहले जनता से बात करना सीखना होगा'
बाबूलाल मरांडी ने जोर देकर कहा कि पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है और इसके लिए जनता के साथ संवाद में शिष्टाचार बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पुलिसकर्मियों के कथित अभद्र व्यवहार के मामलों में निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए। मरांडी के बयान के बाद जयराम महतो-बरवाअड्डा थाना विवाद ने झारखंड की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है। अब देखना होगा कि इस पूरे मामले में सरकार और पुलिस विभाग की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
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