Highlights:
- 21 अगस्त को झारखंड के सभी 24 जिला मुख्यालयों में CM हेमंत सोरेन का पुतला दहन होगा
- छात्र नेताओं ने हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष मजबूती से नहीं रखने का आरोप लगाया
- दो महीने की समयसीमा से पहले ही आंदोलन फिर शुरू करने की चेतावनी दी गई
- मंच ने बड़े आंदोलन, ‘उलगुलान’ और जेल भरो आंदोलन की चेतावनी दी
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा सुधार को लेकर छात्रों का आंदोलन एक बार फिर तेज होने के संकेत हैं। लंबे समय तक चले धरना और भूख हड़ताल को मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद स्थगित करने वाले आंदोलनकारी छात्रों ने अब राज्य सरकार पर वादाखिलाफी और भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने ऐलान किया है कि शुक्रवार, 21 अगस्त को राज्य के सभी 24 जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया जाएगा।
छात्र नेताओं का आरोप है कि आंदोलन खत्म कराने के दौरान सरकार ने उनकी मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन हाईकोर्ट में संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा गया। इसी को लेकर छात्रों में नाराजगी बढ़ गई है। मंच ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने अपने रुख में बदलाव नहीं किया तो दो महीने की तय समयसीमा से पहले ही आंदोलन फिर शुरू किया जा सकता है।
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26 दिनों तक चला था धरना और भूख हड़ताल
JPSC-JSSC परीक्षा सुधार की मांग को लेकर छात्र रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में करीब 26 दिनों तक शांतिपूर्ण धरना और भूख हड़ताल पर बैठे थे। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में JSSC CGL समेत विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच तथा पूरे मामले की CBI जांच शामिल थी।
मंच के नेता रविंद्र पासवान के मुताबिक, छात्रों की मांगों के बाद सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द कीं। इससे आंदोलनकारी छात्रों को लगा कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से ले रही है। हालांकि, CBI जांच को लेकर सहमति नहीं बनने के बाद छात्रों ने न्यायिक जांच की मांग रखी और सरकार को दो महीने का समय देते हुए आंदोलन स्थगित कर दिया। पासवान का कहना है कि छात्रों ने सरकार की मंशा पर भरोसा किया था, लेकिन अब कोर्ट में सरकार के रवैये को देखकर उन्हें लग रहा है कि उनके साथ धोखा हुआ है।
‘सरकार ने कोर्ट में मजबूती से पक्ष नहीं रखा’
JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के नेता कुणाल प्रताप ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में सरकार की ओर से छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पर मजबूती से पक्ष नहीं रखा गया। उनका दावा है कि महाधिवक्ता सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए और सरकारी वकील की ओर से भी सरकार के फैसले का प्रभावी बचाव नहीं किया गया। कुणाल प्रताप ने सवाल उठाया कि जब सरकार ने परीक्षा में गड़बड़ियों के आधार पर कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था, तो अदालत के समक्ष उस निर्णय के आधार और तथ्यों को मजबूती से क्यों नहीं रखा गया।
छात्र नेताओं का कहना है कि आंदोलन स्थगित करने का फैसला सरकार के आश्वासन पर भरोसा करके लिया गया था। ऐसे में अब अदालत में सरकार की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों ने छात्रों की नाराजगी बढ़ा दी है।
सरकार पर ‘आंदोलन खत्म कराने’ का लगाया आरोप
मंच के नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों का आंदोलन खत्म कराने के लिए सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया था। छात्रों ने टकराव का रास्ता छोड़कर सरकार को अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने का समय दिया, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने उनके भरोसे को झटका दिया है। रविंद्र पासवान ने कहा कि जरूरत पड़ी तो दो महीने की समयसीमा पूरी होने से पहले ही आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर राज्यभर से बड़ी संख्या में छात्रों को रांची बुलाया जाएगा।
21 अगस्त को 24 जिलों में पुतला दहन
JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने शुक्रवार को झारखंड के सभी 24 जिला मुख्यालयों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने की घोषणा की है। मंच का कहना है कि यह आंदोलन के अगले चरण की शुरुआत होगी। छात्रों के मुताबिक, पुतला दहन के जरिए सरकार को यह संदेश दिया जाएगा कि परीक्षा सुधार, कथित अनियमितताओं की जांच और छात्रों की मांगों के मुद्दे पर वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
‘उलगुलान और संपूर्ण क्रांति’ की चेतावनी
मंच के नेता पीयूष सिंह ने कहा कि अगर सरकार ने छात्रों की मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई तो झारखंड में जल्द ही बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने ‘उलगुलान और संपूर्ण क्रांति’ की चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग उठाने की बात कही।वहीं, कुणाल प्रताप ने कहा कि अगर अदालत में सरकार का रुख इसी तरह बना रहा और छात्रों को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। मंच ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में राज्यभर से छात्रों को रांची बुलाकर बड़ा आंदोलन किया जा सकता है।
CBI जांच से लेकर परीक्षा रद्द करने तक की मांग
छात्र आंदोलन की शुरुआत से ही JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आंदोलनकारी छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मंच का कहना है कि छात्रों ने CBI जांच की मांग पर भी पीछे हटकर सरकार को न्यायिक जांच और अन्य आश्वासनों के आधार पर समय दिया। अब छात्र चाहते हैं कि सरकार अपने आश्वासनों को धरातल पर उतारने के साथ-साथ अदालत में भी अपने फैसलों का मजबूती से बचाव करे।
‘सरकार गंभीर नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन’
JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने साफ किया है कि 21 अगस्त का पुतला दहन महज प्रतीकात्मक विरोध नहीं, बल्कि आंदोलन के अगले चरण की शुरुआत है। मंच के नेताओं ने कहा है कि यदि सरकार ने छात्रों की मांगों और अपने आश्वासनों को लेकर ठोस कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले सकता है। छात्र नेताओं ने कहा कि जरूरत पड़ने पर जेल भरो आंदोलन से लेकर रांची में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन तक किया जाएगा। हालांकि, आंदोलन के अगले चरण की रूपरेखा और इसकी व्यापकता सरकार के रुख पर निर्भर करेगी।
फिलहाल 24 जिला मुख्यालयों पर होने वाला पुतला दहन सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बढ़ते तनाव का संकेत माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार छात्रों के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और JPSC-JSSC से जुड़े मामलों में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।