UGC का बड़ा फैसला: MOT-MPT में स्पेशलाइजेशन डिग्री, 33 नए कोर्स मंजूर

UGC ने हेल्थ सेक्टर की 21 डिग्रियों में बदलाव और 33 नए कोर्स को मंजूरी दी है। 2026-27 से MPT और MOT में स्पेशलाइजेशन के साथ डिग्री मिलेगी।

UGC का बड़ा फैसला: MOT-MPT में स्पेशलाइजेशन डिग्री, 33 नए कोर्स मंजूर
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी डिग्रियों के नाम और अवधि में बदलाव।

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      HighLights:

  • UGC ने हेल्थ सेक्टर की करीब 21 डिग्रियों के नाम और अवधि में बदलाव मंजूर किया
  • 2026-27 से MPT में 8 स्पेशलाइजेशन के साथ डिग्री मिलेगी, MOT में 9 स्पेशलाइजेशन को मंजूरी दी गई
  • BPT और BOT की अवधि 4.5 साल से बढ़ाकर 5 साल की गई, बैचलर ऑफ ऑप्टोमेट्री की अवधि भी 5 वर्ष होगी
  • एलाइड और हेल्थकेयर सेक्टर के 33 नए डिग्री कोर्स मंजूर हुए

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हेल्थकेयर और एलाइड हेल्थ सेक्टर की पढ़ाई को लेकर बड़ा बदलाव किया है। यूजीसी ने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी करीब 21 डिग्रियों के नाम और अवधि में बदलाव को मंजूरी दी है। इसके साथ ही जरूरत के अनुरूप 33 नए डिग्री कोर्स शुरू करने की भी स्वीकृति दी गई है।

सबसे अहम बदलाव मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी (MPT) और मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरपी (MOT) को लेकर किया गया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन पाठ्यक्रमों में स्पेशलाइजेशन के साथ डिग्री प्रदान की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को अपनी रुचि और विशेषज्ञता के अनुरूप किसी खास क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा।

MPT में 8 स्पेशलाइजेशन को मंजूरी

यूजीसी ने मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी यानी MPT में आठ अलग-अलग स्पेशलाइजेशन को मान्यता दी है। इनमें मस्कुलोस्केलेटल, न्यूरो, कार्डियो-पल्मोनरी और स्पोर्ट्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। अब विद्यार्थियों को सामान्य MPT डिग्री के बजाय चुने गए विशेषज्ञता क्षेत्र के साथ डिग्री प्राप्त करने का रास्ता मिलेगा। इससे फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में विशेषज्ञ पेशेवर तैयार करने पर जोर बढ़ेगा।

MOT में भी 9 स्पेशलाइजेशन

इसी तरह मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरपी (MOT) में भी नौ स्पेशलाइजेशन डिग्रियों को मंजूरी दी गई है। नए प्रावधान के तहत 2026-27 से दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को संबंधित विशेषज्ञता के साथ डिग्री प्रदान की जाएगी। हालांकि, जो विद्यार्थी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पहले इन पाठ्यक्रमों में दाखिला ले चुके हैं, उनकी डिग्री पहले की व्यवस्था के अनुसार सामान्य डिग्री ही रहेगी।

BPT और BOT की अवधि भी बदली

यूजीसी ने केवल डिग्री के नाम और स्पेशलाइजेशन में ही बदलाव नहीं किया है, बल्कि कई हेल्थकेयर पाठ्यक्रमों की अवधि में भी संशोधन किया है। बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT) और बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरपी (BOT) की अवधि को साढ़े चार वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किया गया है। इसी तरह बैचलर ऑफ ऑप्टोमेट्री पाठ्यक्रम की अवधि भी अब पांच वर्ष होगी। पाठ्यक्रम की अवधि में बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों को संबंधित क्षेत्र में अधिक व्यापक शैक्षणिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।

33 नए डिग्री कोर्स भी मंजूर

हेल्थकेयर सेक्टर की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए यूजीसी ने 33 नए डिग्री कोर्स शुरू करने को भी मंजूरी दी है। ये पाठ्यक्रम एलाइड और हेल्थकेयर के अलग-अलग क्षेत्रों से संबंधित होंगे। इनमें मेडिकल लैबोरेट्री साइंसेज, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी और डायलिसिस थेरेपी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विभिन्न विशेषज्ञ क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।

2026-27 से लागू होगी नई व्यवस्था

नए बदलावों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र से MPT और MOT में स्पेशलाइजेशन आधारित डिग्री व्यवस्था लागू होगी। पुराने विद्यार्थियों पर यह व्यवस्था लागू नहीं होगी और उन्हें दाखिले के समय लागू नियमों के अनुसार डिग्री मिलेगी। यूजीसी के इन बदलावों से फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरपी, ऑप्टोमेट्री और अन्य एलाइड हेल्थकेयर क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के विकल्पों का विस्तार होगा। साथ ही नए डिग्री कोर्स शुरू होने से हेल्थ सेक्टर में विशेषज्ञता आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। नए पाठ्यक्रम और संशोधित डिग्री संरचना नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) के नियामकीय ढांचे के तहत संचालित होने वाले संबंधित कार्यक्रमों से जुड़ी होगी।