न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का बड़ा संदेश: ‘भारत के DNA में एकता और विविधता’, बोले- मुस्लिम विरोधी सोच रखने वाला हिंदू नहीं हो सकता

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 5 हजार से ज्यादा लोगों को संबोधित किया। बोले- भारत के DNA में एकता और विविधता है, मुस्लिम विरोधी सोच हिंदू विचार नहीं।

न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का बड़ा संदेश: ‘भारत के DNA में एकता और विविधता’, बोले- मुस्लिम विरोधी सोच रखने वाला हिंदू नहीं हो सकता
RSS प्रमुख ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में प्रवासी भारतीयों को किया संबोधित।

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      Highlights:

  • न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय मूल के अमेरिकी कार्यक्रम में शामिल
  • ‘भारत के DNA में एकता और विविधता’—मोहन भागवत
  • ‘भारत में कोई मुस्लिम न रहे’ सोचने वाला हिंदू नहीं हो सकता
  • सही सोच इंसान को भगवान के करीब, गलत सोच जानवरों के करीब ले जाती है

न्यूयॉर्क (Threesocieties.com Desk): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत की एकता, विविधता, मानवता और धार्मिक सह-अस्तित्व पर जोर दिया। कार्यक्रम में 5,000 से ज्यादा भारतीय मूल के अमेरिकी शामिल हुए। आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) की ओर से किया गया।

अपने करीब 42 मिनट के संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि एकता और विविधता भारत के DNA में है। भारत की परंपरागत सोच विविधताओं के बीच एकता को स्वीकार करती है। उन्होंने कहा कि लोग अलग-अलग दिख सकते हैं, उनके रहने और सोचने के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी के बीच एक जन्मजात जुड़ाव मौजूद है।

‘भारत में कोई मुस्लिम न रहे’ सोचने वाला हिंदू नहीं हो सकता

मोहन भागवत ने धार्मिक सह-अस्तित्व पर स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यदि कोई स्वयं को हिंदू मानता है तो उसे यह स्वीकार करना होगा कि अलग-अलग रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं और प्रत्येक इंसान की गरिमा समान है। इंसानों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। भागवत ने कहा कि वह धर्म के विद्वान या धार्मिक अथॉरिटी नहीं हैं, लेकिन ऐसे समाज में काम करते हैं जो परंपरागत रूप से मानता है कि धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है।

सत्य एक, उसे समझने और बताने के तरीके अलग

RSS प्रमुख ने कहा कि सत्य एक ही है, लेकिन उसे समझने और व्यक्त करने वाला व्यक्ति अपनी क्षमता और समझ के अनुसार उसे अलग-अलग तरीके से प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि इंसान अपने दिमाग में बने उस ‘सॉफ्टवेयर’ से प्रभावित होता है, जो उसके विचारों और समझ को आकार देता है। यही वजह है कि एक ही सत्य को अलग-अलग लोग अलग नजरिए से देख सकते हैं। भागवत ने कहा कि दुनिया में कई धर्म हैं और आज धर्मों को बड़े पैमाने पर उनके कर्मकांडों के आधार पर परिभाषित किया जाता है। धार्मिक अनुशासन के माध्यम से व्यक्ति ईश्वरत्व की ओर बढ़ने का प्रयास करता है।

सही सोच इंसान को भगवान के करीब ले जाती है

मोहन भागवत ने कहा कि सोचने की क्षमता इंसान के लिए एक बड़ा वरदान है। सही सोच इंसान को भगवान के करीब ले जाती है, जबकि गलत सोच उसे जानवरों के करीब ले जाती है। उन्होंने कहा कि समाज को लगातार शिक्षित और जागरूक नहीं किया जाए तो उसमें विचलन पैदा होने लगता है। इतिहास में भी ऐसा हुआ और इसके बाद समाज तथा देश को विदेशी आक्रमणों का सामना करना पड़ा और बहुत कुछ खोना पड़ा।

 धर्म सिर्फ पूजा नहीं, जीवन को संतुलित रखने का नियम

मोहन भागवत ने कहा कि भारत में जिस सिद्धांत को ‘धर्म’ कहा जाता है, उसे केवल पूजा-पद्धति या किसी धार्मिक पहचान तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। धर्म ऐसी व्यवस्था है जो जीवन और समाज को संतुलित रखने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि पैसा, सामान और भौतिक सुविधाएं हमेशा खुशी और संतुष्टि नहीं दे सकतीं। भौतिक सुख अस्थायी होता है। बहुत सारी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद व्यक्ति के भीतर संतुष्टि की कमी रह सकती है।

अमेरिका कर्मभूमि है, उसके प्रति रहें सच्चे

अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि उनकी पहली जिम्मेदारी अपनी कर्मभूमि के प्रति है। जिस देश में वे रहते हैं, उसके प्रति ईमानदार और वफादार रहना चाहिए। भागवत ने भारतीय जीवन-दर्शन के चार चरणों—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास—का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जीवन में पहले सीखना, फिर परिवार और समाज की जिम्मेदारी संभालना और बाद में अपने अनुभव अगली पीढ़ी तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है। RSS प्रमुख ने कहा कि वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब व्यक्ति, समाज और पर्यावरण तीनों की भलाई को साथ लेकर चला जाए। विकास के नाम पर न व्यक्ति को दबाया जाना चाहिए और न ही समाज या पर्यावरण की अनदेखी होनी चाहिए।

रक्षाबंधन के मौके पर हुआ ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित यह कार्यक्रम रक्षाबंधन के अवसर पर हुआ। आयोजकों ने इसे एक ऐतिहासिक समारोह के तौर पर प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में 30 देशों से करीब 180 धार्मिक नेताओं के शामिल होने की बात कही गई। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक भारतीय लोक कला की प्रस्तुतियों से हुई। इसमें भारतीय मूल के हजारों अमेरिकी नागरिकों के साथ भारत के राजदूत और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि की भी मौजूदगी रही।

टाइम्स स्क्वायर पर दिखीं मोहन भागवत की तस्वीरें

मोहन भागवत के कार्यक्रम से पहले न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध टाइम्स स्क्वायर पर लगे बिलबोर्ड पर उनकी तस्वीरें भी प्रदर्शित की गईं। RSS के शताब्दी वर्ष के वैश्विक जनसंपर्क अभियान के तहत भागवत अमेरिका पहुंचे हैं। भागवत 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। उनके अमेरिका दौरे के साथ कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा भी प्रस्तावित वैश्विक कार्यक्रमों का हिस्सा है। RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठन की ओर से दुनिया के विभिन्न देशों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

एकता, विविधता और मानवता पर भागवत का संदेश

न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का संबोधन मूल रूप से एकता के भीतर विविधता, धार्मिक सह-अस्तित्व, मानव गरिमा और संतुलित विकास के संदेश पर केंद्रित रहा। उन्होंने भारतीय जीवन-दर्शन की उस सोच को सामने रखा, जिसमें अलग-अलग मान्यताओं और रास्तों के बावजूद मानवता को एक माना जाता है।