चार साल से रोक, फिर भी दौड़े भारी वाहन; अब धंस गया बजराघाट पुल, जामताड़ा-धनबाद संपर्क टूटा

जामताड़ा-धनबाद मार्ग पर बराकर नदी का बजराघाट पुल धंस गया। पिलर के पास दरारों के बाद आवागमन बंद है। चार साल से रोक के बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही और कथित अवैध बालू उठाव पर सवाल उठे।

चार साल से रोक, फिर भी दौड़े भारी वाहन; अब धंस गया बजराघाट पुल, जामताड़ा-धनबाद संपर्क टूटा
वर्ष 2009 में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से बना था पुल।

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  • बराकर नदी में बना बजराघाट पुल बीच से धंसा, पिलर के पास दरारें आईं
  • जामताड़ा-धनबाद के बीच आवागमन तत्काल बंद कर दिया गया
  • ग्रामीणों ने कथित अवैध बालू उठाव को पुल की नींव कमजोर होने का कारण बताया
  • वैकल्पिक मार्ग से लोगों को करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है

धनबाद (Threesocieties.com Desk):  जामताड़ा को धनबाद से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर बराकर नदी में बना बजराघाट (बैजड़ा घाट) पुल बुधवार को अचानक क्षतिग्रस्त हो गया। पुल के जामताड़ा की ओर पिलर नंबर छह के पास करीब एक से डेढ़ फीट हिस्सा धंसने के बाद पुल में कई जगह दरारें आ गईं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पुल से वाहनों की आवाजाही तत्काल बंद करा दी है।

पुल के क्षतिग्रस्त होने की खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। यह पुल धनबाद से टुंडी होते हुए जामताड़ा जाने वाले लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रोजाना इस मार्ग से ग्रामीणों के अलावा व्यापारी, विद्यार्थी, नौकरी-पेशा लोग और छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। पुल बंद होने से दोनों जिलों के बीच सीधा आवागमन प्रभावित हो गया है।

चार साल पहले ही कमजोर हिस्से पर लग चुकी थी रोक

स्थानीय लोगों के अनुसार बजराघाट पुल लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। करीब चार वर्ष पहले पुल के पिलर नंबर चार के पास संरचना कमजोर पाए जाने के बाद उस हिस्से से आवागमन रोक दिया गया था। प्रशासन की ओर से भी भारी वाहनों के परिचालन पर रोक की बात सामने आई थी। इसके बावजूद पुल से लोगों की आवाजाही जारी रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रोक के बावजूद बड़े और भारी वाहन भी इस मार्ग से गुजरते रहे, जिससे पहले से कमजोर पुल पर लगातार दबाव बना रहा। अब पुल का बीच का हिस्सा धंसने के बाद लोगों की पुरानी आशंका सच साबित होती दिख रही है। हालांकि, पुल धंसने की वास्तविक वजह क्या है, इसका अंतिम निष्कर्ष तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।

अवैध बालू उठाव से पिलर की नींव कमजोर होने का आरोप

पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने बराकर नदी में कथित अवैध बालू खनन और लगातार बालू उठाव को भी गंभीर सवालों के घेरे में रखा है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी से लगातार बालू निकाले जाने के कारण पुल के पिलरों के आसपास की मिट्टी और नदी की तलहटी कमजोर होती गई।

सुखजोड़ा पंचायत के मुखिया जोसेफ मुर्मू और ग्राम प्रधान अशोक सिंह ने कथित अवैध बालू उठाव को पुल की मौजूदा स्थिति का प्रमुख कारण बताया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते नदी से अवैध बालू उठाव पर रोक लगाई जाती और पुल की नियमित तकनीकी जांच होती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

निर्माण में करीब पांच करोड़ रुपये हुए थे खर्च

जानकारी के अनुसार बजराघाट पुल का निर्माण वर्ष 2009 में विशेष प्रमंडल, जामताड़ा की ओर से कराया गया था। पुल के निर्माण पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसके निर्माण के बाद जामताड़ा और धनबाद के बीच आवागमन का सीधा और महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग उपलब्ध हुआ था। करीब डेढ़ दशक बाद पुल की संरचनात्मक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुल के अलग-अलग हिस्सों में पहले भी समस्या सामने आने की बात स्थानीय लोग बताते रहे हैं। अब पिलर के पास धंसाव और दरार आने के बाद पुल की मजबूती और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

मौके पर पहुंची प्रशासनिक और तकनीकी टीम

पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना के बाद प्रशासनिक और तकनीकी टीम मौके पर पहुंची। अंचल अधिकारी अविश्वर मुर्मू ने बताया कि प्रशासनिक टीम, थाना प्रभारी और पथ निर्माण विभाग के इंजीनियर मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। सुरक्षा को देखते हुए पुल पर वाहनों की आवाजाही बंद करा दी गई है। मौके पर जेसीबी की मदद से मिट्टी भराई का काम भी कराया जा रहा है। इसके साथ ही पुल की तकनीकी स्थिति का निरीक्षण किया जा रहा है। प्रशासन का फोकस फिलहाल किसी भी संभावित हादसे को रोकने पर है। तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही पुल की मरम्मत, सुदृढ़ीकरण या अन्य स्थायी समाधान को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

पुल बंद होने से हजारों लोगों की बढ़ेगी परेशानी

बजराघाट पुल बंद होने से जामताड़ा और धनबाद के बीच रोजाना आवागमन करने वाले हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। नौकरी, कारोबार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी कामों से दोनों जिलों के बीच आने-जाने वाले लोगों को अब वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ेगा।

स्थानीय लोगों के अनुसार वैकल्पिक रास्ते से जाने पर करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है। इससे लोगों का समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे।व्यापारियों और दैनिक यात्रियों के लिए भी यह स्थिति परेशानी वाली है, क्योंकि यह मार्ग दोनों जिलों के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम है।

रोक के बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही पर उठे सवाल

पुल के धंसने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुल का एक हिस्सा करीब चार साल से कमजोर था और वहां आवागमन पर रोक की बात सामने आ रही थी, तो इसके बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही कैसे जारी रही? ग्रामीणों ने प्रशासन से इसकी भी जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल पुल की मरम्मत ही समाधान नहीं है। नदी में अवैध बालू उठाव, पुल पर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही और लंबे समय से चली आ रही जर्जर स्थिति की भी जांच जरूरी है।

स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुल की तत्काल विस्तृत तकनीकी जांच कराने, नदी में कथित अवैध बालू खनन पर प्रभावी कार्रवाई करने और पुल की सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। फिलहाल पुल पर आवागमन बंद है। तकनीकी जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि पुल को मरम्मत के जरिए सुरक्षित बनाया जा सकता है या इसके लिए बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ेगी।

बजराघाट पुल का धंसना सिर्फ एक पुल के क्षतिग्रस्त होने की घटना नहीं है, बल्कि इसने पुलों की नियमित निगरानी, भारी वाहनों के परिचालन पर नियंत्रण और नदी से बालू उठाव की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।