JSSC CGL समेत 4 परीक्षाओं पर हाईकोर्ट की रोक, नियुक्त अफसरों को बड़ी राहत; सरकार से मांगा जवाब
झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL, CDPO, 11वीं-13वीं JPSC और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियां रद्द करने की अधिसूचनाओं पर रोक लगाई। नियुक्त अधिकारियों को काम जारी रखने का निर्देश और सरकार से जवाब मांगा।
HighLights:
- JSSC CGL और CDPO नियुक्ति परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
- 1975 CGL अधिकारियों और 64 CDPO को अंतरिम राहत
- 11वीं से 13वीं JPSC के चयनित अधिकारियों को भी काम जारी रखने का निर्देश
- JPSC फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा-2023 रद्द करने के फैसले पर भी रोक
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के फैसलों पर बड़ा अंतरिम हस्तक्षेप किया है। महज दो दिनों में JSSC CGL, CDPO, 11वीं से 13वीं JPSC और JPSC फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से जुड़े नियुक्ति मामलों में अदालत ने राहत दी है। हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से जारी रद्दीकरण संबंधी अधिसूचनाओं के क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगाते हुए प्रभावित चयनित एवं नियुक्त अधिकारियों को काम जारी रखने का निर्देश दिया है।
सबसे अहम राहत JSSC CGL परीक्षा-2023 (विज्ञापन संख्या 10/2023) और CDPO परीक्षा (विज्ञापन संख्या 21/2023) से नियुक्त अधिकारियों को मिली है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने 18 अगस्त को जारी उस अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी, जिसके जरिए संबंधित नियुक्ति विज्ञापनों को रद्द किया गया था। इस आदेश से CGL से नियुक्त 1975 अधिकारियों और 64 CDPO अधिकारियों को फिलहाल अंतरिम राहत मिली है।
नियुक्त अधिकारियों को काम जारी रखने का निर्देश
अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिसूचना के आधार पर नियुक्त अधिकारियों की सेवाएं तत्काल समाप्त नहीं की जा सकतीं। महाधिवक्ता को संबंधित विभाग को यह सूचना देने का निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ इसी आदेश से समान रूप से प्रभावित अन्य कर्मचारियों को भी काम करने दिया जाए। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता। अदालत के मुताबिक सरकार की ओर से जारी आदेश में फिलहाल ऐसी पर्याप्त सामग्री दिखाई नहीं देती, जिससे इतनी बड़ी कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके।
CID जांच का भी कोर्ट ने लिया संज्ञान
हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि भर्ती से जुड़े मामले की जांच पहले से CID कर रही है। अदालत ने कहा कि जांच चल रही होने के बावजूद नियुक्त लोगों की सेवाएं उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना समाप्त कर दी गईं। अदालत ने न्यायहित और सुविधा के संतुलन को देखते हुए फिलहाल नियुक्त अधिकारियों के पक्ष में अंतरिम राहत देना उचित माना। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिसूचना पर अमल जारी रहने की स्थिति जनहित के खिलाफ हो सकती है।
सरकार को 7 सितंबर तक देना होगा जवाब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 7 सितंबर तक जवाबी शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। सरकार को इसमें CID जांच की स्थिति, अब तक सामने आए तथ्यों और जांच के आधार पर की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी देनी होगी। वहीं प्रार्थियों को 14 सितंबर तक जवाबी शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को दोपहर 12:15 बजे निर्धारित की गई है।
11वीं से 13वीं JPSC के नियुक्त अधिकारियों को भी राहत
इसी दौरान हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के चयनित और नियुक्त अधिकारियों को भी राहत दी है। इन अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार की नियुक्ति रद्द करने संबंधी अधिसूचना पर रोक लगा दी। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को फिलहाल काम करते रहने का निर्देश दिया है। इससे सरकार के उस फैसले पर कानूनी दबाव बढ़ गया है, जिसके तहत जांच के आधार पर कई नियुक्ति परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द किए गए थे।
फूड सेफ्टी अफसरों को भी मिली राहत
JPSC फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा-2023 के मामले में भी हाईकोर्ट ने सरकार को तत्काल राहत नहीं दी। अदालत ने परीक्षा रद्द करने की सरकारी अधिसूचना पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार को पूरे मामले पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
नियुक्ति के बाद विज्ञापन रद्द करने पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि संबंधित विज्ञापनों के आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया के बाद सरकार ने नियुक्तियां की थीं। नियुक्ति के बाद अचानक विज्ञापन रद्द कर सेवाएं समाप्त कर दी गईं। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी कार्रवाई से पहले प्रभावित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए था। उनका कहना था कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किए बिना नियुक्तियां समाप्त करना उचित नहीं है।
सरकार की ओर से भी रखा गया पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय, वरीय अपर महाधिवक्ता अच्युत केशव ने पक्ष रखा। JPSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और प्रिंस कुमार ने अदालत के समक्ष दलीलें पेश कीं। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स, प्रेरणा झुनझुनवाला समेत अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने फैसले के समर्थन में ठोस साक्ष्य और जांच से जुड़ी सामग्री अदालत के समक्ष रखना है। सरकार का कहना है कि नियुक्ति परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने का फैसला CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया गया है। ऐसे में सरकार को अदालत में यह स्पष्ट करना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आए और वे नियुक्तियों को रद्द करने जैसे बड़े कदम को किस तरह उचित ठहराते हैं।
क्या यह नियुक्त अधिकारियों के लिए स्थायी राहत है?
फिलहाल नहीं। हाईकोर्ट का आदेश अंतरिम राहत है। अदालत ने अधिसूचनाओं के क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगाई है। इसका अर्थ है कि अंतिम फैसला अभी बाकी है। अब सरकार और CID को जांच से जुड़े तथ्य और साक्ष्य अदालत के सामने रखने होंगे। यदि सरकार ठोस सामग्री पेश करने में सफल रहती है, तो मामले की आगे की दिशा उसी आधार पर तय होगी। वहीं यदि सरकार पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाती है, तो नियुक्त अधिकारियों को आगे भी राहत मिलने की संभावना बन सकती है।
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