JPSC पर CM हेमंत का बड़ा दांव, 14वीं PT समेत 2 बैकलॉग परीक्षाएं रद्द; CGL समेत कई एग्जाम की जांच
झारखंड विधानसभा में CM हेमंत सोरेन ने 14वीं JPSC PT और दो बैकलॉग परीक्षाएं रद्द करने का ऐलान किया। TDPL, JSSC-CGL समेत कई परीक्षाओं की जांच होगी।
HighLights:
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में JPSC परीक्षा को लेकर बड़ा ऐलान किया
- 14वीं JPSC की प्रारंभिक परीक्षा (PT) रद्द करने की घोषणा
- JPSC की दो बैकलॉग परीक्षाएं भी होंगी रद्द
- 11वीं और 13वीं JPSC समेत FRO, APP परीक्षाओं की जांच होगी
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्रों के आंदोलन और राजनीतिक घमासान के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि 14वीं JPSC की प्रारंभिक परीक्षा (PT) को रद्द किया जाएगा। इसके साथ ही JPSC की दो बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया गया है।
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मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही परीक्षा संचालन और कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार के रुख को और स्पष्ट करते हुए TDPL के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं की जांच कराने की घोषणा की। इस दायरे में 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा के अलावा FRO, APP और TDPL से कराई गई अन्य परीक्षाएं भी शामिल होंगी।
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TDPL के माध्यम से आयोजित परीक्षा होने के कारण JSSC-CGL भी जांच के दायरे में आ गई है। ऐसे में सरकार की इस घोषणा से झारखंड की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहे विवाद को नया मोड़ मिल गया है।
14वीं JPSC PT और दो बैकलॉग परीक्षा होंगी रद्द
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि 14वीं JPSC की प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया जाएगा। इसके साथ ही दो बैकलॉग JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने की बात कही गई है। परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब राज्यभर के अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
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सरकार के इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे थे। हालांकि, परीक्षा रद्द होने के बाद नई परीक्षा की प्रक्रिया, तारीख और अन्य औपचारिकताओं को लेकर आगे सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।
11वीं और 13वीं JPSC समेत कई परीक्षाएं जांच के घेरे में
मुख्यमंत्री की घोषणा सिर्फ 14वीं JPSC तक सीमित नहीं रही। सरकार ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं के साथ FRO और APP परीक्षाओं की भी जांच कराने की बात कही है। इसके अलावा TDPL के माध्यम से आयोजित तमाम परीक्षाओं की जांच का निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में यदि कहीं भी गड़बड़ी या अनियमितता हुई है, तो उसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। इस फैसले के बाद अब उन परीक्षाओं को लेकर भी सवालों का जवाब तलाशा जाएगा, जिनके संचालन में TDPL की भूमिका रही है।
JSSC-CGL भी जांच के दायरे में
सरकार के इस ऐलान का सबसे बड़ा असर बहुचर्चित JSSC-CGL परीक्षा पर भी पड़ सकता है। चूंकि JSSC-CGL का संचालन TDPL के माध्यम से कराया गया था, इसलिए TDPL से संबंधित परीक्षाओं की जांच के फैसले के कारण यह परीक्षा भी जांच के दायरे में आ गई है।
JSSC-CGL को लेकर पहले से ही अभ्यर्थियों के बीच कई सवाल और विवाद सामने आते रहे हैं। अब सरकार द्वारा TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की जांच की घोषणा के बाद अभ्यर्थियों की निगाह जांच की प्रक्रिया और उसके निष्कर्ष पर रहेगी। हालांकि, जांच के दायरे में आने का अर्थ अपने आप परीक्षा रद्द होना नहीं है। किसी परीक्षा के संबंध में आगे क्या कार्रवाई होगी, यह जांच के निष्कर्ष और सरकार के अगले निर्णय पर निर्भर करेगा।
छात्र प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद सरकार का बड़ा कदम
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई बातचीत में सामने आए मुद्दों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार का कहना है कि छात्रों की समस्याओं को समझने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर लगातार हो रहे विरोध के बीच मुख्यमंत्री की यह घोषणा सरकार के स्तर पर बड़ा हस्तक्षेप माना जा रहा है। छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना, कथित अनियमितताओं की जांच कराना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल रहा है।
परीक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए IIT-IIM-XLRI से ली जाएगी सलाह
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भविष्य की परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की योजना भी सदन में रखी। उन्होंने कहा कि राज्य की परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। सरकार की ओर से IIT, IIM और XLRI जैसे शीर्ष संस्थानों से विशेषज्ञ सलाह लेने की बात कही गई है। उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है, जिसमें पारदर्शिता, तकनीकी सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके। सरकार का जोर भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को इस तरह आयोजित करने पर है कि अभ्यर्थियों के बीच किसी तरह का संदेह पैदा न हो और परीक्षा प्रक्रिया पर भरोसा कायम रहे।
