2.20 करोड़ के इनामी असीम मंडल का सरेंडर, 55 केसों वाला माओवादी अध्याय खत्म
2.20 करोड़ के इनामी माओवादी असीम मंडल ने बंगाल में आत्मसमर्पण किया। जानें 55 मामलों वाले इस शीर्ष माओवादी का चार दशक पुराना सफर, किशनजी के बाद बंगाल की जिम्मेदारी और सारंडा में उसकी गतिविधियों की पूरी कहानी।
HighLights:
- 2.20 करोड़ रुपये के इनामी माओवादी असीम मंडल ने बंगाल में किया आत्मसमर्पण
- झारखंड में उस पर 1 करोड़ और ओडिशा में 1.20 करोड़ रुपये का इनाम था
- असीम मंडल के खिलाफ करीब 55 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड सामने आया है
- सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों से जुड़ा रहा
रांची/कोलकाता(Threesocieties.com Desk): प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के केंद्रीय कमेटी सदस्य और 2.20 करोड़ रुपये के इनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश ने पश्चिम बंगाल में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। झारखंड पुलिस मुख्यालय ने उसके बंगाल में आत्मसमर्पण की पुष्टि की है। असीम मंडल पर झारखंड सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये और ओडिशा सरकार की ओर से 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के उत्तर फुलचुक गांव का रहने वाला असीम मंडल करीब चार दशकों से माओवादी गतिविधियों से जुड़ा रहा। सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में करीब 55 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह आकाश, तिमिर, मनोज, दीपक और राकेश समेत कई उपनामों से भी संगठन में जाना जाता था।
छात्र जीवन में ही माओवादी गतिविधियों से जुड़ा
असीम मंडल के माओवादी सफर की शुरुआत उसके छात्र जीवन से हुई। वह पीपुल्स वार ग्रुप (PWG) से जुड़ा और बाद में भाकपा (माओवादी) के गठन के बाद संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक पहुंचा। पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र के साथ-साथ झारखंड के पूर्वी सिंहभूम और बाद में पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र में उसकी सक्रियता रही। वर्ष 2010 में उसे पश्चिम बंगाल स्टेट कमेटी का सचिव बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। वह बंगाल-झारखंड-ओडिशा (BJO) क्षेत्रीय कमेटी में भी महत्वपूर्ण भूमिका में रहा।
किशनजी की मौत के बाद बंगाल की जिम्मेदारी
माओवादी नेता किशनजी के नवंबर 2011 में मारे जाने के बाद असीम मंडल को बंगाल में संगठन की जिम्मेदारी मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद वह जंगलमहल क्षेत्र से हटकर झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम स्थित सारंडा के जंगलों में सक्रिय रहा। सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में सुरक्षा बलों के खिलाफ कई माओवादी गतिविधियों में उसके दस्ते की भूमिका का पुलिस रिकॉर्ड में उल्लेख मिलता रहा है।
जंगल में AK-47 छोड़कर बदले ठिकाने
असीम मंडल की हालिया गतिविधियों को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, अगस्त में उसने जंगल में अपना AK-47 और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज छोड़ दिए थे। इसके बाद वह कार से सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकला और परिचितों तथा रिश्तेदारों के यहां ठिकाना बदल-बदलकर रहने लगा।
बताया गया है कि वह भेष बदलकर भी रह रहा था। आखिरकार आगे की यात्रा के लिए पैसे लेने के उद्देश्य से जब वह पूर्व मेदिनीपुर के पोटाशपुर इलाके में एक परिचित से मिलने पहुंचा, तब कोलकाता STF ने उसे पकड़ लिया। इस कार्रवाई में उसके पास से दो बैग मिले, जिनमें माओवादी साहित्य, प्रचार सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होने की जानकारी है।
चार दशक के भूमिगत सफर का अंत
64 वर्षीय असीम मंडल के लंबे भूमिगत सफर पर उसके आत्मसमर्पण के साथ विराम लग गया है। पिछले दिनों उसके दस्ते से जुड़े कई माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद उस पर भी दबाव बढ़ने की बात सामने आई थी। सितंबर की शुरुआत में उसके दस्ते से जुड़े तीन माओवादियों—राम प्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, उसकी पत्नी मीता और गौरी—के बंगाल पुलिस के सामने आत्मसमर्पण की खबर सामने आई थी।
सारंडा और कोल्हान में सुरक्षा बलों से कई मुठभेड़
असीम मंडल के दस्ते का नाम पश्चिमी सिंहभूम में कई हिंसक घटनाओं से जोड़ा गया है। उपलब्ध पुलिस संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, 2023 में तुंबाहाका क्षेत्र में मुठभेड़ और आईईडी विस्फोट में सुरक्षा बलों के जवान घायल हुए थे। इसके अलावा जरायकेला और अन्य इलाकों में भी उसके दस्ते से जुड़ी मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। एक मार्च 2026 को चाईबासा के छोटानागरा थाना क्षेत्र के मारांगपोंगा में उसके दस्ते के साथ मुठभेड़ में 209 कोबरा बटालियन के सहायक समादेष्टा समेत दो सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है।
झारखंड पुलिस करेगी पूछताछ
असीम मंडल के आत्मसमर्पण के बाद झारखंड पुलिस की एक टीम के बंगाल जाने की बात सामने आई है। उससे संगठन के बचे हुए सदस्यों, हथियारों, ठिकानों और माओवादी नेटवर्क से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाएगी। असीम मंडल पर घोषित कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम और उसके खिलाफ दर्ज करीब 55 मामलों को देखते हुए उसका आत्मसमर्पण झारखंड-बंगाल-ओडिशा क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क से जुड़ी सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
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