श्रीराम कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब, राजन जी महाराज बोले- वर्तमान सुधारिए, भविष्य स्वयं संवर जाएगा
धनबाद के निरसा प्रखंड स्थित कंचनडीह में नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के चौथे दिन पूज्य राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए वर्तमान सुधारने और हरि भजन को जीवन का श्रेष्ठ मार्ग बताया। कथा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
HighLights:
- निरसा के कंचनडीह में नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव का चौथा दिन रहा भक्तिमय
- राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम की मनोहारी बाल लीलाओं का किया भावपूर्ण वर्णन
- कहा- वर्तमान को सुधारेंगे तो भविष्य स्वतः उज्ज्वल हो जाएगा
- सोमवार को धनुष-यज्ञ एवं श्री सीताराम विवाहोत्सव का होगा भव्य आयोजन
धनबाद (Threesocieties.com Desk): निरसा प्रखंड के कंचनडीह में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के चौथे दिन रविवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा वाचक पूज्य श्री राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम की मनोहारी बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को जीवन को सकारात्मक दिशा देने का संदेश दिया। उनके ओजस्वी एवं मधुर प्रवचनों ने पूरे कथा पंडाल को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
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राजन जी महाराज ने कहा कि यदि जीवन में कष्ट, तनाव या निराशा हो तो भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का श्रद्धापूर्वक श्रवण करें। श्रीराम की बाल लीलाएं मन को निर्मल, शांत और आनंदमय बनाती हैं। उन्होंने कहा कि "अपना वर्तमान सुधारिए, भविष्य स्वयं सुधर जाएगा। हरि भजन ही जीवन के उद्धार का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है।" यह भव्य धार्मिक आयोजन चिरकुंडा निवासी वीरेन्द्र राय एवं उनके परिवार के तत्वावधान में संपन्न हो रहा है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।
हर बालक में भगवान का स्वरूप देखने की सीख
अपने प्रवचन में राजन जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक बालक में भगवान का अंश विद्यमान है। जब भी किसी बच्चे को खेलते हुए देखें तो उसमें प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप का दर्शन करें। उन्होंने कहा कि बच्चों के प्रति प्रेम, स्नेह और सम्मान का भाव ही सच्ची भक्ति का परिचायक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर का संस्कार उसके व्यवहार में झलकता है। यदि हृदय में उत्साह, प्रेम और सकारात्मकता होगी तो उसका प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई देगा।
व्यवहार ही बताता है हमारे मन की स्थिति
महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के हृदय में क्या चल रहा है, इसका पता उसके व्यवहार से चलता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम की बाल लीलाओं का श्रवण केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि जीवन को संस्कारित और सकारात्मक बनाने का माध्यम है। उनके प्रेरणादायी प्रवचनों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और पूरा कथा पंडाल भक्ति एवं श्रद्धा के वातावरण में डूब गया।
प्रतिदिन बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या
कंचनडीह में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। कंचनडीह, चिरकुंडा, निरसा सहित आसपास के गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंच रहे हैं। कथा प्रारंभ होने से पहले ही पूरा पंडाल श्रद्धालुओं से भर जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और बेहतर व्यवस्था के लिए आयोजक वीरेन्द्र राय एवं उनके परिवार के साथ बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा कार्य में जुटे हुए हैं।
भजन पर झूम उठा पूरा कथा पंडाल
कथा के दौरान जब पूज्य श्री राजन जी महाराज ने लोकप्रिय भजन "राजा जी खजनवा दे द..." का गायन प्रारंभ किया तो पूरा पंडाल भक्तिमय उल्लास से गूंज उठा। श्रद्धालु अपनी-अपनी जगह पर खड़े होकर भजनों की धुन पर झूमने लगे। पूरे परिसर में "जय श्रीराम" के जयघोष गूंजते रहे और माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
आज होगा धनुष-यज्ञ और श्री सीताराम विवाहोत्सव
कार्यक्रम के अंत में आयोजक वीरेन्द्र राय एवं उनके परिवार ने श्रद्धालुओं से सोमवार को आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव के पंचम दिवस में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने बताया कि पंचम दिवस पर पूज्य श्री राजन जी महाराज के श्रीमुख से धनुष-यज्ञ एवं श्री सीताराम विवाहोत्सव का अत्यंत मनोहारी प्रसंग प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से परिवार सहित इस दिव्य आयोजन में शामिल होकर पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।
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