Dhanbad : धनबाद में ₹40 लाख के वन्यजीव अंग बरामद, होटल से 3 तस्कर गिरफ्तार

धनबाद में वन विभाग ने वन्यजीव अंगों की कथित तस्करी के मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया। करीब ₹40 लाख के 70 उत्पाद बरामद, पैंगोलिन के 17 स्केल्स समेत फर, हड्डियां और नाखून जब्त।

Dhanbad : धनबाद में ₹40 लाख के वन्यजीव अंग बरामद, होटल से 3 तस्कर गिरफ्तार
वन विभाग ने वन्यजीवों के अंगों की तस्करी का किया खुलासा।

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     Highlights:

  • धनबाद में वन्यजीव अंगों की कथित तस्करी का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार
  • करीब ₹50 लाख बाजार मूल्य के 70 वन्यजीव उत्पाद बरामद
  • पैंगोलिन के 17 स्केल्स, कैट फैमिली के फर, हड्डियां और नाखून जब्त
  • बरामद अंगों की पहचान के लिए देहरादून स्थित जांच केंद्र भेजने की तैयारी

धनबाद (Threesocieties.com Desk): झारखंड के धनबाद में वन्यजीवों के अंगों की कथित तस्करी का मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों पर वन्यजीवों से संबंधित अंगों और अन्य वस्तुओं की खरीद-बिक्री में शामिल होने का आरोप है।

वन विभाग के अनुसार, कार्रवाई के दौरान करीब 40 लाख रुपये बाजार मूल्य के 70 वन्यजीव उत्पाद बरामद किए गए हैं। जब्त सामग्री में पैंगोलिन के स्केल्स और कैट फैमिली से संबंधित बताए जा रहे फर, हड्डियां तथा नाखून शामिल हैं। बरामदगी के बाद विभाग अब इन वन्यजीव उत्पादों की वास्तविक पहचान, उनके स्रोत और कथित तस्करी के नेटवर्क की जांच कर रहा है।

धनबाद में वन्यजीव तस्करी का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार

धनबाद के वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) विकास पालीवाल ने बताया कि वन्यजीवों से संबंधित वस्तुओं की खरीद-बिक्री के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विभाग ने आरोपितों के कब्जे से बड़ी संख्या में वन्यजीव उत्पाद बरामद किए हैं। बरामद सामग्री का बाजार मूल्य करीब 40 लाख रुपये आंका गया है। हालांकि, वन्यजीवों के अंगों की प्रजाति और उनकी वास्तविक पहचान की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। वन विभाग इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि बरामद सामग्री कहां से लाई गई थी और इसे कहां बेचने की तैयारी थी। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों के अलावा दूसरे लोग भी शामिल हैं या नहीं।

पैंगोलिन के 17 स्केल्स समेत कई वन्यजीव उत्पाद बरामद

वन विभाग की कार्रवाई में पैंगोलिन के 17 स्केल्स बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कैट फैमिली से संबंधित बताए जा रहे तीन फर, नौ हड्डियां और तीन नाखून भी जब्त किए गए हैं। पैंगोलिन और बाघ जैसी संरक्षित वन्यजीव प्रजातियों के अंगों की अवैध खरीद-बिक्री वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से गंभीर मामला है। ऐसे उत्पादों की तस्करी से वन्यजीवों के संरक्षण के प्रयासों को नुकसान पहुंचता है। फिलहाल बरामद सभी अंगों की प्रजाति की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। इसलिए यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि जब्त फर, हड्डियां और नाखून किस वन्यजीव के हैं।

देहरादून भेजे जाएंगे कैट फैमिली के अंग

वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालीवाल के अनुसार, बरामद कैट फैमिली के अंगों की वैज्ञानिक पहचान कराई जाएगी। इसके लिए नमूनों को देहरादून स्थित जांच केंद्र भेजने की तैयारी है। जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि बरामद अंग बाघ के हैं या किसी अन्य बड़ी बिल्ली प्रजाति के। वैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट से वन विभाग को वन्यजीवों की प्रजाति की पुष्टि करने और मामले की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। वन्यजीवों के अंगों की पहचान ऐसे मामलों में अहम होती है, क्योंकि अलग-अलग प्रजातियों के संरक्षण का कानूनी दर्जा और जांच से जुड़े तथ्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर स्थापित किए जाते हैं।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई

वन विभाग ने इस मामले में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित प्रजातियों के अवैध शिकार, उनके अंगों के अवैध कब्जे और खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।पैंगोलिन की प्रजातियां और बाघ सहित कई वन्यजीव सख्त संरक्षण के दायरे में आते हैं। हालांकि, इस मामले में बरामद प्रत्येक अंग की प्रजाति और उससे जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच तथा वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर होगी। वन विभाग बरामद सामग्री की प्रकृति, उसके संभावित स्रोत और कथित खरीद-बिक्री से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रहा है।

तस्करी के नेटवर्क की जांच पर नजर

धनबाद में करीब 40 लाख रुपये मूल्य के वन्यजीव उत्पादों की बरामदगी के बाद अब जांच का महत्वपूर्ण पहलू कथित तस्करी के नेटवर्क का पता लगाना है। वन विभाग यह जानने का प्रयास कर रहा है कि आरोपितों को ये अंग कहां से मिले और उनकी खरीद-बिक्री में कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। यदि जांच में किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आती है, तो कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी किसी अतिरिक्त आरोपी या तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क की पुष्टि नहीं हुई है।

वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से अहम कार्रवाई

धनबाद कोयलांचल क्षेत्र में वन्यजीवों के अंगों की कथित तस्करी का मामला सामने आना वन्यजीव संरक्षण और अवैध व्यापार पर निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वन्यजीवों के अंगों की मांग अवैध शिकार और तस्करी को बढ़ावा दे सकती है।ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई, बरामद सामग्री की वैज्ञानिक जांच और खरीद-बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क की पहचान करना जरूरी होता है। इससे न केवल आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में मदद मिलती है, बल्कि संरक्षित वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रयासों को भी मजबूती मिलती है।