भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा मोड़: SDO-DSP समेत 15 पुलिसकर्मियों को न्यायिक आयोग का समन
भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा अपडेट। न्यायिक जांच आयोग ने SDO, DSP और SHO समेत 15 पुलिसकर्मियों को समन जारी किया है। मुठभेड़ में इस्तेमाल सर्विस पिस्टल FSL जांच के लिए जब्त की गई हैं, जबकि अब तक सात गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं।
HighLights:
- जगदीशपुर के SDO, तत्कालीन DSP और शाहपुर थानाध्यक्ष समेत 15 पुलिसकर्मियों को न्यायिक आयोग का समन
- मुठभेड़ में इस्तेमाल कई सरकारी सर्विस पिस्टल फोरेंसिक जांच के लिए जब्त
- तीसरे दिन मृतक के छोटे भाई चंदन तिवारी और प्रत्यक्षदर्शी महिला ने आयोग के समक्ष दर्ज कराया बयान
- अब तक सात गवाहों की गवाही पूरी, 25 गवाहों के बयान दर्ज कराने की तैयारी
- आयोग ने 16 और 17 जुलाई को संबंधित अधिकारियों व पुलिसकर्मियों को उपस्थित होने का निर्देश दिया
आरा (Threesocieties.com Desk): भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। न्यायिक जांच आयोग ने इस मामले में जगदीशपुर के एसडीओ संजीत कुमार, तत्कालीन डीएसपी राजेश कुमार शर्मा, तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत करीब 15 पुलिस अधिकारियों और जवानों को गवाही के लिए समन जारी किया है।
आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को 16 एवं 17 जुलाई को आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। आयोग का उद्देश्य घटना से जुड़े सभी तथ्यों, गवाहों के आरोपों और पुलिस अधिकारियों के पक्ष की विस्तार से जांच करना है।
इन पुलिस अधिकारियों और जवानों को भेजा गया समन
न्यायिक जांच आयोग की ओर से जिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को तलब किया गया है, उनमें—
जगदीशपुर के एसडीओ संजीत कुमार
तत्कालीन डीएसपी राजेश कुमार शर्मा
तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार
दारोगा हरिचंद्र कुमार
इंस्पेक्टर एवं अनुसंधानकर्ता संजीव कुमार
एएसआई रामाशंकर यादव
एसटीएफ के दारोगा विकास कुमार
दारोगा मंटू कुमार
सिपाही मुन्ना कुमार
सिपाही सोनू मेहता
चालक हवलदार नरेंद्र सिंह
सिपाही अभिषेक कुमार
सिपाही अक्षय कुमार
दारोगा राम कुमार
डीएसपी के बॉडीगार्ड संजय कुमार
सभी को अलग-अलग तिथियों पर आयोग के समक्ष उपस्थित होकर गवाही देने का निर्देश दिया गया है।
फोरेंसिक जांच के लिए जब्त की गईं सर्विस पिस्टल
जांच के दौरान पुलिस ने मुठभेड़ में शामिल अधिकारियों और जवानों की सरकारी पिस्टलों को भी जब्त करना शुरू कर दिया है। फोरेंसिक जांच के लिए जिन हथियारों को जब्त किया गया है, उनमें— डीएसपी के बॉडीगार्ड संजय कुमार की सर्विस पिस्टल, दारोगा हरिचंद्र कुमार की सरकारी पिस्टल व एएसआई रामाशंकर यादव की सर्विस पिस्टल। इससे पहले— तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार की सरकारी पिस्टल, एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की सरकारी पिस्टलव मृतक भरत तिवारी की पिस्टल भी जब्त की जा चुकी हैं। सभी हथियारों को अब विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा जाएगा, जहां बैलिस्टिक जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किस हथियार से फायरिंग हुई थी।
तीसरे दिन छोटे भाई चंदन तिवारी ने दर्ज कराया बयान
मंगलवार को न्यायिक जांच आयोग के समक्ष तीसरे दिन मृतक के छोटे भाई चंदन तिवारी और प्रत्यक्षदर्शी ललिता देवी ने बयान दर्ज कराया। चंदन तिवारी ने आयोग के सामने आरोप लगाया कि उनके भाई ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मार दी। उन्होंने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रत्यक्षदर्शी महिला का भी बड़ा दावा
गांव की प्रत्यक्षदर्शी ललिता देवी ने आयोग को बताया कि भरत तिवारी विस्थापितों की समस्याओं को लेकर प्रशासन से बातचीत कर रहे थे। उनके अनुसार प्रशासन द्वारा मांगें मानने का आश्वासन मिलने के बाद भरत ने अपना हथियार नीचे रख दिया था, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने गोली चला दी। आयोग ने उनके बयान को भी रिकॉर्ड कर लिया है।
दिल्ली से लौटे छोटे भाई, आयोग के समक्ष हुए पेश
भरत तिवारी के छोटे भाई चंदन तिवारी न्याय की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान आयोग की ओर से समन जारी होने के बाद उन्हें वापस भोजपुर लौटना पड़ा। उन्होंने आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया। आयोग ने स्पष्ट किया था कि निर्धारित तिथि पर अनुपस्थित रहने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
अब तक सात गवाहों की गवाही पूरी
अब तक आयोग के समक्ष—
मृतक की मां आशा देवी
पिता काशीनाथ तिवारी
भाभी सुमन देवी
अन्य ग्रामीण गवाह
छोटे भाई चंदन तिवारी
प्रत्यक्षदर्शी ललिता देवी
सहित कुल सात गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। परिजनों का दावा है कि इस मामले में करीब 25 गवाह आयोग के सामने गवाही देने के लिए तैयार हैं।
आयोग कार्यालय में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
गवाही के दौरान डीपीआरसी भवन स्थित न्यायिक आयोग कार्यालय में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रही। प्रवेश द्वार पर बाहरी लोगों की एंट्री सीमित रही और सभी आगंतुकों की मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद ही अंदर जाने की अनुमति दी गई।
अब आगे क्या होगा?
16 और 17 जुलाई को पुलिस अधिकारियों और जवानों की गवाही के बाद आयोग फोरेंसिक रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पुलिस पक्ष का मिलान करेगा। इसके बाद न्यायिक जांच आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा, जिस पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय हो सकती है।




