Gangs of Wasseypur: 27 साल पुराने केस में फहीम खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, रिहाई पर लगी अंतिम मुहर

धनबाद के चर्चित सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड में गैंगस्टर फहीम खान को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के रिहाई आदेश को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। जानिए पूरा मामला और कोर्ट के फैसले की अहम बातें।

Gangs of Wasseypur: 27 साल पुराने केस में फहीम खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, रिहाई पर लगी अंतिम मुहर
फहीम खान की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर।

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      HighLights:

  • 27 साल पुराने चर्चित सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड में बड़ा फैसला
  • सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की अपील खारिज की
  • फहीम खान को रिहा करने के हाईकोर्ट के आदेश पर लगी मुहर
  • कोर्ट ने कहा- 2007 नहीं, 1984 की रिमिशन नीति होगी लागू
  • रिहाई का रास्ता साफ, सरकार कानूनी विकल्पों पर कर रही विचार

धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयला राजधानी धनबाद के चर्चित सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे गैंगस्टर फहीम खान को बड़ी कानूनी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें राज्य सरकार को फहीम खान को रिहा करने का निर्देश दिया गया था। इसके साथ ही झारखंड सरकार की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया।

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फहीम खान की रिहाई का रास्ता लगभग पूरी तरह साफ हो गया है। यह मामला केवल एक व्यक्ति की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड में रिमिशन (सजा में छूट) नीति की व्याख्या और उसके लागू होने के तरीके को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों खारिज की सरकार की अपील?

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मोहन और फहीम खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को सही मानते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

7 नवंबर 2025 को झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की एकलपीठ ने फहीम खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर उन्हें जेल से रिहा करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि राज्य की रिमिशन समीक्षा बोर्ड ने फहीम खान की रिहाई पर विचार करते समय 2007 की संशोधित रिमिशन नीति लागू की, जबकि यह कानूनी रूप से उचित नहीं था। अदालत ने कहा कि चूंकि इस मामले में सत्र न्यायालय का फैसला 15 जून 1991 को आया था, इसलिए इस पर 1984 की रिमिशन नीति लागू होगी। बाद में बनी 2007 की नीति को पूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू नहीं किया जा सकता।

आदेश के बाद भी नहीं हुई थी रिहाई

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद निर्धारित समयसीमा में फहीम खान को रिहा नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अवमानना (Contempt) याचिका दाखिल की। इसी बीच झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की अपील खारिज कर दी है।

क्या था पूरा मामला?

धनबाद के वासेपुर इलाके में 10 मई 1989 को सगीर हसन सिद्दीकी की हत्या हुई थी। यह मामला उस समय काफी चर्चा में रहा था। बाद में 2009 में झारखंड हाईकोर्ट ने फहीम खान को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद 21 अप्रैल 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी सजा को बरकरार रखा था। हालांकि, सजा के दौरान रिमिशन नीति के तहत रिहाई के अधिकार को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो अंततः हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

रिमिशन नीति क्यों बनी चर्चा का विषय?

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी दोषी की रिहाई पर विचार करते समय वही रिमिशन नीति लागू होगी, जो उसके मामले पर कानूनी रूप से लागू होती है। हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि फहीम खान के मामले में 1984 की रिमिशन नीति लागू होगी, न कि 2007 की संशोधित नीति। इस फैसले को भविष्य में ऐसे कई मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां पुराने मामलों पर नई नीतियां लागू करने का विवाद सामने आता है।

सरकार के सामने क्या विकल्प?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद झारखंड सरकार की नियमित अपील की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। हालांकि, सरकार उपलब्ध संवैधानिक और कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकती है। वहीं, अदालत के आदेश के बाद फहीम खान की रिहाई की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।

Threesocieties.com Analysis

धनबाद के चर्चित वासेपुर हत्याकांड से जुड़ा यह फैसला केवल फहीम खान की रिहाई तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रिमिशन नीति लागू करने में कानून के समय और सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। इस निर्णय का असर झारखंड सहित उन सभी मामलों पर पड़ सकता है, जहां पुराने दोषियों की रिहाई पर नई नीतियों को लेकर विवाद चल रहा है।