मजदूर की बेटी ने रचा इतिहास: धनबाद की पूनम बनी NEET जिला टॉपर, सरकार उठाएगी MBBS की पूरी पढ़ाई का खर्च

धनबाद के भूदा बस्ती की दिहाड़ी मजदूर की बेटी पूनम कुमारी ने NEET-UG 2026 में 582 अंक और 99.1375 परसेंटाइल हासिल कर जिला टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया। जिला प्रशासन उनकी MBBS की पूरी पढ़ाई का खर्च उठाएगा। जानिए संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी।

मजदूर की बेटी ने रचा इतिहास: धनबाद की पूनम बनी NEET जिला टॉपर, सरकार उठाएगी MBBS की पूरी पढ़ाई का खर्च
दिहाड़ी मजदूर की बेटी का कमाल: NEET में शानदार सफलता।

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        HighLights:

  • धनबाद की पूनम कुमारी ने NEET-UG 2026 में 582 अंक और 99.1375 परसेंटाइल हासिल किए
  • ऑल इंडिया रैंक 16,972 के साथ जिले की टॉपर बनीं पूनम
  • दिहाड़ी मजदूर की बेटी की मेडिकल पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगा जिला प्रशासन
  • सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की छात्रा रह चुकी हैं पूनम, 12वीं में भी 97.4% अंक लाकर बनी थीं जिला टॉपर

धनबाद (Threesocieties.com Desk): कहते हैं कि सपनों की कोई कीमत नहीं होती, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए हिम्मत, मेहनत और अवसर की जरूरत होती है। धनबाद के भूदा बस्ती की रहने वाली पूनम कुमारी ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। दिहाड़ी मजदूर की बेटी पूनम ने NEET-UG 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 582 अंक, 99.1375 परसेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक 16,972 हासिल कर जिले का नाम रोशन कर दिया है।

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पूनम की सफलता केवल एक परीक्षा में अच्छे अंक लाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल है, जो हजारों युवाओं को प्रेरित करेगी। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया और अब उनका सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है।

मजदूर पिता की बेटी ने लिखी सफलता की नई कहानी

पूनम के पिता धरमू गोराई दिहाड़ी मजदूर हैं और परिवार का पालन-पोषण मजदूरी करके करते हैं। उनकी मां पीपू देवी गृहिणी हैं। सीमित आय और कठिन परिस्थितियों के बावजूद माता-पिता ने बेटी की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। पूनम ने भी अपने माता-पिता के त्याग और संघर्ष को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। उन्होंने पढ़ाई को ही अपना लक्ष्य बनाया और लगातार मेहनत कर आज यह मुकाम हासिल किया।

12वीं में भी बनी थीं जिला टॉपर

पूनम एसएसएलएनटी सीएम उत्कृष्ट गर्ल्स विद्यालय (सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस) की छात्रा रही हैं। इससे पहले उन्होंने सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा में 97.4 प्रतिशत अंक हासिल कर धनबाद जिला टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया था। अब NEET में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि उनकी सफलता कोई संयोग नहीं, बल्कि लगातार मेहनत का परिणाम है।

सरकार उठाएगी मेडिकल की पूरी पढ़ाई का खर्च

पूनम की उपलब्धि से प्रभावित होकर उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन ने मंगलवार को समाहरणालय में उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान उपायुक्त ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप पूनम की मेडिकल कॉलेज में दाखिले से लेकर डॉक्टर बनने तक की पूरी पढ़ाई का खर्च जिला प्रशासन उठाएगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभाशाली छात्र-छात्रा की शिक्षा में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। प्रशासन ऐसे विद्यार्थियों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

मुख्यमंत्री ने भी दी बधाई

NEET का परिणाम घोषित होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पूनम को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री की इस पहल और जिला प्रशासन की घोषणा ने यह संदेश दिया है कि राज्य सरकार प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस ने बदली जिंदगी

पूनम ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मुख्यमंत्री की शिक्षा संबंधी पहल को दिया। उन्होंने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनका नामांकन सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में हुआ, जहां उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सीबीएसई पैटर्न पर पढ़ाई और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन मिला। यही माहौल उनके सपनों को नई दिशा देने में सबसे बड़ा सहारा बना।

कार्डियोलॉजिस्ट बनना है सपना

पूनम का लक्ष्य सिर्फ डॉक्टर बनना नहीं है। वह भविष्य में कार्डियोलॉजिस्ट बनकर हृदय रोगियों का इलाज करना चाहती हैं। उनका कहना है कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों की सेवा करना उनका सबसे बड़ा सपना है। वे चाहती हैं कि आर्थिक तंगी किसी भी मरीज के इलाज में बाधा न बने।

हजारों युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

पूनम की सफलता यह साबित करती है कि यदि मेहनत, सही मार्गदर्शन और परिवार का सहयोग मिले तो आर्थिक अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकता। आज उनकी उपलब्धि पर परिवार, स्कूल, शिक्षक और पूरा धनबाद गर्व महसूस कर रहा है। उनकी कहानी उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।