JPSC पेपर सेटिंग सिंडिकेट का बड़ा खुलासा! CID ने 5 और दबोचे, पूर्व अध्यक्ष का कंप्यूटर ऑपरेटर भी गिरफ्तार

JPSC परीक्षा घोटाला मामले में CID ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर, तीन अभ्यर्थियों और TDPL कर्मचारी समेत अब तक 19 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। जानिए रांची से सामने आए इस बड़े खुलासे की पूरी रिपोर्ट।

JPSC पेपर सेटिंग सिंडिकेट का बड़ा खुलासा! CID ने 5 और दबोचे, पूर्व अध्यक्ष का कंप्यूटर ऑपरेटर भी गिरफ्तार
JPSC घोटाले में CID का बड़ा एक्शन।

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  • तीन अभ्यर्थी और परीक्षा एजेंसी TDPL का कर्मचारी भी गिरफ्तार
  • दलालों के जरिए अभ्यर्थियों से वसूली और रिजल्ट में हेरफेर का खुलासा
  • OMR शीट, मार्कशीट, मूल प्रमाण पत्र और डिजिटल साक्ष्य बरामद
  • अब तक JPSC मेधा घोटाला मामले में कुल 19 गिरफ्तारियां

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित मेधा घोटाले और परिणाम में हेरफेर की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम को एक और बड़ी सफलता मिली है। बुधवार को सीआईडी ने पांच नए आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें तीन अभ्यर्थी, परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) का एक कर्मचारी तथा जेपीएससी के एक पूर्व अध्यक्ष का कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल है।

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इन गिरफ्तारियों के साथ ही JPSC परीक्षा घोटाले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है। CID का दावा है कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

मंगलवार रात पकड़े गए थे तीन मुख्य दलाल

इससे पहले मंगलवार देर रात सीआईडी ने इस पूरे नेटवर्क के तीन कथित मुख्य दलालों (सोर्स एजेंट) उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि ये लोग सीधे अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे और नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनसे भारी रकम तथा शैक्षणिक दस्तावेज जुटाते थे। इसके बाद यह रकम और दस्तावेज परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी TDPL तक पहुंचाए जाते थे, जहां से पूरे नेटवर्क का संचालन होने की आशंका जताई जा रही है।

रिमांड में खुला बड़ा नेटवर्क

सीआईडी अधिकारियों के अनुसार, रिमांड पर पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं। जांच में पता चला कि गिरफ्तार दलालों के संबंध TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी से जुड़े हुए थे। पूछताछ के दौरान इंटर-स्टेट नेटवर्क के भी संकेत मिले हैं। इसी इनपुट के आधार पर सीआईडी ने कार्रवाई तेज करते हुए रांची में छापेमारी कर तीनों दलालों को गिरफ्तार किया।

डिजिटल साक्ष्यों ने खोले कई राज

सीआईडी की छापेमारी में आरोपियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए गए हैं। बरामद सामग्री में शामिल हैं—

अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र
OMR शीट्स
मार्कशीट
परीक्षा संबंधी गोपनीय दस्तावेज
मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण
परिणाम में हेरफेर से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड

जांच एजेंसी का मानना है कि इन साक्ष्यों से पूरे रैकेट की कार्यप्रणाली और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

22 जुलाई को दर्ज हुई थी प्राथमिकी

सीआईडी ने इस मामले में 22 जुलाई 2026 को CID थाना कांड संख्या 16/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद से लगातार छापेमारी, पूछताछ और गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए साक्ष्य सामने आ रहे हैं और पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलती जा रही हैं।

और बढ़ सकती है गिरफ्तारियों की संख्या

सीआईडी सूत्रों के मुताबिक, जांच अभी शुरुआती चरण से आगे बढ़ चुकी है। डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच जारी है और कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। एजेंसी को उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में कुछ और प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। यदि ऐसा होता है तो JPSC परीक्षा घोटाला झारखंड की सबसे बड़ी भर्ती अनियमितताओं में से एक साबित हो सकता है।

CID की जांच पर सबकी नजर

JPSC परीक्षा में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर पूरे राज्य की नजर टिकी हुई है। हजारों अभ्यर्थी जांच के अंतिम निष्कर्ष और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। सीआईडी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

झारखंड में JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर फूट पड़ा है। राजधानी रांची में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी और छात्र संगठनों के कार्यकर्ता जुटे और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और लंबित भर्तियों को निष्पक्ष तरीके से पूरा कराने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर छात्रों को आगे बढ़ने से रोका। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इसके बावजूद छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे और कहा कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता नहीं आती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

आखिर क्यों भड़का है छात्र आंदोलन?

झारखंड में पिछले कुछ वर्षों से JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों, परीक्षा संचालन में अनियमितताओं और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी ने हजारों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। इसी पृष्ठभूमि में एक बार फिर छात्र संगठनों ने राज्यव्यापी आंदोलन का आह्वान किया। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों का समय और आर्थिक संसाधन लगाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवालों का समय पर समाधान नहीं होने से युवाओं का विश्वास कमजोर हुआ है।