नयनबंद डाकबम और 100 किलो का महाकाल कांवर... श्रावणी मेले में आस्था का अनोखा संगम

श्रावणी मेले में सुल्तानगंज से देवघर जा रहे शिवभक्तों की अनोखी आस्था देखने को मिली। खगड़िया के सुधांशु कुमार आंखों पर पट्टी बांधकर 'नयनबंद' यात्रा कर रहे हैं, जबकि हावड़ा सेवा संघ 100 किलो का महाकाल कांवर लेकर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए निकला है।

नयनबंद डाकबम और 100 किलो का महाकाल कांवर... श्रावणी मेले में आस्था का अनोखा संगम
यनबंद डाकबम और 100 किलो का महाकाल कांवर।।

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  • आंखों पर पट्टी बांधकर तीसरी बार 'नयनबंद' यात्रा पर निकले सुधांशु कुमार
  • खगड़िया के मासिक डाकबम बने श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र
  • हावड़ा सेवा संघ के 30 कांवरियों ने उठाया 100 किलो का 'महाकाल कांवर'

भागलपुर/सुल्तानगंज (Threesocieties.com Desk): विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में इस बार भी शिवभक्तों की आस्था अपने अलग-अलग रूपों में देखने को मिल रही है। उत्तरवाहिनी गंगा तट स्थित अजगैवीनाथ धाम से देवघर के लिए निकल रहे लाखों कांवरियों के बीच रविवार को दो ऐसी अनोखी यात्राएं चर्चा का विषय बन गईं, जिन्होंने हर श्रद्धालु का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

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एक ओर खगड़िया के शिवभक्त सुधांशु कुमार आंखों पर मोटी पट्टी बांधकर 'नयनबंद' कांवर यात्रा पर निकले हैं, तो दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के हावड़ा सेवा संघ के 30 कांवरियों का जत्था करीब 100 किलो वजन का भव्य 'महाकाल कांवर' लेकर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए रवाना हुआ।

'दुनिया में किसी को नहीं देखना, सिर्फ बाबा के दर्शन करने हैं'

खगड़िया जिले के मासिक डाकबम सुधांशु कुमार इस बार भी अपनी अनोखी साधना के कारण श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उन्होंने अपनी आंखों पर मोटी पट्टी बांध रखी है और इसी अवस्था में सुल्तानगंज से देवघर तक लगभग 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं।

सुधांशु कहते हैं कि उनका एक ही संकल्प है—"इस संसार में मुझे किसी और को नहीं देखना है, मुझे सिर्फ बाबा बैद्यनाथ के दिव्य दर्शन करने हैं।" उन्होंने उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरने के बाद आंखों पर पट्टी बांधी और बाबा धाम की ओर पैदल निकल पड़े। यह उनकी पहली नहीं बल्कि लगातार तीसरी 'नयनबंद' यात्रा है। रास्ते में अन्य कांवरिये भी उनकी आस्था को देखकर उन्हें 'नयनबंद डाकबम' कहकर संबोधित कर रहे हैं।

100 किलो का महाकाल कांवर बना आकर्षण

इसी दौरान हावड़ा सेवा संघ के 30 श्रद्धालुओं का विशेष जत्था भी अजगैवीनाथ धाम पहुंचा। इस दल के पास करीब एक क्विंटल यानी 100 किलो वजन का भव्य 'महाकाल कांवर' है, जिस पर उज्जैन के महाकाल शिवलिंग की आकर्षक प्रतिकृति बनाई गई है। श्रद्धालुओं ने उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान और कांवर पूजन के बाद बाबा बैद्यनाथ के लिए जल यात्रा शुरू की।

95 हजार रुपये में तैयार हुआ भव्य कांवर

जत्थे के सदस्य सुनील गुप्ता ने बताया कि इस विशेष कांवर को तैयार करने में लगभग 95 हजार रुपये खर्च हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनका संगठन पिछले 12 वर्षों से हर साल अलग-अलग थीम और आकर्षक कांवर लेकर बाबा धाम पहुंचता है। इस बार महाकाल स्वरूप कांवर तैयार किया गया है, जिसे देखने के लिए रास्ते भर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

चार दिन में पूरी करेंगे 105 किलोमीटर की यात्रा

हावड़ा सेवा संघ के श्रद्धालु चार दिनों में लगभग 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर देवघर पहुंचेंगे और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करेंगे। पूरे रास्ते वे 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

विशेष मनोकामना के साथ निकले श्रद्धालु

जत्थे के सदस्यों ने बताया कि वे विशेष धार्मिक कामना के साथ बाबा बैद्यनाथ के दरबार जा रहे हैं। उनका विश्वास है कि बाबा की कृपा से उनकी प्रार्थनाएं पूरी होंगी। पूरे मार्ग में अनुशासन, भक्ति और सेवा भाव के साथ यात्रा जारी रहेगी।

श्रावणी मेला बना आस्था का विराट उत्सव

श्रावणी मेला केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास, सेवा और समर्पण का विशाल उत्सव बन चुका है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु अलग-अलग संकल्पों और मनोकामनाओं के साथ सुल्तानगंज से देवघर तक कठिन पदयात्रा करते हैं। इस वर्ष भी 'नयनबंद' यात्रा और महाकाल कांवर जैसी अनोखी झलकियां श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं और यह साबित करती हैं कि बाबा बैद्यनाथ के प्रति भक्तों की श्रद्धा की कोई सीमा नहीं है।