CM हेमंत का BJP पर तीखा हमला
छात्रों के मुद्दे पर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले बीजेपी के लोग गेरुआ वेश में लोगों को ठगते थे और अब छात्रों के वेश में लोगों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं।मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बीजेपी विधायक लगातार छात्रों की मांगों और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार को घेरते रहे। वहीं, मुख्यमंत्री ने सरकार की ओर से छात्रों के मुद्दे पर संवेदनशीलता बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का भरोसा दिया।
सदन में BJP विधायक सीपी सिंह ने दिखाई नोटों की गड्डी
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने सदन में नोटों की गड्डी दिखाकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने इसके जरिए सरकारी नौकरियों और परीक्षा प्रक्रिया में कथित लेन-देन के आरोपों की ओर इशारा करते हुए सरकार से सवाल किया। सीपी सिंह के इस कदम के बाद सत्ता पक्ष के विधायकों और मंत्रियों ने विरोध जताया। इससे सदन का माहौल और गरमा गया। छात्रों की परीक्षा संबंधी मांग पहले से ही राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा बनी हुई थी। ऐसे में नोटों की गड्डी दिखाने की घटना ने विधानसभा में चल रहे हंगामे को और बढ़ा दिया।
छात्र आंदोलन के बीच सरकार का बड़ा फैसला
झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर पिछले कुछ समय से छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में है। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। सरकार और छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई है। इसके बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में 14वीं JPSC PT और दो बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने तथा TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की जांच का ऐलान सरकार की ओर से आंदोलन को शांत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।हालांकि, छात्रों की सभी मांगों पर अंतिम सहमति बनी है या नहीं, यह अलग विषय है। सरकार की घोषणाओं के बाद अब छात्रों के अगले कदम पर भी नजर रहेगी।
घोषणा के बाद अब लागू करने की चुनौती
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब इसके क्रियान्वयन को लेकर है। 14वीं JPSC PT और दो बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने की औपचारिक प्रक्रिया किस तरह पूरी होगी, नई परीक्षा कब होगी और अभ्यर्थियों के लिए आगे की प्रक्रिया क्या होगी, इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे। इसी तरह TDPL के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं की जांच किस एजेंसी या समिति के स्तर पर होगी और जांच का दायरा कितना व्यापक होगा, यह भी महत्वपूर्ण होगा। खास तौर पर JSSC-CGL को लेकर अभ्यर्थियों में उत्सुकता रहेगी कि जांच के बाद सरकार की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है।
हंगामे के बीच विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
छात्रों की परीक्षा संबंधी मांगों को लेकर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा हुआ। लगातार नोकझोंक और हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। सत्र की कार्यवाही निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 12 अगस्त तक चलनी थी, लेकिन हंगामे के बीच इसे एक दिन पहले ही समाप्त कर दिया गया। अंतिम दिन छात्रों की मांग, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद और कथित अनियमितताओं का मुद्दा सदन में प्रमुखता से छाया रहा।
अब सरकार के अगले कदम पर टिकी नजर
विधानसभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की घोषणा के बाद झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर तस्वीर बदलती नजर आ रही है। 14वीं JPSC PT और दो बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला, 11वीं और 13वीं JPSC समेत कई परीक्षाओं की जांच और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की पड़ताल सरकार के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम है।
अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार इन घोषणाओं को जमीन पर कितनी तेजी से लागू करती है। खासकर नई JPSC परीक्षा की प्रक्रिया, बैकलॉग परीक्षाओं का नया कार्यक्रम, TDPL जांच और JSSC-CGL को लेकर आगे की कार्रवाई अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे।
छात्र आंदोलन के बीच सरकार ने फिलहाल बातचीत और कार्रवाई, दोनों रास्ते खुले रखे हैं। अब इन घोषणाओं के बाद छात्रों का आंदोलन कितना शांत होता है और परीक्षा व्यवस्था में वास्तव में कितना सुधार आता है, यह आने वाला समय तय करेगा।
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